इथियोपिया के टिग्रे में चार साल बाद फिर युद्ध की आग, 7 सशस्त्र गुटों का गठबंधन; यूएन चिंतित
सारांश
मुख्य बातें
इथियोपिया के उत्तरी टिग्रे क्षेत्र में नवंबर 2022 के प्रिटोरिया शांति समझौते के लगभग चार वर्ष बाद एक बार फिर भीषण संघर्ष भड़क उठा है। टिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (टीपीएलएफ) और संघीय सेना के बीच बढ़ती सैन्य टकराहट के बीच सात सशस्त्र संगठनों ने एक नया गठबंधन बनाया है, जिसका घोषित लक्ष्य प्रधानमंत्री अबी अहमद की सरकार को सत्ता से बेदखल करना है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
नए गठबंधन का उदय और सैन्य कार्रवाइयाँ
रिपोर्टों के अनुसार, बीते रविवार को टीपीएलएफ सहित सात सशस्त्र संगठनों ने 'इथियोपियन पीपुल्स' फोर्सेस अलायंस फॉर सर्वाइवल' नाम से एक संयुक्त मोर्चा बनाया। इसमें अमहारा फानो और ओरोमो लिबरेशन आर्मी समेत विभिन्न क्षेत्रों के सशस्त्र गुट शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 2020-22 के युद्ध के दौरान फानो लड़ाके संघीय सरकार के साथ थे — अब वे उसी सरकार के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। यह बदला हुआ सैन्य समीकरण मौजूदा संकट को और जटिल बना रहा है।
इस गठबंधन ने ड्रोन हमले किए, जिसकी यूएन ने भी पुष्टि की। इसके बाद बुधवार को टिग्रे बलों ने क्षेत्र के तीन हवाई अड्डों पर कब्जा कर लिया। सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इथियोपियन एयरलाइंस ने टिग्रे के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दीं। अफार क्षेत्र में याल्लो के आसपास भारी तोपखाने की गोलाबारी की खबरें सामने आईं, जबकि टिग्रे-अफार सीमा के निकट अबाला पर भी कब्जे की सूचना मिली।
संघीय सेना का दावा और स्वतंत्र सत्यापन का अभाव
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इथियोपियाई सेना ने दावा किया कि उसने अमहारा के नॉर्थ वोल्लो इलाके में जवाबी कार्रवाई के दौरान 272 टीपीएलएफ लड़ाकों को मार गिराया और करीब 260 को घायल किया। हालाँकि इन आँकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सेना ने अपने स्वयं के या आम नागरिकों के हताहत होने का कोई आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया।
संचार ब्लैकआउट और मानवीय संकट की आशंका
25 सितंबर, शुक्रवार को टिग्रे क्षेत्र में इंटरनेट और फोन सेवाएँ बाधित होने की खबर सामने आई। निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स ने उत्तरी इथियोपिया में इंटरनेट व्यवधान की पुष्टि की। यह स्थिति 2020-22 के युद्ध की उन भयावह यादें ताज़ा करती है जब टिग्रे लंबे समय तक बाहरी दुनिया से लगभग कट गया था और मानवीय संकट गहरा गया था। गौरतलब है कि उस युद्ध में करीब 6 लाख लोगों की मौत हुई थी। मौजूदा संचार कटौती को उसी इतिहास की पुनरावृत्ति की आशंका के रूप में देखा जा रहा है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयाम
यह संकट केवल इथियोपिया की सीमाओं तक सीमित नहीं है। इरिट्रिया को आशंका है कि समुद्र-विहीन इथियोपिया की लाल सागर तक पहुँच बनाने की कोशिश उसके लिए सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकती है। इरिट्रिया पर टिग्रे विद्रोहियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं, जिसे वह लगातार खारिज करता रहा है। साथ ही, पड़ोस में जारी सूडान के गृहयुद्ध ने क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता
यूएन प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से कहा कि यूएन 'ड्रोन इस्तेमाल और आम नागरिकों को नुकसान पहुँचने की घटनाएँ सुनने में आ रही हैं, जिससे यूएन बहुत चिंतित है।' उन्होंने सभी पक्षों से 'अधिकतम संयम बरतने और बातचीत के ज़रिए अपने मतभेद सुलझाने' की अपील दोहराई।
अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ ने भी सभी पक्षों से सीधा संवाद बहाल करने का आग्रह किया है। यूरोपीय संघ ने तत्काल तनाव कम करने और प्रिटोरिया समझौते के प्रति फिर से प्रतिबद्धता जताने का आह्वान किया है। अगर संचार बाधाएँ बनी रहीं और सैन्य मोर्चे पर स्थिति नहीं सुधरी, तो टिग्रे में मानवीय संकट एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर केंद्र में आ सकता है।