प्रतीक यादव के निधन पर UP में शोक, सपा-भाजपा-कांग्रेस ने एक स्वर में जताई संवेदना
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ में 14 मई को समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव के असामयिक निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहरे शोक की लहर दौड़ गई। भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें सभी दलों के नेता, समर्थक और शुभचिंतक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सपा नेताओं की भावुक प्रतिक्रिया
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, 'दुख की इस घड़ी में मेरे पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं हैं। मैं सर्वशक्तिमान से प्रार्थना करता हूं कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।' सपा नेता अनीस मंसूरी ने कहा कि यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे राज्य की पीड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस घटना से अत्यंत व्यथित हैं।
मंसूरी ने कहा, 'यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु है, कोई सामान्य मृत्यु नहीं।' सपा सांसद आर.के. चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि प्रतीक यादव राजनीति में नहीं आना चाहते थे, फिर भी उन्होंने अखिलेश यादव और परिवार के साथ हमेशा अच्छे संबंध बनाए रखे। उन्होंने कहा, 'वह बहुत ही नेक दिल इंसान थे और एक लंबा जीवन जीना चाहते थे।'
भाजपा नेताओं ने भी जताया दुख
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भाजपा की ओर से संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'प्रतीक यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। वे युवाओं के लिए एक आदर्श थे, और उनका अचानक चले जाना अत्यंत दुख और संकट का क्षण है।' भाजपा नेता नीरज सिंह ने भी शोक व्यक्त करते हुए प्रतीक यादव की दो छोटी बेटियों और परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।
कांग्रेस ने उठाए जांच के सवाल
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने प्रतीक यादव को व्यक्तिगत रूप से याद करते हुए कहा कि वे उनकी शादी में भी शामिल हुए थे और उन्हें भाई की तरह मानते थे। पुनिया ने कहा, 'वे पूरे राज्य में एक बहुत जानी-मानी हस्ती थे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि निधन के हालात को लेकर कोई संदेह है, तो उचित जांच की जानी चाहिए — जो इस मामले को महज शोक की खबर से आगे ले जाता है।
राजनीतिक एकता का दुर्लभ दृश्य
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और भाजपा के बीच तीखी प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, प्रतीक यादव के निधन ने दलगत सीमाओं से परे एकजुटता का दुर्लभ दृश्य उपस्थित किया। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक ध्रुवीकरण अपने चरम पर है। प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव के परिवार की दूसरी पीढ़ी के सदस्य थे, जो सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखते थे।
आगे की राह
कांग्रेस सांसद पुनिया की जांच की मांग के बाद यह देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में कोई कदम उठाता है या नहीं। परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि इस निधन का यादव परिवार की आंतरिक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।