11 अगस्त 2026
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ओडिशा के लिए एकीकृत विज्ञान रूपरेखा: डॉ. जितेंद्र सिंह और कृष्ण चंद्र पात्रा की बैठक में रेयर अर्थ, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष पर चर्चा

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ओडिशा के लिए एकीकृत विज्ञान रूपरेखा: डॉ. जितेंद्र सिंह और कृष्ण चंद्र पात्रा की बैठक में रेयर अर्थ, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष पर चर्चा

सारांश

ओडिशा के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी की एक व्यापक एकीकृत रूपरेखा आकार ले रही है — रेयर अर्थ, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और जीवन विज्ञान को एक ही ढाँचे में जोड़ने का प्रयास। डॉ. जितेंद्र सिंह और कृष्ण चंद्र पात्रा की बैठक में ILS भुवनेश्वर के विस्तार को अंतिम रूप मिला और OMBRIC के अगले चरण की रूपरेखा तय हुई।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह और ओडिशा मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में ओडिशा की एकीकृत विज्ञान-प्रौद्योगिकी रूपरेखा पर बैठक की।
इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (ILS), भुवनेश्वर के विस्तार को अंतिम रूप दिया गया; ओडिशा सरकार अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी।
OMBRIC पहले ही IIT भुवनेश्वर, NIT राउरकेला, IISER बरहमपुर सहित 6 प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी स्थापित कर चुका है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में ओडिशा सहित चार राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की गई है।
ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) और PPP मोड में अंतरिक्ष अनुसंधान-विनिर्माण केंद्र विकसित करने की संभावनाएँ तलाशी गईं।
प्रस्तावित साइंस सिटी और स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर अभियान में ओडिशा की भागीदारी पर भी सहमति बनी।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में ओडिशा के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें ओडिशा के लिए एक व्यापक एकीकृत विज्ञान और प्रौद्योगिकी रूपरेखा पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह रूपरेखा भारत सरकार के रेयर अर्थ कॉरिडोर प्रस्ताव, राज्य के समुद्री एवं तटीय संसाधनों, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष क्षमताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के नेटवर्क को एकीकृत करने का प्रयास करती है।

बैठक में क्या-क्या हुई चर्चा

मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने बैठक में राज्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्राथमिकताओं से जुड़े प्रस्तावों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में समुद्री जैव प्रौद्योगिकी का विस्तार, जीवन विज्ञान के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना, ओडिशा के तटीय एवं खनिज संसाधनों का अधिकतम उपयोग, अंतरिक्ष अनुप्रयोग और विनिर्माण, पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों की खोज तथा तटीय जिलों की राष्ट्रीय समुद्री-पर्यावरण पहलों में भागीदारी शामिल रही।

बैठक में जैव प्रौद्योगिकी विभाग से संबद्ध इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (ILS), भुवनेश्वर के विस्तार को अंतिम रूप दिया गया। इस विस्तार के तहत ओडिशा सरकार द्वारा अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

OMBRIC: संस्थागत सहयोग का नया मंच

बैठक में ओडिशा समुद्री जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार गलियारे (OMBRIC) पर विशेष चर्चा हुई, जिसे राज्य के अग्रणी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को जोड़ने वाले सहयोगी मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। OMBRIC पहले ही IIT भुवनेश्वर, बरहमपुर विश्वविद्यालय, फकीर मोहन विश्वविद्यालय, NIT राउरकेला, IISER बरहमपुर और ILS भुवनेश्वर के साथ साझेदारी स्थापित कर चुका है।

अगले चरण में इस संस्थागत नेटवर्क को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, CSIR और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ और निकटता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ओडिशा के समुद्री संसाधनों को उन्नत अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों और औद्योगिक नवाचार से सीधे जोड़ा जा सके।

रेयर अर्थ कॉरिडोर और अंतरिक्ष अवसर

केंद्रीय बजट 2026-27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की गई है, जिसमें खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ओडिशा की रेयर-अर्थ इकोसिस्टम में पहले से ही महत्वपूर्ण उपस्थिति है और राज्य के तटीय खनिज संसाधन इस दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

