पुणे हिंजवडी यौन उत्पीड़न केस: बीमा कंपनी के एरिया मैनेजर पर पूर्व महिला कर्मचारी का गंभीर आरोप, FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के हिंजवडी क्षेत्र में स्थित एक निजी बीमा कंपनी की पूर्व महिला कर्मचारी ने अपने एरिया मैनेजर मोहम्मद सादिक पर यौन उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणियाँ करने, निजी मुलाकातों के लिए दबाव बनाने तथा नौकरी से निकालने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर हिंजवडी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 74, 75, 78 और 351(2) के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
शिकायत में क्या कहा गया
पीड़िता के अनुसार, वह कंपनी में सीनियर एसोसिएट के पद पर कार्यरत थी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की हिंजवडी एवं वाकड़ शाखाओं से जुड़े कार्य देख रही थी। उसका आरोप है कि जनवरी से ही एरिया मैनेजर लगातार व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने का दबाव बना रहे थे, जबकि उसकी कार्य-संबंधी रिपोर्टिंग टीम लीडर को होती थी।
19 मई की कथित घटना
शिकायत के मुताबिक, 19 मई को काम समाप्त होने के बाद पीड़िता को औंध स्थित मुख्य कार्यालय बुलाया गया। बैठक के बाद बस का इंतज़ार कर रही महिला को आरोपी ने कथित तौर पर घर छोड़ने के बहाने अपनी कार में बैठाया और रास्ते में आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं। पीड़िता का दावा है कि कार लॉक होने के कारण वह बाहर नहीं निकल सकी और घर छोड़ते समय उसे चुप रहने की धमकी दी गई।
29 मई — लोणावला यात्रा का आरोप
पीड़िता के अनुसार, 29 मई को ग्राहक से मिलने के बहाने आरोपी उसे हिंजवडी से लोणावला हाईवे स्थित एक ढाबे तक ले गया, जहाँ कथित तौर पर अशोभनीय टिप्पणियाँ कीं, आर्थिक प्रलोभन दिया और एकांत स्थान पर समय बिताने का सुझाव दिया। महिला ने रिश्तेदार को फोन कर सूचना दी, जिसके बाद आरोपी उसे तत्काल पुणे वापस लाया और कथित तौर पर करियर बर्बाद करने की धमकी दी।
पीड़िता के अतिरिक्त दावे
पीड़िता ने आरोप लगाया कि कंपनी में शाहिना रफीक नाम की एक सहकर्मी ने उस पर वरिष्ठ अधिकारी से शारीरिक संबंध बनाने और बाद में दुबई भेजे जाने का दबाव बनाया। उसने आरोपों को “छुपे हुए धर्मांतरण के तरीके” के रूप में वर्णित किया और कहा कि 10 महीने तक मानसिक प्रताड़ना सहन करने के बाद विरोध करने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया। ये दावे पीड़िता के बयान पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
पुलिस और कंपनी की प्रतिक्रिया
हिंजवडी पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शिकायत के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जाँच की जाएगी और तथ्यों के सत्यापन के बाद ही कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। आरोपी पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पीड़िता ने बताया कि उसने पहले कंपनी प्रबंधन को घटनाक्रम की जानकारी दी थी, लेकिन कथित तौर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने पर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
आगे क्या
पुलिस अब शिकायत में उल्लिखित तिथियों, स्थानों, कॉल रिकॉर्ड और कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज़ों की जाँच करेगी। यह मामला कॉर्पोरेट क्षेत्र में POSH अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत तंत्र की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।