होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध अभी भी जारी, ट्रंप के नाकाबंदी हटाने के दावे को ईरान ने नकारा
सारांश
मुख्य बातें
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बरकरार है — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नौसैनिक नाकाबंदी हटाने के दावे के बावजूद ईरानी जहाजों को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने में अभी भी बाधाएँ आ रही हैं। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, ईरानी नौसैनिक अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिकी केंद्रीय कमान की ओर से जहाजों को क्षेत्र में प्रवेश न करने की चेतावनियाँ अभी भी दी जा रही हैं।
ट्रंप का दावा और ज़मीनी हकीकत
ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में घोषणा की थी कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी 'अब हटा ली जाएगी।' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को 'तुरंत' खोल दिया जाना चाहिए, ताकि दोनों दिशाओं में बिना किसी प्रतिबंध के जहाजरानी हो सके और सभी समुद्री बारूदी सुरंगें हटाई जाएँ। लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति अलग बनी हुई है।
ईरान की शर्तें और नियंत्रण का दावा
ईरान की मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय ने शनिवार को आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से कहा कि ईरानी सशस्त्र बल होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण अधिकार के साथ नियंत्रण स्थापित कर रहे हैं। मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि जलमार्ग से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक पोतों और तेल टैंकरों को केवल ईरान द्वारा निर्धारित मार्गों का उपयोग करना होगा और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना से अनुमति लेनी होगी।
पिछले 24 घंटों में 20 जहाजों को अनुमति
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, आईआरजीसी नौसेना ने शनिवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में 20 जहाजों ने उसके बलों और ईरानी समुद्री अधिकारियों के समन्वय से जलडमरूमध्य को पार किया। इन जहाजों को रासायनिक उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए अनुमति दी गई थी — जो यह दर्शाता है कि ईरान चुनिंदा आधार पर पारगमन की अनुमति दे रहा है, न कि खुले तौर पर।
परमाणु मुद्दे पर टकराव
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में ईरान के साथ संभावित समझौते की शर्तें भी रखीं — तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करने पर सहमत होना होगा, और ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार का अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के समन्वय से पता लगाकर उसे नष्ट किया जाएगा। इस पर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु मुद्दे मौजूदा वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं।
संकट की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ईरान ने 28 फरवरी को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और सख्त कर दिया था। यह कदम इज़रायल और अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था, जिसके बाद इन देशों से जुड़े जहाजों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया। अमेरिका ने भी जलडमरूमध्य में अपने नौसैनिक प्रतिबंध बनाए रखे हैं, जिससे ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है, और किसी भी लंबे व्यवधान के वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।