21 जुलाई 2026
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छात्र अधिकारों पर कांग्रेस का PM आवास के पास प्रदर्शन, खड़गे-राहुल ने संसद में चर्चा की मांग उठाई

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छात्र अधिकारों पर कांग्रेस का PM आवास के पास प्रदर्शन, खड़गे-राहुल ने संसद में चर्चा की मांग उठाई

सारांश

कांग्रेस ने PM आवास के पास प्रदर्शन कर छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बीजद और AAP ने भी सुर मिलाए। विपक्ष की एकजुट मांग है कि संसद में छात्रों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक बहस हो।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के निकट विरोध प्रदर्शन हुआ।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, कई छात्र घायल हुए।
सांसद रंजीत रंजन के अनुसार कुछ छात्रों के हाथ-पैर टूटे और वे अस्पताल में भर्ती हैं।
बीजद और AAP ने भी छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा करते हुए संवाद की मांग की।
विपक्ष ने संसद में व्यापक चर्चा और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की।

नई दिल्ली में 21 जुलाई को सियासी तापमान उस वक्त और बढ़ गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के निकट प्रदर्शन कर छात्रों के साथ एकजुटता जताई। यह प्रदर्शन राजधानी में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और हालिया विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हुआ। पार्टी ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज से जोड़ते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए। पार्टी ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।

सांसद रंजीत रंजन ने दावा किया, "बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए हैं और कई अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ छात्रों के हाथ-पैर तक टूट गए हैं। ऐसी स्थिति सरकार की नीतियों का परिणाम है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, "पार्टी छात्रों पर हुए कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और घायल छात्रों तथा उनके परिवारों के समर्थन में प्रदर्शन कर रही है। छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।"

राज्यसभा सदस्य प्रवीण चक्रवर्ती ने इस पूरे घटनाक्रम को संसद में चर्चा का विषय बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, "देश के युवाओं का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और यदि बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं, तो संसद में इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। लोकतंत्र में संवाद ही समस्याओं का समाधान है।"

बीजू जनता दल (बीजद) के सांसदों ने भी चिंता जताई। सांसद सुलता देव ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है जिसमें प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान महिलाओं और छात्राओं पर बल प्रयोग दिखता है। बीजद सांसद संतृप्त मिश्रा ने कहा कि यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं, तो सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। AAP नेता गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। पार्टी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि सरकार को टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

राज्य सरकारों का रुख

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कहा, "नई पीढ़ी अपनी अपेक्षाओं और भविष्य को लेकर चिंतित है और अपनी बात सामने रखने का प्रयास कर रही है। युवाओं की भावनाओं और चिंताओं को समझना हर सरकार की जिम्मेदारी है।" यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न राजनीतिक दल छात्रों के अधिकारों, लोकतांत्रिक विरोध और शिक्षा से जुड़े सवालों पर अपनी-अपनी राय सामने रख रहे हैं।

संसद में चर्चा की मांग और आगे की राह

गौरतलब है कि विपक्ष लगातार संसद में इस मुद्दे पर बहस की मांग कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि छात्रों की शिकायतों को राजनीतिक प्रतिक्रिया से अलग कर नीतिगत स्तर पर संबोधित किया जाना चाहिए। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद की कार्रवाई ने शिक्षा अधिकार और लोकतांत्रिक असहमति की सीमाओं पर राष्ट्रीय बहस को नई धार दे दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रोज़गार और युवा असंतोष के बीच पनप रहा है। गौरतलब है कि हर बड़े छात्र आंदोलन के बाद राजनीतिक दल सड़कों पर उतरते हैं, लेकिन संसदीय बहस अक्सर नतीजे के बिना समाप्त होती है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष की यह एकजुटता छात्रों की शिकायतों को ठोस नीतिगत बदलाव में बदल पाएगी, या यह महज एक चुनावी संकेत बनकर रह जाएगी। पुलिस कार्रवाई के दावों की स्वतंत्र जांच के बिना, दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला जारी रहेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने PM आवास के पास प्रदर्शन क्यों किया?
कांग्रेस ने 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के निकट प्रदर्शन कर छात्रों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का विरोध किया। पार्टी ने घायल छात्रों के साथ एकजुटता जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
छात्र प्रदर्शन में कितने लोग घायल हुए?
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन के अनुसार बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए और कई अस्पतालों में भर्ती हैं, कुछ के हाथ-पैर टूटने की भी बात कही गई। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
विपक्ष की मुख्य मांगें क्या हैं?
विपक्षी दलों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच, संसद में छात्र अधिकारों और शिक्षा मुद्दों पर व्यापक बहस , और सरकार द्वारा छात्रों से संवाद स्थापित करना।
बीजद और AAP ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
बीजद सांसद सुलता देव ने महिलाओं और छात्राओं पर बल प्रयोग का वीडियो साझा करते हुए संवेदनशील व्यवहार की मांग की। AAP नेता गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबा रही है और टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का क्या संदर्भ है?
जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की केंद्रीय वजह है। विभिन्न दलों ने इसे छात्र अधिकारों और लोकतांत्रिक असहमति के व्यापक सवाल से जोड़ते हुए संसद में चर्चा की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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