25 जुलाई 2026
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पीएमके संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने 88वें जन्मदिन पर सक्रिय राजनीति छोड़ी, अंबुमणि को सौंपी कमान

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पीएमके संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने 88वें जन्मदिन पर सक्रिय राजनीति छोड़ी, अंबुमणि को सौंपी कमान

सारांश

88 साल की उम्र में डॉ. एस. रामदास ने वह कदम उठाया जिसका इंतज़ार पीएमके को महीनों से था — सक्रिय राजनीति से पूर्ण विदाई और बेटे अंबुमणि को कमान। पिता-पुत्र के बीच चली आ रही खींचतान के बाद यह घोषणा पार्टी के लिए राहत और नई शुरुआत दोनों है।

मुख्य बातें

रामदास ने 25 जुलाई 2026 को अपने 88वें जन्मदिन पर सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा की।
पार्टी की राजनीतिक ज़िम्मेदारी पूरी तरह डॉ.
अंबुमणि रामदास को सौंपी गई, जो पहले से पीएमके अध्यक्ष हैं।
घोषणा टिंडीवनम के थाईयूर एस्टेट में जन्मदिन समारोह के दौरान हुई, जहाँ अंबुमणि आशीर्वाद लेने पहुँचे थे।
यह घोषणा पिता-पुत्र के बीच महीनों से चले आ रहे सार्वजनिक मतभेद के बाद आई है, जिसने पार्टी में विभाजन की आशंका पैदा की थी।
रामदास का राजनीतिक करियर चार दशकों से अधिक का रहा; सर्वदलीय नेताओं ने उनकी विरासत को सराहा।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने 25 जुलाई 2026 को अपने 88वें जन्मदिन पर सक्रिय राजनीति से विदाई की घोषणा करते हुए कहा कि अब वे किसी भी राजनीतिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। पार्टी का पूर्ण नेतृत्व अब उनके पुत्र एवं पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास के हाथों में होगा। तमिलनाडु की राजनीति में चार दशकों से अधिक के सक्रिय योगदान के बाद यह विदाई एक युग के अंत का प्रतीक है।

घोषणा का अवसर और स्थान

यह ऐतिहासिक घोषणा टिंडीवनम स्थित थाईयूर एस्टेट में आयोजित जन्मदिन समारोह के दौरान की गई। अंबुमणि रामदास दिन में पहले अपने पिता से आशीर्वाद लेने पहुँचे थे। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उपस्थिति में डॉ. रामदास ने स्पष्ट शब्दों में कहा — 'आज से मैं राजनीति पर बात नहीं करूँगा। मैं राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करूँगा। अब से राजनीति की ज़िम्मेदारी अंबुमणि संभालेंगे। मुझसे मिलने आने वाले हर व्यक्ति से मैं मिलता रहूँगा, लेकिन मुझसे राजनीति की बात न करें।' इस ऐलान पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने तालियों से अभिवादन किया।

महीनों के मतभेद के बाद सुलह की झलक

यह अवसर इसलिए भी उल्लेखनीय था क्योंकि पिता और पुत्र के बीच लंबे समय से सार्वजनिक मतभेद चले आ रहे थे, जिसने पार्टी के भीतर अनिश्चितता का माहौल बना दिया था। पार्टी की संगठनात्मक संरचना, नेतृत्व शैली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर दोनों के बीच खुली असहमति सामने आई थी और प्रतिद्वंद्वी गुट भी उभरे थे। दोनों पक्षों के समर्थकों ने एक-दूसरे के विरोध में प्रदर्शन भी किए थे। शनिवार को अंबुमणि की उपस्थिति में यह घोषणा महीनों की आंतरिक कलह को विराम देने के प्रयास के रूप में व्यापक रूप से देखी जा रही है।

पीएमके पर असर और राजनीतिक संदर्भ

आंतरिक विवाद ने वन्नियार समुदाय पर आधारित इस क्षेत्रीय दल की चुनावी रणनीति और भविष्य की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए थे। वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बार-बार सुलह की अपील की थी। अब डॉ. अंबुमणि रामदास के हाथों में पूर्ण राजनीतिक कमान आने के बाद पार्टी के एकजुट होने और अपनी रणनीति को नए सिरे से तय करने की उम्मीद जताई जा रही है।

सर्वदलीय श्रद्धांजलि और विरासत

विभिन्न दलों के नेताओं ने डॉ. रामदास को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए तमिलनाडु की राजनीति में उनके दीर्घकालिक योगदान और पीएमके को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका को स्वीकार किया। गौरतलब है कि डॉ. रामदास ने चार दशकों से अधिक समय तक तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और वन्नियार समुदाय के अधिकारों के लिए एक प्रमुख आवाज़ बने रहे।

आगे की राह

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, डॉ. अंबुमणि रामदास के सामने अब पार्टी को एकजुट रखने, गठबंधन की दिशा तय करने और आगामी चुनावों में पीएमके की स्थिति मज़बूत करने की तिहरी चुनौती है। डॉ. रामदास की यह विदाई तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तमिलनाडु की जाति-आधारित क्षेत्रीय राजनीति में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। असली सवाल यह है कि क्या अंबुमणि उस वन्नियार मतदाता आधार को एकजुट रख पाएँगे जिसे रामदास ने दशकों की मेहनत से बनाया — खासकर तब जब पार्टी के भीतर गुटबाज़ी अभी पूरी तरह थमी नहीं है। पिता की छाया से बाहर निकलकर नेतृत्व साबित करना अंबुमणि के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी, और तमिलनाडु में गठबंधन की राजनीति इस परीक्षा को और जटिल बनाती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. एस. रामदास ने सक्रिय राजनीति से संन्यास कब और कहाँ लिया?
डॉ. एस. रामदास ने 25 जुलाई 2026 को अपने 88वें जन्मदिन पर टिंडीवनम स्थित थाईयूर एस्टेट में आयोजित समारोह के दौरान सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे किसी राजनीतिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
पीएमके की कमान अब किसके हाथ में होगी?
पीएमके की पूर्ण राजनीतिक ज़िम्मेदारी अब डॉ. अंबुमणि रामदास के हाथों में होगी, जो पहले से पार्टी के अध्यक्ष हैं। डॉ. रामदास ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि अब से राजनीति की सारी ज़िम्मेदारी अंबुमणि संभालेंगे।
पिता-पुत्र के बीच मतभेद किस बात को लेकर था?
पार्टी की संगठनात्मक संरचना, नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर डॉ. रामदास और अंबुमणि के बीच खुली असहमति सामने आई थी। इससे पार्टी में प्रतिद्वंद्वी गुट उभरे और दोनों पक्षों के समर्थकों ने एक-दूसरे के विरोध में प्रदर्शन भी किए।
डॉ. रामदास की राजनीतिक विरासत क्या है?
डॉ. रामदास ने चार दशकों से अधिक समय तक तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और पट्टाली मक्कल काची को वन्नियार समुदाय की प्रमुख राजनीतिक आवाज़ के रूप में स्थापित किया। सर्वदलीय नेताओं ने उनके जन्मदिन पर उनके योगदान को सराहा।
इस घोषणा का पीएमके के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घोषणा महीनों से चले आ रहे आंतरिक विवाद को समाप्त करने का प्रयास है और अंबुमणि को पूर्ण अधिकार के साथ पार्टी चलाने का अवसर देती है। हालाँकि पार्टी को एकजुट रखना और आगामी चुनावों में रणनीति तय करना अंबुमणि के सामने बड़ी चुनौती होगी।
राष्ट्र प्रेस
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