ट्रंप ने ईरान का 7 दिन का युद्धविराम प्रस्ताव ठुकराया, मध्यावधि चुनाव बाद दोबारा बमबारी के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिवसीय युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और संकेत दिया है कि वह नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों के बाद तेहरान पर फिर से बमबारी की ओर बढ़ सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले की जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर रही है।
ट्रंप ने प्रस्ताव क्यों ठुकराया
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप को इस बात पर भरोसा नहीं है कि तेहरान अमेरिका की मांगों को वास्तव में पूरा करेगा। वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। इसी रुख के तहत उन्होंने युद्धविराम का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें एक नक्शे पर होर्मुज स्ट्रेट को 'ट्रंप स्ट्रेट' लिखा हुआ दिखाया गया है — एक ऐसा कदम जिसे कूटनीतिक विशेषज्ञों ने उकसावे की भाषा करार दिया है।
ईरान का प्रस्ताव और शर्तें
ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को एक ठोस सात दिवसीय योजना सौंपी थी, जिसमें रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करने की पेशकश शामिल थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों से कहा, 'ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को सात दिनों की एक ठोस योजना दी है। अगर जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो स्ट्रेट को दोबारा खोला जा सकता है और सात दिनों के अंदर जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल की जा सकती है।'
अराघची ने यह भी कहा, 'अब फैसला अमेरिका को करना है। ईरान दबाव, धमकी या डराने की कोशिशों को स्वीकार नहीं करता और दबाव में अपने संप्रभु अधिकारों को नहीं छोड़ेगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका वाकई गंभीर है, तो 'हर चीज तैयार है।'
ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी हटाना, तेल प्रतिबंधों में छूट देना, और एक ऐसा युद्धविराम लागू करना जिसमें लेबनान भी शामिल हो, जैसे बिंदु शामिल थे।
पृष्ठभूमि: कैसे यहाँ तक पहुँचे
मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद 17 जून 2026 को दोनों देशों ने मध्य पूर्व में युद्ध समाप्त करने के लिए एक 14-सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लेबनान सहित सभी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकने और 60 दिनों के भीतर किसी अंतिम समझौते तक पहुँचने की प्रतिबद्धता शामिल थी।
गौरतलब है कि 8 जुलाई 2026 को ट्रंप ने एकतरफा घोषणा कर दी कि यह समझौता 'खत्म हो चुका है।' इसके करीब एक हफ्ते बाद तेहरान ने भी समझौता ज्ञापन निलंबित कर दिया और आरोप लगाया कि वॉशिंगटन ने 'अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है।' अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान एक निजी बैठक में भी इस नए प्रस्ताव पर चर्चा की थी।
आगे क्या होगा
ट्रंप के इनकार के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिकी नीति किस दिशा में जाएगी, यह अनिश्चित बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी जारी रहने से वैश्विक तेल बाजारों पर दबाव बढ़ता जा रहा है, और कूटनीतिक विकल्प तेजी से सिकुड़ते नजर आ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगले कुछ हफ्ते इस संघर्ष की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।