धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष एकजुट: 'छात्रों और लोकतंत्र की जीत'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को विपक्षी दलों के नेताओं ने एक स्वर में इसे छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत करार दिया। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि देशभर में चले लंबे छात्र आंदोलन और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दबाव में केंद्र सरकार को यह निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा।
पप्पू यादव: 'सरकार को झुकना पड़ा'
पटना से लोकसभा सांसद पप्पू यादव ने कहा, 'यह सिर्फ किसी व्यक्ति के इस्तीफे का मामला नहीं है — यह लोकतंत्र, सच्चाई और छात्रों-युवाओं के संघर्ष की जीत है।' उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता अहंकार में डूबी हुई थी और सरकार को यह भ्रम हो गया था कि वह जनता से ऊपर है।
यादव ने कहा कि किसानों के आंदोलन के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया, लेकिन छात्रों और युवाओं के लगातार संघर्ष ने उसे अंततः झुकने पर विवश कर दिया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि एसएससी, बीपीएससी, यूपीएससी, नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का संचालन एक स्वतंत्र एवं स्वायत्त संस्था के हाथों में होना चाहिए, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा राजनीतिक दलों से असंबद्ध शिक्षा विशेषज्ञ शामिल हों।
यादव ने आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ प्रति परिवार मुआवज़ा देने, गिरफ्तार छात्रों और छात्र नेताओं की बिना शर्त रिहाई तथा उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के छात्रों को डिजिटल एवं ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि उन पर आर्थिक बोझ न पड़े।
गौरव गोगोई: 'जेन जी ने लोकतंत्र की ताकत दिखाई'
असम के नागांव से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह उन साहसी छात्रों की जीत है जिन्होंने दिल्ली ही नहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में अन्याय के खिलाफ आंदोलन किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन को निरंतर समर्थन दिया।
गोगोई ने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए आँसू गैस और बल प्रयोग का सहारा लिया गया, लेकिन इसके बावजूद 'जेन जी' पीढ़ी ने लोकतंत्र की ताकत का परिचय दिया। उन्होंने माँग की कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों द्वारा कथित बल प्रयोग के लिए केंद्र सरकार सार्वजनिक रूप से माफी माँगे। उनके अनुसार, यह संविधान, डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी के आदर्शों में विश्वास की जीत है।
सुलता देव: 'प्रधान को पहले ही इस्तीफा देना चाहिए था'
बीजू जनता दल (BJD) की सांसद सुलता देव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को बहुत पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने इसे 'जेन जी की जीत' करार देते हुए कहा कि आज के युवा अपनी शिक्षा और भविष्य को लेकर बेहद जागरूक हैं।
देव ने कहा कि किसी भी देश की सबसे मजबूत रीढ़ उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है और यदि यह कमजोर पड़ती है, तो देश का भविष्य भी प्रभावित होता है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान दिल्ली में मेट्रो सेवाएँ, इंटरनेट और अन्य सुविधाएँ प्रभावित हुईं तथा प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। उन्होंने पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी छात्रों की माँगों का समर्थन किया था।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा घोटालों को लेकर देशभर में आक्रोश चरम पर है और सर्वोच्च न्यायालय में भी संबंधित मामले विचाराधीन हैं। गौरतलब है कि विपक्ष की माँगें — स्वायत्त परीक्षा संस्था, मुआवज़ा, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई — अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। केंद्र सरकार की ओर से अब तक इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और सरकार की आगामी नीतिगत दिशा पर सबकी निगाहें टिकी हैं।