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इंडक्शन कुकटॉप के बढ़ते उपयोग से भारत में बिजली की मांग में 13-27 गीगावाट की वृद्धि संभव

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इंडक्शन कुकटॉप के बढ़ते उपयोग से भारत में बिजली की मांग में 13-27 गीगावाट की वृद्धि संभव

सारांश

मध्य पूर्व में तनाव के कारण एलपीजी की कमी के चलते इंडक्शन कुकटॉप का बढ़ता उपयोग भारत में बिजली की मांग में 13-27 गीगावाट की वृद्धि कर सकता है। जानिए इस स्थिति के पीछे के तथ्य और भविष्य के अनुमान।

मुख्य बातें

इंडक्शन कुकटॉप का उपयोग बढ़ रहा है।
बिजली की मांग में 13-27 गीगावाट की बढ़ोतरी।
भारत अपनी एलपीजी का अधिकांश भाग आयात करता है।
ऊर्जा मंत्रालय की नई योजनाएँ।
गैस की आपूर्ति में कमी का प्रभाव।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के डायरेक्टर जनरल कृष्ण चंद्र पाणिग्रही ने शुक्रवार को बताया कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी की कमी से इंडक्शन कुकटॉप के उपयोग में वृद्धि होने के परिणामस्वरूप देश में बिजली की मांग में 13-27 गीगावाट की वृद्धि हो सकती है।

पाणिग्रही ने स्पष्ट किया कि मांग का यह अनुमान भिन्नता के कारण है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु और सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों का अंतर शामिल है।

रिपोर्टों के अनुसार, पाणिग्रही ने संकेत दिया कि मांग में महत्वपूर्ण बदलाव अभी आना बाकी है।

भारत अपनी कुल एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात करता है, जो वर्तमान में पश्चिम एशियाई संघर्ष के कारण बाधित है। इस स्थिति ने एक बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को इलेक्ट्रिक इंडक्शन कुकटॉप की ओर मोड़ दिया है।

ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह का कहना है कि भारत को अप्रैल से जून के बीच 22 गीगावाट से अधिक क्षमता जोड़ने की उम्मीद है, जिसमें 3.5 गीगावाट तापीय ऊर्जा, 10 गीगावाट सौर ऊर्जा, 2.5 गीगावाट पवन ऊर्जा, 1.9 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण और 750 मेगावाट जलविद्युत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पंप स्टोरेज और हाइब्रिड परियोजनाएं देश की ऊर्जा आपूर्ति में योगदान देंगी।

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति में कमी को ध्यान में रखते हुए, विद्युत मंत्रालय ने 10 गीगावाट क्षमता वाले कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के रखरखाव को तीन महीने के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।

सिंह ने कहा, "इस अवधि के दौरान संयंत्रों का नियमित रखरखाव किया जाता है, लेकिन गैस आधारित आपूर्ति में कमी के कारण हमने इसे स्थगित करने का निर्णय लिया।"

उन्होंने अनुमान लगाया कि इस वर्ष बिजली की अधिकतम मांग 271 गीगावाट तक पहुँच सकती है।

अधिकारी ने बताया कि गैस आधारित संयंत्रों को अपना एलएनजी आयात करने की अनुमति दी गई है और सरकार ने क्षमता विस्तार पर ध्यान केंद्रित करते हुए कोयले की आपूर्ति पर निगरानी रखी है।

वैश्विक एलएनजी निर्यात की मात्रा 7 मार्च को समाप्त सप्ताह में घटकर 8.6 मिलियन टन और उसके बाद के सप्ताह में 7.8 मिलियन टन रह गई, जो फरवरी 2026 में लगभग 9.6 मिलियन टन प्रति सप्ताह थी। यह गिरावट मुख्यतः कतर के शिपमेंट में कमी के कारण हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि ऊर्जा के इस नए विकल्प ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जबकि भारत को ऊर्जा की बढ़ती मांग का सामना करना पड़ रहा है, इसके समाधान में तकनीकी नवाचारों का योगदान महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडक्शन कुकटॉप का उपयोग क्यों बढ़ रहा है?
इंडक्शन कुकटॉप का उपयोग एलपीजी की कमी के कारण बढ़ रहा है, खासकर मध्य पूर्व में तनाव के चलते।
भारत की बिजली मांग में कितनी वृद्धि हो सकती है?
भारत में बिजली की मांग 13-27 गीगावाट तक बढ़ने की उम्मीद है।
भारत अपनी एलपीजी का कैसे आयात करता है?
भारत अपनी एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात करता है।
ऊर्जा मंत्रालय की योजना क्या है?
ऊर्जा मंत्रालय ने 22 गीगावाट से अधिक क्षमता जोड़ने की योजना बनाई है।
गैस की आपूर्ति में कमी का क्या असर है?
गैस की आपूर्ति में कमी के कारण कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के रखरखाव को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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