25 जुलाई 2026
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अयोध्या श्रावण झूलनोत्सव: चांदी के झूले पर विराजेंगे रामलला, दिनेंद्र दास ने बताई परंपरा

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अयोध्या श्रावण झूलनोत्सव: चांदी के झूले पर विराजेंगे रामलला, दिनेंद्र दास ने बताई परंपरा

सारांश

अयोध्या में श्रावण झूलनोत्सव की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं — रामलला के लिए चाँदी का विशेष झूला तैयार है। राम मंदिर ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने स्पष्ट किया कि सभी आयोजन सदियों पुरानी वैष्णव परंपराओं के अनुसार होंगे और मणि पर्वत तक शोभायात्रा निकलेगी।

मुख्य बातें

राम मंदिर ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने 25 जुलाई को पुष्टि की कि श्रावण झूलनोत्सव की तैयारियाँ पूर्ण हैं।
रामलला के लिए विशेष चाँदी का झूला तैयार किया गया है, जिस पर उन्हें विराजमान कराकर ले जाया जाएगा।
उत्सव सावन शुक्ल तृतीया से रक्षाबंधन (पूर्णिमा) तक चलेगा।
सैकड़ों मंदिरों से विग्रहों की शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ मणि पर्वत तक पहुँचेगी।
कनक भवन , दशरथ महल , हनुमत निवास और मणिराम दास छावनी में विशेष झाँकियाँ सजाई जाएंगी।
दिनेंद्र दास ने कहा — सभी आयोजन वैष्णव संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार होंगे, दर्शन व्यवस्था सुचारू है।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रावण झूलनोत्सव की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने 25 जुलाई को बताया कि यह समस्त आयोजन अयोध्या की सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार ही संपन्न होंगे और रामलला के लिए विशेष चांदी का झूला तैयार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है।

झूलनोत्सव की तिथि और परंपरा

अयोध्या में श्रावण झूलनोत्सव सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन (पूर्णिमा) तक चलता है। इस पर्व के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और उनके भाइयों के विग्रहों को मंदिरों तथा ऐतिहासिक मणि पर्वत पर फूलों एवं चाँदी-सोने से सुसज्जित झूलों पर विराजमान कराया जाता है। यह परंपरा वर्षों से अयोध्या की धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है।

दिनेंद्र दास ने क्या कहा

दिनेंद्र दास ने कहा, 'सारे कार्य अयोध्या की परंपरा के अनुसार होंगे। रामलला को हम वैसे ही ले जाएंगे, जैसे वे विराजमान हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता द्वारा बताई गई परंपराओं और नियमों के अनुसार ही सभी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, 'वहाँ वैष्णव संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ हो रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं।'

मणि पर्वत तक निकलेगी शोभायात्रा

झूलनोत्सव के दौरान अयोध्या के सैकड़ों मंदिरों से भगवान के विग्रहों की शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ प्राचीन मणि पर्वत तक पहुँचती है, जहाँ पेड़ों की डालियों पर सजे झूलों पर उन्हें झुलाया जाता है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी विशेष रूप से सुसज्जित चाँदी के झूलों पर रामलला को विराजमान कराया जाएगा।

प्रमुख मंदिरों में विशेष झाँकियाँ

इस अवसर पर कनक भवन, दशरथ महल, हनुमत निवास और मणिराम दास छावनी सहित अनेक प्रमुख मंदिरों में विशेष झाँकियाँ सजाई जाती हैं। गौरतलब है कि पूनावती कार्यक्रम में अयोध्या के संघ महंत और ट्रस्ट के सदस्य उपस्थित रहे, जिसमें दिनेंद्र दास ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

दर्शन व्यवस्था पर ट्रस्ट का आश्वासन

दिनेंद्र दास ने स्पष्ट किया कि रामलला के दर्शन की व्यवस्था सुचारू है और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा, 'मैं हर तरह से रामलला की सेवा कर रहा हूँ।' झूलनोत्सव के साथ अयोध्या में श्रद्धा और उत्सव का वातावरण और गहरा होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ट्रस्ट की संस्थागत साख का भी परीक्षण है। दिनेंद्र दास का 'परंपरा के अनुसार' वाला बयान सुनने में सरल लगता है, लेकिन यह उस बड़े सवाल का जवाब देने की कोशिश भी है जो नए मंदिर प्रशासन को लेकर कुछ धार्मिक हलकों में उठता रहा है — कि क्या सदियों की मर्यादाएँ संस्थागत ढाँचे में जीवित रह पाएंगी। अयोध्या के लिए यह उत्सव पर्यटन और आस्था दोनों का संगम है, और प्रशासन की परीक्षा इसी में है कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच परंपरा और व्यवस्था दोनों बरकरार रहें।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या में श्रावण झूलनोत्सव कब से कब तक चलेगा?
श्रावण झूलनोत्सव सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन (पूर्णिमा) तक चलेगा। इस दौरान अयोध्या के सैकड़ों मंदिरों में विशेष झाँकियाँ और शोभायात्राएँ आयोजित होती हैं।
रामलला को झूलनोत्सव में किस झूले पर विराजमान कराया जाएगा?
राम मंदिर ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास के अनुसार रामलला के लिए विशेष चाँदी का झूला तैयार किया गया है। उन्हें उसी झूले पर विराजमान कराकर ले जाया जाएगा।
मणि पर्वत का झूलनोत्सव में क्या महत्व है?
अयोध्या के ऐतिहासिक मणि पर्वत पर सैकड़ों मंदिरों से गाजे-बाजे के साथ विग्रहों की शोभायात्रा पहुँचती है, जहाँ पेड़ों की डालियों पर सजे झूलों पर भगवान को झुलाया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
झूलनोत्सव में कौन-कौन से प्रमुख मंदिर भाग लेते हैं?
कनक भवन, दशरथ महल, हनुमत निवास और मणिराम दास छावनी सहित अनेक प्रमुख मंदिरों में विशेष झाँकियाँ सजाई जाती हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी चाँदी के विशेष झूलों पर रामलला को विराजमान कराया जाता है।
राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था कैसी है?
राम मंदिर ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने बताया कि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है और बड़ी संख्या में भक्त प्रतिदिन दर्शन के लिए आ रहे हैं। वैष्णव संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ संपन्न हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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