पीएमके संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने 88वें जन्मदिन पर सक्रिय राजनीति छोड़ी, अंबुमणि को सौंपी कमान
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने 25 जुलाई 2026 को अपने 88वें जन्मदिन पर सक्रिय राजनीति से विदाई की घोषणा करते हुए कहा कि अब वे किसी भी राजनीतिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। पार्टी का पूर्ण नेतृत्व अब उनके पुत्र एवं पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास के हाथों में होगा। तमिलनाडु की राजनीति में चार दशकों से अधिक के सक्रिय योगदान के बाद यह विदाई एक युग के अंत का प्रतीक है।
घोषणा का अवसर और स्थान
यह ऐतिहासिक घोषणा टिंडीवनम स्थित थाईयूर एस्टेट में आयोजित जन्मदिन समारोह के दौरान की गई। अंबुमणि रामदास दिन में पहले अपने पिता से आशीर्वाद लेने पहुँचे थे। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उपस्थिति में डॉ. रामदास ने स्पष्ट शब्दों में कहा — 'आज से मैं राजनीति पर बात नहीं करूँगा। मैं राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करूँगा। अब से राजनीति की ज़िम्मेदारी अंबुमणि संभालेंगे। मुझसे मिलने आने वाले हर व्यक्ति से मैं मिलता रहूँगा, लेकिन मुझसे राजनीति की बात न करें।' इस ऐलान पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने तालियों से अभिवादन किया।
महीनों के मतभेद के बाद सुलह की झलक
यह अवसर इसलिए भी उल्लेखनीय था क्योंकि पिता और पुत्र के बीच लंबे समय से सार्वजनिक मतभेद चले आ रहे थे, जिसने पार्टी के भीतर अनिश्चितता का माहौल बना दिया था। पार्टी की संगठनात्मक संरचना, नेतृत्व शैली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर दोनों के बीच खुली असहमति सामने आई थी और प्रतिद्वंद्वी गुट भी उभरे थे। दोनों पक्षों के समर्थकों ने एक-दूसरे के विरोध में प्रदर्शन भी किए थे। शनिवार को अंबुमणि की उपस्थिति में यह घोषणा महीनों की आंतरिक कलह को विराम देने के प्रयास के रूप में व्यापक रूप से देखी जा रही है।
पीएमके पर असर और राजनीतिक संदर्भ
आंतरिक विवाद ने वन्नियार समुदाय पर आधारित इस क्षेत्रीय दल की चुनावी रणनीति और भविष्य की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए थे। वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बार-बार सुलह की अपील की थी। अब डॉ. अंबुमणि रामदास के हाथों में पूर्ण राजनीतिक कमान आने के बाद पार्टी के एकजुट होने और अपनी रणनीति को नए सिरे से तय करने की उम्मीद जताई जा रही है।
सर्वदलीय श्रद्धांजलि और विरासत
विभिन्न दलों के नेताओं ने डॉ. रामदास को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए तमिलनाडु की राजनीति में उनके दीर्घकालिक योगदान और पीएमके को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका को स्वीकार किया। गौरतलब है कि डॉ. रामदास ने चार दशकों से अधिक समय तक तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और वन्नियार समुदाय के अधिकारों के लिए एक प्रमुख आवाज़ बने रहे।
आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, डॉ. अंबुमणि रामदास के सामने अब पार्टी को एकजुट रखने, गठबंधन की दिशा तय करने और आगामी चुनावों में पीएमके की स्थिति मज़बूत करने की तिहरी चुनौती है। डॉ. रामदास की यह विदाई तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है।