ट्रंप का ऐलान: ईरान वैसी डील को तैयार नहीं जो मुझे जरूरी लगती है, 60 दिन का युद्धविराम खत्म
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अगस्त 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि तेहरान भले ही समझौते का इच्छुक दिखता है, लेकिन वह उस तरह की डील स्वीकार करने को तैयार नहीं है जिसे वॉशिंगटन अनिवार्य मानता है। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का युद्धविराम उसी दिन समाप्त हो गया और दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर अपनी-अपनी स्थिति पर अडिग रहे।
ट्रंप के बयान का सार
ट्रंप ने सोमवार को पत्रकारों से कहा, 'वे डील करना चाहते हैं, लेकिन वे वैसी डील नहीं करेंगे, जैसी मुझे जरूरी लगती है।' उन्होंने बातचीत की विस्तृत स्थिति बताने से परहेज किया, लेकिन यह दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वॉशिंगटन का अटल लक्ष्य है। ट्रंप ने कहा, 'आप समझते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। यह बहुत आसान है। वे परमाणु युद्ध नहीं कर सकते।'
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी दावा
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका सभी ईरानी बंदरगाहों के विरुद्ध नौसैनिक घेराबंदी के ज़रिये होर्मुज जलडमरूमध्य पर 'पूरा नियंत्रण' रखता है। उन्होंने कहा, 'हम नाकेबंदी के ज़रिये इस जलडमरूमध्य को नियंत्रित करते हैं। मुझे इसे अपना इलाका घोषित करने का विचार पसंद है। अब इस पर हमारा पूरा कंट्रोल है।' यह दावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून की दृष्टि से विवादास्पद माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।
ओमान को लेकर ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने ओमान को दी गई अपनी पूर्व चेतावनी का भी संदर्भ दिया और कहा, 'मुझे नहीं लगता कि उनका व्यवहार बहुत अच्छा रहा, लेकिन हम उनसे आसानी से निपट लेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हम दूसरों से निपटते हैं।' रिपोर्टों के अनुसार, ओमान ईरान के साथ मिलकर जलडमरूमध्य को खोलने और इसे दोनों देशों के साझा नियंत्रण में रखने की संभावना पर काम कर रहा है।
ईरान की प्रतिक्रिया
इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि वॉशिंगटन और IRGC के बीच कोई गुप्त संवाद-चैनल (बैकचैनल) मौजूद है। अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने ट्रंप के दावे को 'भ्रम' करार दिया और स्पष्ट किया कि IRGC अधिकारियों और अमेरिकियों के बीच किसी प्रकार की बातचीत नहीं हो रही।
मोहेब्बी ने यह भी कहा कि ईरान का राजनयिक तंत्र फिलहाल अमेरिका के साथ वार्ता में नहीं है, क्योंकि वॉशिंगटन ने 'वादे तोड़े' हैं। यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास को रेखांकित करता है।
आगे क्या
60 दिन के युद्धविराम की समाप्ति के बाद अमेरिका-ईरान संबंध एक नाज़ुक मोड़ पर हैं। परमाणु वार्ता की विफलता और होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के कच्चे तेल के एक बड़े हिस्से की आवाजाही का केंद्र है। अब यह देखना होगा कि क्या कोई नया मध्यस्थ देश वार्ता को पुनर्जीवित कर सकता है।