इटली में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक, मिलान-ट्यूरिन में पुलिस से झड़पें; मेलोनी बोलीं — हिंसा बर्दाश्त नहीं
सारांश
मुख्य बातें
इटली में महंगाई और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ भड़का जनआक्रोश 18 अक्टूबर 2026 को हिंसक रूप ले चुका है। रोम, मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या समेत कई प्रमुख शहरों में छात्र, शिक्षक और ट्रेड यूनियन सड़कों पर उतर आए, जहाँ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं। प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र की ताकत बताते हुए हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी।
मुख्य घटनाक्रम
मिलान में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके, जिसमें कई अधिकारी घायल हुए। स्थिति इतनी बिगड़ी कि जुलूस को बीच में ही रोकना पड़ा। ट्यूरिन में कुछ लोगों को पत्थर और खिड़कियाँ तोड़ने वाले हथौड़ों के साथ हिरासत में लिया गया।
बोलोन्या में हुई हिंसा और हंगामे के कारण रेलवे स्टेशन को एहतियातन बंद करना पड़ा। रोम सहित अन्य शहरों में स्कूलों पर कब्जे की घटनाएँ भी सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों से फ्रांस और स्पेन में हुए जनांदोलनों की छाप स्पष्ट दिखती है।
मेलोनी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, 'शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले हजारों लोगों के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो सीजीआईएल की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जिसमें वामपंथी नेताओं ने भी हिस्सा लिया। लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी होती है।'
उन्होंने आगे कहा, 'प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन अपने शहरों को हिंसा और आगजनी की भेंट चढ़ाना कोई अधिकार नहीं है।' मेलोनी ने स्वीकार किया कि कुछ असामाजिक तत्व शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाते हैं।
विपक्ष से अपील
मेलोनी ने विपक्षी दलों से भी खुलकर रुख स्पष्ट करने की माँग की। उनके शब्दों में, 'मैं विपक्षी दलों से फिर अपील करती हूँ कि इस मुद्दे पर कोई अस्पष्टता न रखें। इन हिंसक घटनाओं की साफ और खुलकर निंदा करें और हर प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की स्पष्ट अपील करें।'
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई इस पर चुप रहता है या हिचकिचाता है, तो उसे हिंसा के लिए एक तरह का समर्थन माना जा सकता है। यह टिप्पणी इटली के राजनीतिक विमर्श में सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गौरतलब है कि मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार शिक्षा बजट में कटौती और बढ़ती महंगाई पर पहले से आलोचनाओं के घेरे में है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी यूरोप के कई देशों में आर्थिक असंतोष और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के विरुद्ध आंदोलन तेज हो रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ये प्रदर्शन सिर्फ इटली की आंतरिक समस्याओं का प्रतिबिंब नहीं हैं, बल्कि यूरोपीय स्तर पर नागरिक असंतोष की व्यापक लहर का हिस्सा हैं।
क्या होगा आगे
सरकार द्वारा कड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बाद अगले कुछ दिनों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी किए जाने की संभावना है। प्रदर्शनकारी संगठन अपनी माँगें वापस लेने के मूड में नहीं दिखते, जिससे राजनीतिक और सामाजिक तनाव और गहरा हो सकता है।