इसरो ने गगनयान मिशन के लिए सफलतापूर्वक किया एयर ड्रॉप टेस्ट: आईएडीटी-02 की सफलता
सारांश
Key Takeaways
- गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है।
- आईएडीटी-02 ने क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की।
- भारतीय वायुसेना और नौसेना का सक्रिय सहयोग रहा।
- यह परीक्षण 2027 में प्रस्तावित गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण है।
- पैराशूट सिस्टम की विश्वसनीयता साबित हुई है।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। शुक्रवार को, इसरो ने आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-02) सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस परीक्षण में लगभग 5.7 टन वजनी एक नकली क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा लगभग 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ाया गया। इसके बाद, इसे श्रीहरिकोटा के तट के पास समुद्र में निर्धारित ड्रॉप जोन पर गिराया गया। यह नकली मॉड्यूल, गगनयान मिशन (जी1) के क्रू मॉड्यूल के वजन के समान है।
मॉड्यूल के लैंडिंग के दौरान, चार विभिन्न प्रकार के कुल दस पैराशूट को एक सटीक क्रम में खोला गया। इससे मॉड्यूल की गति धीरे-धीरे घट गई और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित हुई। परीक्षण के बाद, भारतीय नौसेना की सहायता से इस नकली क्रू मॉड्यूल को समुद्र से सफलतापूर्वक निकाला गया। यह टेस्ट मुख्यतः क्रू मॉड्यूल में लगे पैराशूट आधारित गति कम करने वाले सिस्टम की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करने के लिए किया गया था।
आईएडीटी-02 ने इस सिस्टम की विश्वसनीयता को साबित किया है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक है। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसमें तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा। इस मिशन की तैयारी में आईएडीटी-02 की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। गगनयान मिशन का प्रक्षेपण 2027 में होने की संभावना है।
इस परीक्षण में भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का सक्रिय योगदान रहा। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सफलता पर इसरो को बधाई दी। उनका कहना था कि यह परीक्षण अगले वर्ष प्रस्तावित गगनयान मिशन की तैयारी को और मजबूत बनाता है।
पहला इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट अगस्त 2025 में किया जा चुका है। ये परीक्षण गगनयान के क्रू मॉड्यूल की री-एंट्री और समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग की प्रक्रिया का मूल्यांकन करते हैं। इसरो के अनुसार, ऐसे टेस्ट अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। गगनयान मिशन में पैराशूट सिस्टम क्रू मॉड्यूल को पृथ्वी पर वापस लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।