प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव ने नमो भारत कॉरिडोर का दौरा किया, सुविधाओं की सराहना
सारांश
Key Takeaways
- नमो भारत कॉरिडोर का दौरा किया गया।
- आधुनिक परिवहन सुविधाओं की सराहना।
- यात्रा समय में कमी और प्रदूषण में कमी का प्रयास।
- सतत विकास के लिए तकनीकी पहल।
- भविष्य में अन्य शहरों के लिए मॉडल बन सकता है।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देश के पहले नमो भारत कॉरिडोर का निरीक्षण प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. पीके मिश्र ने किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इसके साथ ही आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकिथाला सहित कई अधिकारी भी दौरे में शामिल हुए।
दौरे की शुरुआत सराय काले खां नमो भारत स्टेशन से हुई, जहां एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह कॉरिडोर लगभग 82 किलोमीटर लंबा है, जो दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधाओं से जोड़ता है।
प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया गया कि नमो भारत परियोजना न केवल यात्रा समय को कम कर रही है, बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण जैसी समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यह कॉरिडोर क्षेत्र में संतुलित और बहु-केंद्रित शहरी विकास को भी प्रोत्साहित कर रहा है। सराय काले खां स्टेशन को एक आधुनिक मल्टी-मोडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां से दिल्ली मेट्रो, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी, बस सेवाओं और रिंग रोड के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
डॉ. मिश्र ने इस ‘नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्स’ मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि इससे यात्रियों को विभिन्न परिवहन साधनों तक सहज पहुंच प्राप्त होगी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। दौरे के दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने नमो भारत ट्रेन में सराय काले खां से दुहाई डिपो तक यात्रा की और यात्री सुविधाओं का अनुभव किया। ट्रेनों में आरामदायक सीटिंग, समावेशी सुविधाएं और मेडिकल इमरजेंसी के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था जैसी पहल की विशेष सराहना की गई।
डॉ. मिश्र ने सतत विकास के लिए एनसीआरटीसी के प्रयासों की प्रशंसा की और कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए। दुहाई डिपो में उन्होंने अत्याधुनिक ‘अपरिमित’ इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया, जहां वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी, सिमुलेटर और बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। यह केंद्र भविष्य की स्मार्ट परिवहन तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडल ने डिपो वर्कशॉप और निरीक्षण इकाइयों का दौरा किया, जहां ट्रेनों की नियमित जांच और रखरखाव किया जाता है। इस अवसर पर ‘नमो भारत: इंडियाज़ न्यू-एज मोबिलिटी’ नामक डॉक्युमेंटेशन पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 22 फरवरी को इस पूरे कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित किया था, जो भारत के शहरी परिवहन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। यह परियोजना भविष्य में देश के अन्य शहरों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।