अयोध्या श्रावण झूलनोत्सव: चांदी के झूले पर विराजेंगे रामलला, दिनेंद्र दास ने बताई परंपरा
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रावण झूलनोत्सव की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने 25 जुलाई को बताया कि यह समस्त आयोजन अयोध्या की सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार ही संपन्न होंगे और रामलला के लिए विशेष चांदी का झूला तैयार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है।
झूलनोत्सव की तिथि और परंपरा
अयोध्या में श्रावण झूलनोत्सव सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन (पूर्णिमा) तक चलता है। इस पर्व के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और उनके भाइयों के विग्रहों को मंदिरों तथा ऐतिहासिक मणि पर्वत पर फूलों एवं चाँदी-सोने से सुसज्जित झूलों पर विराजमान कराया जाता है। यह परंपरा वर्षों से अयोध्या की धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है।
दिनेंद्र दास ने क्या कहा
दिनेंद्र दास ने कहा, 'सारे कार्य अयोध्या की परंपरा के अनुसार होंगे। रामलला को हम वैसे ही ले जाएंगे, जैसे वे विराजमान हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता द्वारा बताई गई परंपराओं और नियमों के अनुसार ही सभी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, 'वहाँ वैष्णव संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ हो रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं।'
मणि पर्वत तक निकलेगी शोभायात्रा
झूलनोत्सव के दौरान अयोध्या के सैकड़ों मंदिरों से भगवान के विग्रहों की शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ प्राचीन मणि पर्वत तक पहुँचती है, जहाँ पेड़ों की डालियों पर सजे झूलों पर उन्हें झुलाया जाता है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी विशेष रूप से सुसज्जित चाँदी के झूलों पर रामलला को विराजमान कराया जाएगा।
प्रमुख मंदिरों में विशेष झाँकियाँ
इस अवसर पर कनक भवन, दशरथ महल, हनुमत निवास और मणिराम दास छावनी सहित अनेक प्रमुख मंदिरों में विशेष झाँकियाँ सजाई जाती हैं। गौरतलब है कि पूनावती कार्यक्रम में अयोध्या के संघ महंत और ट्रस्ट के सदस्य उपस्थित रहे, जिसमें दिनेंद्र दास ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
दर्शन व्यवस्था पर ट्रस्ट का आश्वासन
दिनेंद्र दास ने स्पष्ट किया कि रामलला के दर्शन की व्यवस्था सुचारू है और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा, 'मैं हर तरह से रामलला की सेवा कर रहा हूँ।' झूलनोत्सव के साथ अयोध्या में श्रद्धा और उत्सव का वातावरण और गहरा होने की उम्मीद है।