29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति पद रिक्त, उच्च शिक्षा पर गहराया प्रशासनिक संकट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति पद रिक्त, उच्च शिक्षा पर गहराया प्रशासनिक संकट

सारांश

तमिलनाडु के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं हैं — और अगले माह यह संख्या 17 हो सकती है। आईएएस अधिकारी दूर से संभाल रहे हैं कमान, शोध और प्रशासन ठप। 29 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय का फैसला इस संकट की दिशा तय कर सकता है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति पद रिक्त हैं, जिससे शासन व शोध कार्य प्रभावित।
अलगप्पा विश्वविद्यालय और मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के कुलपतियों का कार्यकाल शीघ्र समाप्त होने पर रिक्त विश्वविद्यालयों की संख्या 17 हो जाएगी।
मदुरै कामराज विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक सहित वरिष्ठ पद एक वर्ष से अधिक समय से रिक्त।
राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारियों को संयोजक नियुक्त किया, लेकिन वे चेन्नई से दूरस्थ रूप से कार्य कर रहे हैं।
जोसेफ विजय और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के बीच सहयोगात्मक संबंधों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया अधूरी।
सर्वोच्च न्यायालय में 29 जुलाई 2026 को कुलपति शक्तियों पर सुनवाई, जिसका फैसला राज्य के उच्च शिक्षा ढाँचे को नई दिशा दे सकता है।

तमिलनाडु के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपतियों की नियुक्ति न होने से उच्च शिक्षा क्षेत्र में गंभीर प्रशासनिक संकट उत्पन्न हो गया है। 29 जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, इन संस्थानों में शासन व्यवस्था, शोध कार्यक्रम और नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शिक्षाविदों का कहना है कि यह संकट केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी सीधा असर डाल रहा है।

प्रभावित विश्वविद्यालय

कुलपति पद की रिक्तता से जूझ रहे प्रमुख संस्थानों में मद्रास विश्वविद्यालय, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, भारथियार विश्वविद्यालय, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, तमिल विश्वविद्यालय, भारथिदासन विश्वविद्यालय, पेरियार विश्वविद्यालय, तिरुवल्लुवर विश्वविद्यालय, तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, डॉ. अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय, तमिलनाडु ओपन विश्वविद्यालय और तमिलनाडु शारीरिक शिक्षा एवं खेल विश्वविद्यालय शामिल हैं।

स्थिति अगले माह और विकट होने की आशंका है। कराईकुडी स्थित अलगप्पा विश्वविद्यालय और तिरुनेलवेली स्थित मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के कुलपतियों का कार्यकाल शीघ्र समाप्त होने वाला है, जिसके बाद बिना स्थायी कुलपति वाले विश्वविद्यालयों की संख्या 17 हो जाएगी।

संकट की गहराई

शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, समस्या केवल कुलपति पद की रिक्तता तक सीमित नहीं है। मदुरै कामराज विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक, प्राचार्य और निदेशक जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक पद एक वर्ष से अधिक समय से रिक्त पड़े हैं। इन रिक्तियों के कारण नियमित प्रशासनिक कार्य बाधित हो रहे हैं और अनेक शैक्षणिक व शोध गतिविधियों की गति मंद पड़ गई है।

शोधकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि स्थायी नेतृत्व के अभाव में कई दीर्घकालिक शोध परियोजनाएं और अकादमिक कार्यक्रम ठप पड़ने की कगार पर हैं।

आईएएस अधिकारियों पर टिका प्रशासन

स्थायी कुलपतियों की अनुपस्थिति में राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारियों को बतौर संयोजक विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, इनमें से कई अधिकारी चेन्नई से दूरस्थ रूप से कार्य संभाल रहे हैं और साथ ही अन्य सरकारी दायित्व भी निभा रहे हैं। इससे विश्वविद्यालयों की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध निर्णय क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वरिष्ठ प्रोफेसरों को अतिरिक्त प्रशासनिक भार सौंपे जाने से फैकल्टी में असंतोष बढ़ा है। शिक्षकों का कहना है कि इस व्यवस्था से वरिष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हुए हैं और विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक माहौल प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के कार्यकाल में राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच कुलपति नियुक्ति के अधिकार को लेकर लंबे समय तक विवाद चला, जिसके कारण नियुक्तियां अटकी रहीं। मौजूदा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के बीच संबंधों को पहले की तुलना में अधिक सहयोगात्मक माना जा रहा है, फिर भी नियुक्ति प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।

प्रोफेसरों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार की स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है, जिससे विश्वविद्यालयों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई

इस बीच, सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हैं, जहाँ 29 जुलाई 2026 को कुलपति की शक्तियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई निर्धारित है। शीर्ष अदालत का यह निर्णय तमिलनाडु के उच्च शिक्षा शासन और विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढाँचे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। शिक्षाविदों का मानना है कि इस संकट का स्थायी समाधान नए कुलपतियों की त्वरित नियुक्ति के बिना संभव नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 15 रिक्त पद यह बताते हैं कि इच्छाशक्ति और प्रक्रिया के बीच की खाई अभी भी गहरी है। आईएएस अधिकारियों को संयोजक बनाकर दूर से विश्वविद्यालय चलाना एक तात्कालिक जुगाड़ है, न कि दीर्घकालिक समाधान — और इससे शैक्षणिक स्वायत्तता का जो क्षरण हो रहा है, वह राष्ट्रीय रैंकिंग और शोध उत्पादकता पर वर्षों तक असर डालेगा। 29 जुलाई की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई इस संकट का अंत नहीं, बल्कि एक नया मोड़ होगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में कितने विश्वविद्यालयों में कुलपति पद रिक्त हैं?
29 जुलाई 2026 तक तमिलनाडु के 15 राज्य विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं हैं। अगले माह अलगप्पा विश्वविद्यालय और मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के कुलपतियों का कार्यकाल समाप्त होने पर यह संख्या 17 हो जाएगी।
कुलपति न होने से विश्वविद्यालयों पर क्या असर पड़ रहा है?
स्थायी कुलपतियों की अनुपस्थिति में शासन व्यवस्था, शोध परियोजनाएं और नीतिगत निर्णय बाधित हो रहे हैं। रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक जैसे वरिष्ठ पद भी एक वर्ष से अधिक समय से रिक्त हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य ठप पड़ने की स्थिति बन रही है।
फिलहाल विश्वविद्यालयों का प्रशासन कौन संभाल रहा है?
राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारियों को बतौर संयोजक नियुक्त किया है। हालांकि, ये अधिकारी चेन्नई से दूरस्थ रूप से कार्य कर रहे हैं और अन्य सरकारी दायित्व भी निभा रहे हैं, जिससे प्रभावी निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय में 29 जुलाई को क्या सुनवाई होनी है?
सर्वोच्च न्यायालय में 29 जुलाई 2026 को कुलपति की शक्तियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई निर्धारित है। इस फैसले से तमिलनाडु के उच्च शिक्षा शासन और विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढाँचे की दिशा तय हो सकती है।
तमिलनाडु में कुलपति नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है?
पिछली DMK सरकार के दौरान राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच कुलपति नियुक्ति के अधिकार को लेकर लंबा विवाद चला, जिसने प्रक्रिया को अवरुद्ध किया। मौजूदा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के बीच संबंध अधिक सहयोगात्मक बताए जाते हैं, फिर भी नियुक्ति प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले