यूपी के ITI होंगे 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस': टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट देंगे Industry 4.0 प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार के लिए तैयार करने की दिशा में टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट ने 26 मई 2025 को लखनऊ में राज्य सरकार के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अपनी विस्तृत कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत कीं। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को कौशल विकास के जरिए मजबूत आधार देना है।
आईटीआई का आधुनिकीकरण: क्या है टाटा टेक्नोलॉजीज की योजना
टाटा टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को चरणबद्ध तरीके से 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (CoE) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन संस्थानों में आधुनिक मशीनें, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और Industry 4.0 आधारित तकनीकों को एकीकृत किया जाएगा। लक्ष्य यह है कि ITI से निकलने वाले युवा न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उद्योगों की माँग के अनुरूप भी तैयार हों।
डेलॉयट का विश्लेषण: स्किल को निवेश से जोड़ने की रणनीति
वैश्विक परामर्श कंपनी डेलॉयट के विशेषज्ञों ने भविष्य के रोजगार रुझानों (Future Job Trends), उद्योगों की बदलती माँग और निवेश-आधारित रोजगार सृजन मॉडल का विश्लेषण प्रस्तुत किया। डेलॉयट ने सुझाव दिया कि कौशल विकास योजनाओं को सीधे औद्योगिक निवेश और नई तकनीकों से जोड़ा जाए, ताकि युवाओं को रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसर भी मिल सकें। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की कोशिशें जारी हैं।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल की प्रतिक्रिया
बैठक में कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए वैश्विक संस्थाओं की विशेषज्ञता का पूरा लाभ उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट जैसी संस्थाओं का सहयोग प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों संस्थाओं की कार्ययोजनाओं को शीघ्र धरातल पर लागू किया जाए।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी और आगे की राह
बैठक में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। गौरतलब है कि योगी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल बनाना है — जिससे उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी स्किल कैपिटल के रूप में उभर सके। दोनों कंपनियों की कार्ययोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और विस्तृत रूपरेखा आने वाले हफ्तों में सामने आने की उम्मीद है।