कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदी हटाने की याचिका खारिज की, याचिकाकर्ताओं पर लगाया 1 लाख का जुर्माना

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदी हटाने की याचिका खारिज की, याचिकाकर्ताओं पर लगाया 1 लाख का जुर्माना

सारांश

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदी हटाने के विवाद से संबंधित जनहित याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इस निर्णय ने राज्य में छात्रों के बीच असुरक्षा की भावना को उजागर किया है।

Key Takeaways

  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदी हटाने की याचिका को खारिज किया।
  • याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।
  • इस मामले को 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार दिया गया।
  • राज्यपाल ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा।
  • कन्नड़ समर्थक संगठनों ने निर्णय का स्वागत किया।

बेंगलुरु, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक हाईकोर्ट की एक बेंच ने राज्य सरकार और हिंदी बहिष्कार से जुड़े जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही, अदालत ने याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

यह पीआईएल कर्नाटक के शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा के उस विवादास्पद बयान के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा के अंक मूल्यांकन में शामिल नहीं किए जाएंगे, जिसमें हिंदी भी शामिल है।

यह याचिका बेंगलुरु के निवासियों एच.एन. चंदना और एस. वेंकटेश द्वारा दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य सरकार का यह अचानक लिया गया निर्णय कर्नाटक के लाखों छात्रों में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। यह निर्णय संविधान में दिए गए समानता और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करता है।

याचिकाकर्ता चंदना की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि शिक्षा मंत्री का बयान यह दर्शाता है कि हिंदी को हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि असत्य है।

मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका की आलोचना करते हुए कहा कि यह मामला किसी स्पष्ट सरकारी आदेश पर आधारित नहीं है, बल्कि विवादास्पद मुद्दों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश नहीं है जिसमें हिंदी को हटाने का उल्लेख हो। कोर्ट ने इस याचिका को 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार दिया, न कि वास्तविक जनहित याचिका।

शुरुआत में अदालत ने याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया था, लेकिन बाद में दलीलें सुनने के बाद इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दिया।

हालांकि कन्नड़ समर्थक संगठनों ने एसएसएलसी परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए अंकों की बजाय ग्रेड देने के निर्णय का स्वागत किया है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल, जिनमें भाजपा के कुछ नेता भी शामिल हैं, ने इसका विरोध किया है।

इस विवाद के बीच, राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने हस्तक्षेप करते हुए मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने भी हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए सरकार को पत्र लिखा है।

Point of View

जिस पर उन्होंने हिंदी के शिक्षा से हटाने का आरोप लगाया था। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सरकार का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जो छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदी हटाने की याचिका को क्यों खारिज किया?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह किसी स्पष्ट सरकारी आदेश पर आधारित नहीं थी।
याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना क्यों लगाया गया?
याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि अदालत ने इसे 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार दिया।
क्या हिंदी को हटाने का कोई आधिकारिक आदेश है?
नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश नहीं है जिसमें हिंदी को हटाने का उल्लेख किया गया हो।
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