अल्बानिया में छात्र प्रदर्शन हिंसक, तिराना में 51 पुलिसकर्मी घायल; PM इदी रामा ने इस्तीफे से इनकार
सारांश
मुख्य बातें
अल्बानिया की राजधानी तिराना में 15 अक्टूबर 2026 को लगातार तीसरे दिन छात्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें 51 पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री इदी रामा के इस्तीफे और विश्वविद्यालयों में बेहतर सुविधाओं की माँग कर रहे हैं। तिराना के बाहर देश के अन्य शहरों में भी यह विरोध फैल चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
अल्बानिया स्टेट पुलिस के अनुसार, 65 प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मियों, सार्वजनिक संस्थानों और सरकारी संपत्ति पर कथित हमलों के सिलसिले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। पुलिस महानिदेशक स्केंडर हिता ने ट्रॉमा अस्पताल पहुँचकर घायल अधिकारियों का हाल जाना।
पुलिस के बयान के अनुसार, नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर पत्थर, भारी वस्तुएँ और मोलोटोव कॉकटेल (पेट्रोल बम) फेंके और 14 घंटे से अधिक समय तक लगातार हमले किए। वहीं, तिराना के सार्वजनिक अस्पताल ने बताया कि हिंसा में घायल 7 प्रदर्शनकारियों ने चिकित्सा सहायता ली।
मंगलवार और बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों में जबरन प्रवेश किया और कम से कम एक इमारत में आग लगा दी। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
PM रामा की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री इदी रामा ने एक लिखित बयान में इस्तीफे की माँग सिरे से खारिज कर दी। उन्होंने कहा, 'सरकारें लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से बदली जाती हैं। पिछले साल चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं।'
रामा ने कहा कि उनकी सरकार को पिछले वर्ष हुए लोकतांत्रिक चुनावों में स्पष्ट जनादेश मिला था और वे अल्बानिया को यूरोपीय संघ (EU) की सदस्यता दिलाने की ज़िम्मेदारी के साथ चुने गए थे। उन्होंने शिक्षा की बढ़ती लागत पर संवाद की इच्छा जताई, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और हिंसा को छात्रों की जायज़ माँगों से अलग बताया।
रामा ने यह भी संकेत दिया कि देश और विदेश की कुछ ताकतें अल्बानिया को EU सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहतीं, लेकिन वे हिंसा को देश के यूरोपीय भविष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने देंगे।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
यह आंदोलन विश्वविद्यालयों की जर्जर स्थिति और बढ़ती फीस के विरोध में शुरू हुआ था। गौरतलब है कि मौजूदा अशांति से पहले भी अल्बानिया में कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं, जिनका प्रमुख कारण देश के दक्षिणी तट पर एक लग्जरी रिसॉर्ट बनाने की विवादास्पद योजना रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के समर्थन वाली इस परियोजना को लेकर कानूनी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।
पिछले साल चौथी बार प्रधानमंत्री बने रामा के सामने इन प्रदर्शनों को उनके अब तक के कार्यकाल की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
EU और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
तिराना स्थित यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने तनाव कम करने की अपील दोहराई और प्रदर्शन के दौरान बढ़ती हिंसा तथा सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को हुए नुकसान की कड़ी निंदा की। प्रतिनिधिमंडल ने अपने बयान में कहा कि 'लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है' और प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि अल्बानिया और मोंटेनेग्रो बाल्कन क्षेत्र के उन देशों में शामिल हैं जो EU सदस्यता की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। अल्बानिया का लक्ष्य 2028 तक EU की पूर्ण सदस्यता हासिल करना है।
आगे क्या
प्रदर्शन फिलहाल थमने के संकेत नहीं दे रहा — छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। रामा सरकार के सामने दोहरी चुनौती है: एक तरफ बातचीत की मेज पर छात्रों को लाना, दूसरी तरफ EU सदस्यता की वार्ता को पटरी पर बनाए रखना। आने वाले दिनों में सरकार का रुख तय करेगा कि यह संकट और गहराता है या सुलझता है।