यूपी में रोबोटिक्स और ईवी प्रशिक्षण पर जोर, 150 आईटीआई का आधुनिकीकरण और ₹1,000 करोड़ का फंड
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 मई 2025 को कौशल विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), सीएनसी मशीनिंग और कंप्यूटर-आधारित तकनीकी प्रशिक्षण को अपनी रोजगार रणनीति के केंद्र में रखा है। राज्य के सरकारी आईटीआई में 1.29 लाख और निजी आईटीआई में 2.77 लाख युवाओं के नामांकन के साथ, सरकार अब पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़कर 'न्यू एज स्किल्स' की ओर तेज़ी से अग्रसर है।
मुख्य घटनाक्रम
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने सोमवार को लखनऊ स्थित विधानसभा कार्यालय कक्ष संख्या-58 में प्रशिक्षण एवं सेवायोजन स्थायी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विभागीय योजनाओं और भावी रणनीति की विस्तृत समीक्षा की गई।
मंत्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि उद्योगों की माँग के अनुरूप दक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
टाटा टेक्नोलॉजीज साझेदारी और आईटीआई आधुनिकीकरण
टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से प्रदेश के 150 आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इन संस्थानों को अत्याधुनिक मशीनों और तकनीकी संसाधनों से लैस किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण सीधे उद्योगों की माँग से जुड़ सके। यह साझेदारी उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें राज्य सरकारें निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता को सार्वजनिक कौशल संस्थानों में समाहित कर रही हैं।
इसके अतिरिक्त, स्टेट स्किल डेवलपमेंट फंड (एसएसडीएफ) के तहत ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसका उपयोग रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट प्रवीण और सेंटर ऑफ इनोवेशन
'प्रोजेक्ट प्रवीण' के माध्यम से इंटरमीडिएट स्तर के विद्यार्थियों को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी दक्षता से भी जोड़ा जा रहा है। इसके समानांतर, प्रदेश में पाँच 'सेंटर ऑफ इनोवेशन, इंटीग्रेशन एंड इनोवेशन (सी-III)' स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें भविष्य में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा।
आम युवाओं पर असर
रोजगार मेलों के ज़रिए प्रशिक्षित युवाओं को सीधे उद्योगों से जोड़ने की प्रक्रिया को और सुदृढ़ किया जा रहा है। जिला स्तर पर स्किल मैपिंग और सर्वेक्षण के माध्यम से स्थानीय उद्योगों की ज़रूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएँगे। गौरतलब है कि सरकार पारंपरिक और अनौपचारिक रूप से कुशल कारीगरों को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें उद्यमिता की ओर ले जाने की योजना पर काम कर रही है।
क्या होगा आगे
मंत्री कपिल देव अग्रवाल के अनुसार, राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देना है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में कौशल-रोजगार के बीच की खाई को पाटना नीतिगत प्राथमिकता बनती जा रही है।