अंतरिक्ष के मोर्चे पर, बैठक में इसरो के साथ राज्य की अंतरिक्ष क्षमताओं को घनिष्ठ रूप से जोड़ने की संभावनाएँ तलाशी गईं, जिसमें PPP मोड में अंतरिक्ष अनुसंधान और विनिर्माण केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव भी शामिल है।

डीप ओशन मिशन और साइंस सिटी

बैठक में डीप ओशन मिशन के तहत ओडिशा की भूमिका और ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) पर भी विचार-विमर्श हुआ। राज्य की लंबी तटरेखा और समुद्री संसाधन महासागर विज्ञान, मत्स्य पालन और तटीय आर्थिक गतिविधियों को एकीकृत करने के लिए अनुकूल अवसर प्रदान करते हैं।

इसके अतिरिक्त, राज्य में प्रस्तावित साइंस सिटी पर भी चर्चा हुई, जो वैज्ञानिक जागरूकता, नवाचार और युवाओं के विज्ञान से जुड़ाव को बढ़ावा देने का मंच बनेगी। स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर अभियान में ओडिशा के तटीय जिलों की भागीदारी को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी।

आगे की राह

डॉ. जितेंद्र सिंह और कृष्ण चंद्र पात्रा दोनों ने इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। समुद्री संसाधनों, जैव प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक अवसंरचना को एकीकृत करने का यह प्रस्ताव ओडिशा को पूर्वी तटीय क्षेत्र के लिए एक विशिष्ट विज्ञान-आधारित विकास मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और जीवन विज्ञान का केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षी रूपरेखा उभरी। लेकिन सवाल यह है कि इतने विविध क्षेत्रों को एक साथ साधने की कोशिश कहीं विखंडित प्राथमिकताओं में न बदल जाए। ILS विस्तार के लिए 50 एकड़ भूमि की घोषणा ठोस है, पर OMBRIC के अगले चरण और PPP अंतरिक्ष केंद्र के लिए समयसीमा और वित्तपोषण का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। रेयर अर्थ कॉरिडोर में ओडिशा की भागीदारी की वास्तविक परीक्षा खनन-से-प्रसंस्करण की घरेलू मूल्य श्रृंखला बनाने में होगी, न केवल घोषणाओं में।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह और कृष्ण चंद्र पात्रा की बैठक में क्या तय हुआ?
11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में ओडिशा के लिए एकीकृत विज्ञान-प्रौद्योगिकी रूपरेखा पर सहमति बनी, जिसमें ILS भुवनेश्वर के विस्तार के लिए 50 एकड़ भूमि, OMBRIC के अगले चरण और रेयर अर्थ कॉरिडोर में ओडिशा की भूमिका शामिल है।
OMBRIC क्या है और इसमें कौन-से संस्थान शामिल हैं?
OMBRIC यानी ओडिशा समुद्री जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार गलियारा, राज्य के प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को जोड़ने वाला सहयोगी मंच है। इसमें IIT भुवनेश्वर, बरहमपुर विश्वविद्यालय, फकीर मोहन विश्वविद्यालय, NIT राउरकेला, IISER बरहमपुर और ILS भुवनेश्वर पहले से भागीदार हैं।
ओडिशा के रेयर अर्थ कॉरिडोर में क्या भूमिका होगी?
केंद्रीय बजट 2026-27 में ओडिशा सहित चार राज्यों में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की गई है। ओडिशा के तटीय खनिज संसाधन और मौजूदा रेयर-अर्थ प्रसंस्करण सुविधाएँ इसे खनन, प्रसंस्करण और विनिर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य बनाती हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज, भुवनेश्वर का विस्तार कैसे होगा?
ओडिशा सरकार ILS भुवनेश्वर के विस्तार के लिए अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी। विस्तारित संस्था जीवन विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और जैव-E3 ढाँचे (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, रोज़गार) से जुड़ी पहलों के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगी।
ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन क्या है?
ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) राज्य की अपतटीय और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन क्षमता को विकसित करने और समुद्री अर्थव्यवस्था के इर्द-गिर्द सुदृढ़ मूल्य श्रृंखला बनाने की दीर्घकालिक योजना है। इस बैठक में इसे डीप ओशन मिशन के व्यापक एजेंडे से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।
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