26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईआईटी गांधीनगर के रिसर्च स्कॉलर हर्षिल दवे ने बनाई नई हाइड्रोजेल तकनीक, कोलन कैंसर सर्जरी को बनाएगा सरल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईआईटी गांधीनगर के रिसर्च स्कॉलर हर्षिल दवे ने बनाई नई हाइड्रोजेल तकनीक, कोलन कैंसर सर्जरी को बनाएगा सरल

सारांश

गांधीनगर के युवा वैज्ञानिक हर्षिल दवे ने एक नई हाइड्रोजेल तकनीक विकसित की है, जो कोलन ट्यूमर की सर्जरी को सुरक्षित और आसान बनाएगी। यह तकनीक कैंसर में बदलने वाले ट्यूमर की सर्जरी में मददगार साबित होगी।

मुख्य बातें

हर्षिल दवे ने एक नई हाइड्रोजेल तकनीक विकसित की है।
यह तकनीक कोलन ट्यूमर की सर्जरी को सरल बनाती है।
इसमें एक विशेष शियर-थिनिंग प्रॉपर्टी है।
यह तकनीक कोलोरेक्टल पॉलिप्स की सर्जरी में मदद करती है।
इसका प्री-क्लिनिकल ट्रायल सफल रहा है।

गांधीनगर, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मेहसाणा के एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक हर्षिल दवे ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आईआईटी गांधीनगर में अनुसंधान छात्र हर्षिल ने एक नई हाइड्रोजेल-बेस्ड तकनीक विकसित की है, जो कोलन ट्यूमर की सर्जरी को अधिक सुरक्षित और सरल बनाने में सहायक हो सकती है। यह तकनीक कोलोरेक्टल पॉलिप्स यानी कैंसर में परिवर्तित होने की संभावना वाले ट्यूमर की सर्जरी में सहायता प्रदान करती है।

रिसर्च छात्र हर्षिल ने बताया कि हमारे द्वारा विकसित इस हाइड्रोजेल की एक विशेष शियर-थिनिंग प्रॉपर्टी है, जिसका अर्थ है कि जब इस पर दबाव या बल लगाया जाता है, तो यह लिक्विड में परिवर्तित हो जाता है और दबाव हटने पर फिर से ठोस (जेल) रूप में लौट आता है। इस विशेषता के कारण डॉक्टर इसे आसानी से एक लंबे कैथेटर या एंडोस्कोप से इंजेक्ट कर सकते हैं। इंजेक्शन के बाद यह पदार्थ ट्यूमर के नीचे एक कुशन तैयार करता है, जिससे डॉक्टर को उस ऊतक को आसानी से उठाने में मदद मिलती है और उसे अधिक सटीकता से निकालने में सहायता मिलती है।

सामान्यतः एंडोस्कोपिक सर्जरी के दौरान कोलन ट्यूमर के नीचे सलाइन या डेक्सट्रोज डाला जाता है, जिससे ट्यूमर उभरता है, लेकिन यह लिक्विड जल्दी समाप्त हो जाता है। वहीं, इस नई हाइड्रोजेल-बेस्ड तकनीक से ट्यूमर ठोस बन जाता है, जिससे सर्जरी में आसानी होती है।

आईआईटी गांधीनगर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सहायक प्रोफेसर मुकेश डंका ने बताया कि हर्षिल दवे मेरे लैब के पीएचडी छात्र हैं। हर्षिल ने इस खोज की शुरुआत तीन वर्ष पूर्व की थी। हमने पौधों से DGMAS मॉलिक्यूल प्राप्त किया और जब इसे पानी में डाला, तो यह एक नैनो फाइब्रस हाइड्रोजन बना रहा है। जब हम इंजेक्शन का बल लगाते हैं, तो यह लिक्विड बन जाता है और शरीर में इंजेक्ट करने पर ठोस बन जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि हमारे जीआईटी ट्रैक में कैंसर के छोटे-छोटे ट्यूमर हो जाते हैं। हमने सोचा कि एंडोस्कोपी के माध्यम से इसे इंजेक्ट कर सकते हैं और उन ट्यूमर को निकालने में मदद कर सकते हैं। इस मॉलिक्यूल में बहुत सारी दवाइयां लोड की जा सकती हैं। यह तकनीक एंडोस्कोपी के लिए इंजेक्टेबल हाइड्रोजेल तकनीक है।

जानकारी के अनुसार, हर्षिल दवे की इस रिसर्च को एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है, और उन्हें इस शोध के लिए 'विक्रम साराभाई यंग साइंटिस्ट अवार्ड 2026' से भी सम्मानित किया गया है। वर्तमान में, इस तकनीक का प्री-क्लिनिकल परीक्षण और बड़े जानवरों पर सफल परीक्षण किया जा चुका है, और इसे भारतीय पेटेंट भी मिल चुका है। अब इस तकनीक को क्लिनिकल ट्रायल में लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में कोलन कैंसर के उपचार में इसका व्यापक उपयोग किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह कोलन कैंसर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस प्रकार के नवाचारों से देश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और बेहतर होगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह हाइड्रोजेल तकनीक क्या है?
यह एक नई तकनीक है जो कोलन ट्यूमर की सर्जरी को अधिक सुरक्षित और आसान बनाने में मदद करती है।
इस तकनीक के लाभ क्या हैं?
यह तकनीक ट्यूमर को ठोस बना देती है, जिससे सर्जरी में आसानी होती है और डॉक्टर को सटीकता से ट्यूमर निकालने में मदद मिलती है।
क्या इस तकनीक का परीक्षण हो चुका है?
हाँ, इस तकनीक का प्री-क्लिनिकल ट्रायल और बड़े जानवरों पर सफल परीक्षण किया जा चुका है।
हर्षिल दवे को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है?
उन्हें 'विक्रम साराभाई यंग साइंटिस्ट अवार्ड 2026' से सम्मानित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले