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आरबीआई की सख्ती से भारतीय रुपया 12 वर्षों में सबसे बड़ी एक दिवसीय वृद्धि दर्शाता है

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आरबीआई की सख्ती से भारतीय रुपया 12 वर्षों में सबसे बड़ी एक दिवसीय वृद्धि दर्शाता है

सारांश

भारतीय रुपया गुरुवार को 12 साल में सबसे बड़ी वृद्धि के साथ मजबूत हुआ। यह बढ़त आरबीआई द्वारा सट्टेबाजी पर सख्त कदम उठाने के कारण हुई। जानें इसके प्रभाव और वैश्विक बाजारों पर इसका असर।

मुख्य बातें

आरबीआई की सख्ती से भारतीय रुपया मजबूत हुआ है।
रुपये में 1.7% की वृद्धि दर्ज की गई।
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं।
घरेलू शेयर बाजार में गिरावट आई है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है।

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रुपया गुरुवार को 12 वर्षों में सबसे बड़ी एकदिवसीय वृद्धि के साथ मजबूती दर्शाता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि बैंकों की स्थानीय मुद्रा की स्थिति पर सख्त नियमों के कुछ दिनों बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऑफशोर डेरिवेटिव मार्केट पर प्रतिबंधों का विस्तार करते हुए करेंसी में सट्टेबाजी पर अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया।

तीन दिन की छुट्टी के बाद जब व्यापार फिर से शुरू हुआ, तब रुपया डॉलर के मुकाबले 1.7 प्रतिशत बढ़कर 93.25 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद की सबसे बड़ी वृद्धि है।

यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब एशियाई देशों की अधिकांश मुद्राएं कमजोर बनी हुई थीं। इस दौरान, डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के संकेत दिए, जिससे वैश्विक बाजारों पर दबाव बना।

कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी जोरदार वृद्धि देखी गई। ब्रेंट क्रूड 5.24 प्रतिशत बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.5 प्रतिशत बढ़कर 104.64 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट का सामना करना पड़ा। निक्केई, हैंग सेंग और कोस्पी में 3 प्रतिशत तक की कमी आई।

घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत भी कमजोर रही, जहां सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में 2 प्रतिशत तक गिर गए।

मुद्रा बाजार सोमवार से बंद थे। 31 मार्च को महावीर जयंती और 1 अप्रैल को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के कारण मुद्रा बाजार बंद रहे, और 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के कारण भी बाजार बंद रहेंगे।

आरबीआई ने बैंकों को रुपए से जुड़े नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) कॉन्ट्रैक्ट्स की पेशकश करने से रोक दिया है। इसके अलावा, कंपनियों को कैंसिल किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं दी गई है।

इससे पहले, आरबीआई ने बैंकों की नेट ओपन रुपए पोजिशन पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा तय की थी। बैंकों को विदेशी मुद्रा (एफएक्स) डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने से भी मना किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो सट्टेबाजी को रोकने और जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करके रुपए को स्थिर बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय रुपया क्यों मजबूत हुआ?
भारतीय रुपया आरबीआई द्वारा सट्टेबाजी पर सख्ती के कारण मजबूत हुआ।
सट्टेबाजी पर आरबीआई के कदम क्या हैं?
आरबीआई ने ऑफशोर डेरिवेटिव मार्केट पर प्रतिबंधों का विस्तार किया है और बैंकों को विशेष नियमों का पालन करने के लिए कहा है।
कमोडिटी बाजार में क्या हुआ?
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
क्या शेयर बाजार पर भी असर पड़ा?
हां, घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कितना है?
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
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