ज्योतिनगर जल संकट: टीएमसी सांसद समीरुल इस्लाम ने कलकत्ता हाईकोर्ट में PIL दायर की, 5,000 निवासी प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है, जिसमें उत्तरी कोलकाता के कोसीपोर इलाके की ज्योतिनगर कॉलोनी के करीब 5,000 निवासियों के लिए नगर निगम की पीने के पानी की आपूर्ति को तत्काल बहाल करने की माँग की गई है। यह याचिका 25 सितंबर 2026 को दायर की गई, जबकि सांसद ने इसकी जानकारी 26 सितंबर को सोशल मीडिया पर साझा की।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह संकट तब शुरू हुआ जब कोलकाता नगर निगम (KMC) ने 26 जुलाई से 28 जुलाई 2026 के बीच कॉलोनी में पाइपलाइन-संबंधी मरम्मत कार्य किया। निवासियों का आरोप है कि इस काम के बाद कॉलोनी के भीतर करीब 150 मीटर के दायरे में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई, जबकि आसपास के मोहल्लों में नल सामान्य रूप से चलते रहे। 29 जुलाई 2026 से कॉलोनी के पाँच सार्वजनिक नल पूरी तरह सूखे पड़े हैं।
पानी के अभाव में निवासियों को दूर के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है और कथित तौर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — द्वारा व्यवस्थित किए गए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो अनियमित अंतराल पर आते हैं।
सांसद की दलीलें
समीरुल इस्लाम ने अपने बयान में स्पष्ट किया, 'मैंने कलकत्ता हाईकोर्ट में जो जनहित याचिका दायर की है, वह वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों के लिए नहीं, बल्कि लगभग 5,000 निवासियों के पीने का पानी पाने के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए है। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है और उम्मीद है कि न्याय होगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'दुर्भाग्य से कोलकाता नगर निगम द्वारा ज्योतिनगर कॉलोनी में पानी की सप्लाई बंद कर दिए जाने के बाद लोगों के एक वर्ग से पीने का कीमती पानी छीन लिया गया। यह जगह पश्चिम बंगाल के किसी दूरदराज के गाँव में नहीं, बल्कि 'सिटी ऑफ जॉय' यानी कोलकाता शहर के बीचों-बीच स्थित है।'
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावित निवासी एक विशेष धार्मिक समुदाय से हैं और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पीने के पानी तक पहुँच धार्मिक आधार पर तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'भाजपा के सत्ता में आने के बाद पानी की सप्लाई रोक दी गई।' हालाँकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
बेदखली का संकट भी
ज्योतिनगर कॉलोनी के निवासी केवल जल संकट से ही नहीं जूझ रहे — वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता की भूमि से संभावित बेदखली की अनिश्चितता का भी सामना कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कॉलोनी के निवासी पहले से ही आजीविका और आवास के दबाव में हैं।
गौरतलब है कि यह मामला महज एक स्थानीय बुनियादी सुविधा की शिकायत नहीं है — बल्कि यह उस व्यापक बहस का हिस्सा है जिसमें नगरीय संसाधनों तक समान पहुँच और अल्पसंख्यक बस्तियों में बुनियादी ढाँचे की उपेक्षा के सवाल उठाए जाते रहे हैं।
आम जनता पर असर
करीब 5,000 लोग लगभग दो महीनों से पीने के पानी के लिए वैकल्पिक और अस्थायी स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मी और मानसून के मौसम में पानी की उपलब्धता न होना स्वास्थ्य जोखिम को बढ़ाती है, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
क्या होगा आगे
कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर PIL की अगली सुनवाई की तारीख अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। कोलकाता नगर निगम ने याचिका पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। न्यायालय के हस्तक्षेप से पानी आपूर्ति बहाली के आदेश की संभावना है, जो ज्योतिनगर के निवासियों के लिए राहत का एकमात्र ठोस रास्ता फिलहाल दिख रहा है।