17 अगस्त 2026
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अयोध्या राम मंदिर में रामलला का झूलनोत्सव शुरू, स्वर्ण जड़ित चांदी के झूले पर हुए मनोहारी दर्शन

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अयोध्या राम मंदिर में रामलला का झूलनोत्सव शुरू, स्वर्ण जड़ित चांदी के झूले पर हुए मनोहारी दर्शन

सारांश

सावन के पावन माह में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला का झूलनोत्सव शुरू हुआ। स्वर्ण जड़ित चांदी के फूलों से सजे झूले पर विराजमान रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह रहा। यह उत्सव रामनगरी की सदियों पुरानी भक्ति परंपरा का जीवंत स्वरूप है।

मुख्य बातें

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर , अयोध्या में सोमवार, 18 अगस्त से रामलला का झूलनोत्सव आरंभ हुआ।
उत्सव मूर्ति को स्वर्ण जड़ित चांदी से निर्मित, फूलों से सजे भव्य झूले पर विराजमान कराया गया।
गर्भगृह में भक्तों ने सखी भाव से कजरी, भक्ति गीत और भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता कौशल्या ने राम जन्म के लगभग चार माह बाद रामलला को झूला झुलाया था — यही परंपरा आज भी जीवित है।
नाग पंचमी पर शेषावतार मंदिर में भगवान लक्ष्मण के दर्शन भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहे।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में 18 अगस्त 2025 (सोमवार) से रामलला का झूलनोत्सव आरंभ हो गया, जिसमें उत्सव मूर्ति को स्वर्ण जड़ित चांदी से निर्मित फूलों से सजे भव्य झूले पर विराजमान कराया गया। सावन के पावन माह में आयोजित इस पारंपरिक उत्सव में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह सुबह से ही उमड़ पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

गर्भगृह को विशेष रूप से सजाया गया और रामलला की उत्सव मूर्ति को स्वर्ण जड़ित चांदी के झूले पर आसीन किया गया। फूलों की सुंदर सजावट के बीच श्रद्धालुओं ने सखी भाव से भक्ति गीत, कजरी और भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए। मंदिर परिसर भक्ति और उल्लास के वातावरण से सराबोर रहा।

झूलनोत्सव की धार्मिक पृष्ठभूमि

स्थानीय संतों के अनुसार, रामनगरी के मठ-मंदिरों में सावन के दौरान भगवान को झूला झुलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम के जन्म के लगभग चार माह पश्चात माता कौशल्या ने राजा दशरथ की अन्य रानियों के साथ मिलकर रामलला और उनके भाइयों को झूला झुलाया था, और इस अवसर पर सावन के पारंपरिक कजरी गीत गाए गए थे। कालांतर में यही परंपरा अयोध्या के धार्मिक उत्सवों का अभिन्न अंग बन गई।

मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में सावन के पूरे माह रामलला को प्रतिदिन विशेष वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत कर झूला झुलाने की परंपरा निभाई जा रही है। भजन-कीर्तन और पारंपरिक गीतों की मधुर स्वर-लहरियों के बीच श्रद्धालु झूले पर विराजमान रामलला के दर्शन कर आनंदित हुए। सुबह से ही मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा।

नाग पंचमी और शेषावतार मंदिर

इसी क्रम में नाग पंचमी के अवसर पर अयोध्या के शेषावतार मंदिर में भगवान लक्ष्मण के दर्शन और तस्वीरें भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार माना जाता है।

अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत

रामनगरी में सावन झूला उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अयोध्या की प्राचीन सांस्कृतिक और भक्ति परंपरा का जीवंत प्रतिबिंब है। अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में भगवान श्रीराम, माता सीता और अन्य विग्रहों को झूले पर विराजमान कराकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जो इस नगरी की सांस्कृतिक पहचान को और गहरा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे यह आयोजन धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। यह देखना रोचक होगा कि मंदिर ट्रस्ट आने वाले वर्षों में इन परंपराओं को किस पैमाने पर और किस व्यवस्था के साथ संचालित करता है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलला का झूलनोत्सव क्या है और यह कब मनाया जाता है?
झूलनोत्सव सावन माह में मनाया जाने वाला वह पारंपरिक धार्मिक उत्सव है, जिसमें भगवान की उत्सव मूर्ति को सजे-धजे झूले पर विराजमान कराया जाता है और भक्त भजन-कीर्तन के साथ दर्शन करते हैं। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में यह उत्सव 18 अगस्त 2025 (सोमवार) से शुरू हुआ।
राम मंदिर में झूलनोत्सव के लिए झूला कैसा है?
इस वर्ष रामलला की उत्सव मूर्ति को स्वर्ण जड़ित चांदी से निर्मित झूले पर विराजमान कराया गया है, जिसे फूलों से विशेष रूप से सजाया गया है। गर्भगृह सहित पूरे मंदिर परिसर को उत्सव के लिए सुसज्जित किया गया है।
झूलनोत्सव की धार्मिक परंपरा का क्या आधार है?
स्थानीय संतों के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम के जन्म के लगभग चार माह बाद माता कौशल्या ने राजा दशरथ की अन्य रानियों के साथ मिलकर रामलला को झूला झुलाया था और सावन की पारंपरिक कजरी गाई थी। कालांतर में यही परंपरा रामनगरी के मठ-मंदिरों की अनिवार्य धार्मिक परंपरा बन गई।
अयोध्या में झूलनोत्सव के दौरान और कौन से आयोजन होते हैं?
नाग पंचमी के अवसर पर अयोध्या के शेषावतार मंदिर में भगवान लक्ष्मण के विशेष दर्शन भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसके अलावा, अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में भगवान श्रीराम, माता सीता और अन्य विग्रहों को झूले पर विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
क्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में झूलनोत्सव पूरे सावन माह चलता है?
हाँ, मंदिर परंपरा के अनुसार सावन के पूरे माह रामलला को प्रतिदिन विशेष वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत कर झूला झुलाने की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह से ही झूला दर्शन के लिए मंदिर पहुँचते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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