भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9.063 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 697.121 अरब डॉलर पर पहुँचा
सारांश
Key Takeaways
- विदेशी मुद्रा भंडार 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पर पहुँच गया।
- गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 7.221 अरब डॉलर बढ़ी है।
- फॉरेन करेंसी एसेट्स की वैल्यू 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर हो गई।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल को समाप्त होने वाले सप्ताह में 9.063 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 697.121 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में दी गई।
इससे पूर्व के सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 10.288 अरब डॉलर की कमी आई थी, जिसका कारण एफसीए (फॉरेन करेंसी एसेट्स) की वैल्यू में गिरावट था।
आरबीआई के मुताबिक, 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के महत्वपूर्ण घटक, गोल्ड रिजर्व, की वैल्यू 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर हो गई है।
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) है, जिसकी वैल्यू 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर हो गई है। एफसीए में डॉलर के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्राएं जैसे येन, यूरो, और पाउंड शामिल हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में दर्शाई जाती है।
आरबीआई के डेटा के अनुसार, 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में एसडीआर (स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स) की वैल्यू 5.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर हो गई है। जबकि भारत की आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) में रिजर्व स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, यह 4.816 अरब डॉलर पर स्थिर रही है।
किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, यह उस देश की आर्थिक स्थिति का संकेत देता है। इसके अलावा, यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव होता है, तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रख सकता है।
बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह दर्शाता है कि देश में डॉलर की आवक बनी हुई है, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। इसके अलावा, यह विदेशों में व्यापार को भी आसान बनाता है।