25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का जश्न, सपा बोली — छात्र आंदोलन की बड़ी जीत

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का जश्न, सपा बोली — छात्र आंदोलन की बड़ी जीत

सारांश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी। सपा से लेकर आजाद समाज पार्टी तक, विपक्ष ने इसे 35 दिन के छात्र आंदोलन की जीत बताया। साथ ही मुख्यमंत्री योगी के विवादित बयान पर भी सवाल उठे।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को उत्तर प्रदेश में विपक्षी प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हुआ।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने इसे 35 दिनों के छात्र-युवा आंदोलन की जीत बताया।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने CM योगी के 'नकल माफिया को मिट्टी में मिला देंगे' बयान पर संवैधानिक भाषा का सवाल उठाया।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस्तीफे को 'महज औपचारिकता' करार दिया।
आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर ने सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। समाजवादी पार्टी (सपा), आजाद समाज पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को 35 दिनों से चले आ रहे छात्र-युवा आंदोलन की निर्णायक जीत करार दिया। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक विवादित बयान को लेकर भी विपक्ष ने तीखे सवाल खड़े किए।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने मुख्यमंत्री योगी के 'नकल माफिया को मिट्टी में मिला देंगे' वाले बयान पर संयमित लेकिन तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री का सम्मान करते हैं, इसलिए अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते, परंतु उन्होंने यह ज़रूर उठाया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा बार-बार 'धूल में मिला देंगे' या 'खत्म कर देंगे' जैसी भाषा का प्रयोग करना कितना उचित है। पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री कई मंचों पर इस तरह के शब्द इस्तेमाल करते हैं, जो एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है।

सपा ने बताया छात्र आंदोलन की जीत

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने प्रधान के इस्तीफे पर खुलकर खुशी जताई। उन्होंने कहा, 'पार्टी में उत्साह का माहौल है। समाजवादी पार्टी शुरुआत से ही युवाओं और छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती रही है। पिछले करीब 35 दिनों से चल रहे छात्र-युवा आंदोलन के कारण शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना पड़ा।' उन्होंने इसे छात्र आंदोलन और जन आंदोलन की जीत बताया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं में व्यापक असंतोष है।

अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर ने इस्तीफे के बाद सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस्तीफे को महज एक औपचारिकता करार देते हुए कहा, 'यह इस्तीफा केवल एक औपचारिकता है।' मौर्य के इस बयान से स्पष्ट है कि विपक्ष केवल इस्तीफे से संतुष्ट नहीं और आगे की जवाबदेही की माँग कर रहा है।

गायिका नेहा सिंह राठौर का सरकार पर निशाना

भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी और देश की युवा पीढ़ी, खासकर 'जेन-ज़ी' को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से साबित होता है कि सरकार से सवाल किए जा सकते हैं और कोई भी सरकार अजेय नहीं होती। राठौर ने सरकार से अपील की कि जब भी जनता के मन में कोई सवाल या शंका हो, तो सामने आकर उसका समाधान किया जाए। मुख्यमंत्री योगी के बयान पर उन्होंने भी सवाल उठाया कि यदि मंच से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की बात की जाती है तो उसे ज़मीन पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी के आरोपों का हवाला देते हुए पूछा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी छात्र आंदोलन ने किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे तक की स्थिति पैदा की हो। विपक्षी दलों का एकजुट होकर इसे 'जन आंदोलन की जीत' बताना आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव और बढ़ाने का संकेत देता है। नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और परीक्षा सुधारों की दिशा पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव लाएगा या महज एक प्रतीकात्मक कदम बनकर रह जाएगा। स्वामी प्रसाद मौर्य का 'औपचारिकता' वाला बयान इसी आशंका को रेखांकित करता है। CM योगी के बयानों पर उठे सवाल एक व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं — जहाँ संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं की भाषा और जवाबदेही पर बहस तेज होती जा रही है। नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और परीक्षा सुधारों की दिशा ही तय करेगी कि यह आंदोलन सच में जीता या सिर्फ एक चेहरा बदला।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों के अनुसार, करीब 35 दिनों से चले आ रहे छात्र-युवा आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा। इस्तीफे के सटीक कारणों पर सरकार की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण अलग हो सकता है।
सपा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने इसे छात्र आंदोलन और जन आंदोलन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि सपा शुरू से ही इस आंदोलन का समर्थन करती रही है।
CM योगी आदित्यनाथ के किस बयान पर विवाद हुआ?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'नकल माफिया को मिट्टी में मिला देंगे' बयान पर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने सवाल उठाया। उनका तर्क था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा का बार-बार प्रयोग नहीं करना चाहिए।
क्या विपक्ष केवल इस्तीफे से संतुष्ट है?
नहीं। राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस्तीफे को 'महज एक औपचारिकता' बताया। आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर ने सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है।
नेहा सिंह राठौर ने इस मामले पर क्या कहा?
भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने युवा पीढ़ी को बधाई देते हुए कहा कि इस घटनाक्रम से साबित होता है कि सरकार से सवाल किए जा सकते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि जनता की शंकाओं का समाधान सामने आकर किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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