जीएसटी में कटौती से मांग में वृद्धि, तीसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि 8.3 प्रतिशत के आस-पास: रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- जीडीपी वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान।
- जीएसटी दरों में कटौती से मांग में वृद्धि।
- पिछले वर्ष के ऊंचे आधार का प्रभाव।
- सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) दर में वृद्धि।
- वित्त वर्ष 2027 के लिए सकारात्मक संकेत।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान 8.3 प्रतिशत के आसपास रहने का है। यह वृद्धि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कमी से उत्पन्न हुई मांग के कारण संभव है, हालांकि पिछले वर्ष के ऊंचे आधार (बेस इफेक्ट) का प्रभाव भी देखने को मिलेगा।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 6.5 प्रतिशत से अधिक होगी। हालांकि, यह दूसरी तिमाही के 8.1 प्रतिशत से थोड़ी कम हो सकती है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, "27 फरवरी को जारी होने वाले वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े 8.3 प्रतिशत रह सकते हैं, जो पिछले साल की समान अवधि के 6.4 प्रतिशत से काफी अधिक है।"
रिपोर्ट के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर घटकर 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो दूसरी तिमाही के 8.7 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि के 10.3 प्रतिशत से कम है। इसकी वजह महंगाई में कमी के चलते जीडीपी डिफ्लेटर में गिरावट बताई गई है।
बैंक ने कहा कि उसके अनुमान पुराने बेस ईयर पर आधारित हैं, क्योंकि सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा बेस ईयर में बदलाव के बाद जीडीपी आंकड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि का अनुमान फिलहाल मजबूत बना हुआ है, और वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती संकेत भी सकारात्मक हैं, लेकिन नए बेस ईयर को लेकर स्पष्टता आने के बाद वार्षिक अनुमानों की पुनरावलोकन करना होगा।
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) शुक्रवार को 2022-23 के संशोधित बेस ईयर के साथ जीडीपी आंकड़े जारी करेगा।
सरकार ने पहले बताया था कि नई सीरीज के लिए वित्त वर्ष 2022-23 को बेस ईयर चुना गया है। नए इनपुट्स के माध्यम से संस्थागत क्षेत्रों, खासकर निजी कंपनियों और एमएसएमई से जुड़े क्षेत्रों में जीडीपी के अनुमानों को और मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है, जहां लंबे समय से डेटा की कमी रही है।