विप्रो पर धर्मांतरण दबाव और जबरन इस्तीफे के आरोप, कंपनी बोली — पुणे पुलिस जांच में पूरा सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
आईटी कंपनी विप्रो ने 4 जून 2026 को स्पष्ट किया कि उसने पुणे पुलिस के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज़ साझा कर दिए हैं और एक पूर्व महिला कर्मचारी की शिकायत से जुड़ी जांच में पूरा सहयोग दे रही है। यह शिकायत कंपनी के हिंजवाड़ी, पुणे स्थित कार्यालय में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत रही एक महिला ने दर्ज कराई है, जिसमें कथित धार्मिक उत्पीड़न और दबाव में इस्तीफे के आरोप लगाए गए हैं।
क्या हैं आरोप
शिकायतकर्ता ने हिंजवाड़ी पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि एक महिला सहकर्मी ने उन पर बार-बार इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव डाला — यह कहते हुए कि इससे उनकी जीवनशैली और भविष्य के अवसर बेहतर होंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सहकर्मी ने उन्हें एक मुस्लिम परिचित से संबंध बनाने और हिंदू धर्म छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि यह मुद्दा कई बार उठाने के बावजूद संबंधित सहकर्मी के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। उनके अधिवक्ता विवेक भोसले ने आरोप लगाया है कि उनका इस्तीफा दबाव में और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए लिया गया।
विप्रो का आधिकारिक बयान
विप्रो ने एक बयान में कहा, 'विप्रो में कर्मचारियों का कल्याण, गरिमा और सम्मान सर्वोपरि है। हम किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार, भेदभाव, उत्पीड़न या ऐसे कार्यों के प्रति जीरो-टोलरेंस की नीति अपनाते हैं जो किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता को खतरे में डालते हैं।'
कंपनी ने यह भी कहा कि चूँकि मामला फिलहाल जांच के अधीन है, इसलिए वह विशिष्टताओं पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। विप्रो ने दोहराया कि वह सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुलिस की कार्रवाई
हिंजवाड़ी पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के बाद कंपनी को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कथित तौर पर शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध बहाली, मुआवज़े और अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की गई है। पुलिस ने कंपनी से संबंधित दस्तावेज़ तलब किए थे, जो विप्रो के अनुसार साझा किए जा चुके हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, यह प्रकरण धार्मिक उत्पीड़न से संबंधित नहीं है — हालाँकि शिकायतकर्ता के आरोप इसके विपरीत हैं। यह विरोधाभास जांच के केंद्र में है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब कॉर्पोरेट कार्यस्थलों में धार्मिक स्वतंत्रता और उत्पीड़न से जुड़े मामलों पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।
जांच के नतीजे और पुलिस की आगामी कार्रवाई यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कंपनी की आंतरिक शिकायत प्रणाली कितनी प्रभावी रही।