25 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन की जीत: सांसद चंद्रशेखर ने बताई अधूरी मांगें

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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन की जीत: सांसद चंद्रशेखर ने बताई अधूरी मांगें

सारांश

आंदोलन के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सांसद चंद्रशेखर ने छात्रों की जीत बताया — लेकिन मुकदमे, मुआवज़ा और पुलिस जवाबदेही जैसे सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। उनका साफ संदेश: मंत्री बदलने से नहीं, नीति बदलने से मिलेगा छात्रों को न्याय।

मुख्य बातें

सांसद चंद्रशेखर ने 25 जुलाई को लखनऊ में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र संघर्ष की जीत बताया।
आंदोलन के पहले ही दिन सरकार ने प्रमुख माँग मानी; जेल भरो आंदोलन की तैयारी पहले से पूरी थी।
छात्रों पर दर्ज मुकदमे, आत्महत्या पीड़ित परिजनों को मुआवज़ा और बिना वर्दी के मारपीट करने वालों पर कार्रवाई — इन पर अभी कोई स्पष्टता नहीं।
1 लाख आवेदकों के लिए केवल 100 नौकरियाँ ; सांसद ने शेष छात्रों का आवेदन शुल्क वापस करने की माँग की।
जौहर यूनिवर्सिटी मामले में 3,000 से अधिक छात्रों के भविष्य पर खतरे का आरोप; चंद्रशेखर ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
सांसद ने राष्ट्रीय और राज्य परीक्षा कैलेंडर बनाने और परीक्षा केंद्र छात्रों के निकट रखने की माँग की।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सांसद चंद्रशेखर ने 25 जुलाई को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में छात्रों के अडिग संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के पहले ही दिन सरकार ने उनकी प्रमुख माँग मान ली, लेकिन कई अहम सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

सांसद चंद्रशेखर ने बताया कि 23 जुलाई को ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि यदि माँगों पर विचार नहीं हुआ तो हर जनपद में ज्ञापन सौंपे जाएंगे और सहारनपुर से लेकर लखनऊ तक घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी सरकार न मानती तो जेल भरो आंदोलन शुरू होता, जिसकी तैयारी पूरी हो चुकी थी।

अनुत्तरित माँगें और अधूरा न्याय

सांसद ने स्वीकार किया कि कई माँगों पर अभी स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए, उनके बारे में क्या निर्णय लिया गया — इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं। जिन छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया, उनके परिजनों को मुआवज़ा देने पर क्या कार्रवाई हुई — यह भी अस्पष्ट है। इसके अलावा, बिना वर्दी के प्रदर्शनकारियों को मारने-पीटने और महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार करने वालों के विरुद्ध पुलिस क्या कदम उठाएगी — इस पर भी उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है।

परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग

चंद्रशेखर ने परीक्षा व्यवस्था की खामियों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्र छात्रों के निकट होने चाहिए ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब 1 लाख छात्र फॉर्म भरते हैं और केवल 100 नौकरियाँ उपलब्ध हैं, तो शेष छात्रों से आवेदन शुल्क क्यों लिया जाए — और उनका पैसा वापस किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षा कैलेंडर बनाने की माँग भी रखी ताकि छात्र समय पर तैयारी कर सकें।

जौहर यूनिवर्सिटी और राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप

जब उनसे जौहर यूनिवर्सिटी के मामले पर पूछा गया तो उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 3,000 से अधिक छात्रों का भविष्य बर्बाद करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था, तब वह क्षेत्र रामपुर डेवलपमेंट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। उनके अनुसार यह सब राजनीतिक प्रतिशोध के तहत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में छात्रों के भविष्य की किसी भी लड़ाई में वे सदैव साथ खड़े रहेंगे।

हिंसा की निंदा और संसद की अपील

सांसद ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई मारपीट की कड़ी निंदा की और कहा कि यह सरकार छात्र-विरोधी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे हिंसा के समर्थक नहीं हैं और एक संविधानवादी व्यक्ति के रूप में शांतिपूर्ण आंदोलन में विश्वास रखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सोमवार को संसद सुचारू रूप से चले और नए शिक्षा मंत्री नीतियों पर ठोस काम करें, क्योंकि केवल मंत्री बदलने से छात्रों को लाभ नहीं मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चंद्रशेखर खुद स्वीकार करते हैं कि मुकदमे, मुआवज़ा और पुलिस जवाबदेही — तीनों मोर्चों पर सरकार ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। यह उस बड़े पैटर्न की याद दिलाता है जहाँ मंत्री की बलि देकर नीतिगत सुधार की माँग को ठंडा किया जाता है। असली सवाल यह है कि क्या नए शिक्षा मंत्री परीक्षा कैलेंडर, शुल्क वापसी और भर्ती पारदर्शिता जैसे ढाँचागत बदलाव करेंगे — या यह इस्तीफा महज़ दबाव-प्रबंधन की रणनीति बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सांसद चंद्रशेखर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?
सांसद चंद्रशेखर ने इस्तीफे को छात्रों के अडिग संघर्ष की जीत बताया और कहा कि आंदोलन के पहले ही दिन सरकार ने उनकी माँग मान ली। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमों, मुआवज़े और पुलिस कार्रवाई पर उन्हें अभी कोई जानकारी नहीं है।
छात्र आंदोलन की प्रमुख माँगें क्या थीं?
आंदोलन की माँगों में छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेना, आत्महत्या पीड़ित छात्रों के परिजनों को मुआवज़ा, बिना वर्दी के मारपीट करने वालों पर कार्रवाई, परीक्षा केंद्र नज़दीक करना और 1 लाख आवेदकों में से बाकी 99,900 छात्रों का शुल्क वापस करना शामिल था।
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद क्या है?
चंद्रशेखर के अनुसार सरकार जौहर यूनिवर्सिटी के 3,000 से अधिक छात्रों का भविष्य खतरे में डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध के तहत हो रहा है क्योंकि जब विश्वविद्यालय बना था, तब वह क्षेत्र रामपुर डेवलपमेंट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सांसद ने क्या सुझाव दिए?
सांसद ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर परीक्षा कैलेंडर बनाने, परीक्षा केंद्र छात्रों के नज़दीक रखने और जब नौकरियाँ सीमित हों तो अतिरिक्त आवेदकों का शुल्क वापस करने की माँग की।
क्या आंदोलन आगे भी जारी रहेगा?
चंद्रशेखर ने कहा कि माँगों पर विचार हुआ है इसलिए वे चाहते हैं कि सोमवार को संसद सुचारू चले। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नीतियों पर ठोस काम नहीं होगा, केवल मंत्री बदलने से छात्रों को लाभ नहीं मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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