छात्र मुद्दों पर कांग्रेस की 'राजनीतिक रोटी': भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी के प्रदर्शन को बताया असंवैधानिक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने 22 जुलाई को नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा कांग्रेस सांसदों के हालिया विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस छात्रों की वास्तविक समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन्हें राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
गिरिराज सिंह का कड़ा बयान
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने संवैधानिक पद पर रहते हुए संविधान की गरिमा को ठेस पहुँचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी कर ऐसी राजनीति कर रही है जिससे देश में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। सिंह ने यह भी कहा कि छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए भुनाया जा रहा है और उन्होंने राहुल गांधी के आचरण को 'खतरनाक' बताते हुए उनके विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की।
तरुण चुघ का विपक्ष पर निशाना
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद तरुण चुघ ने कहा कि देश की जनता इस पूरे मामले को लेकर नाराज़ है और विपक्ष को छात्रों की असली समस्याओं की कोई परवाह नहीं है। चुघ के अनुसार, विपक्षी दल छात्रों के मुद्दों की आड़ में सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए प्रदर्शन को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' करार दिया।
निशिकांत दुबे के सवाल
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी नेता या अधिकारी का पुत्र होना अपराध नहीं है, और परीक्षा नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। दुबे ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ पुलिसकर्मियों के घायल होने और कथित हिंसक घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह ऐसे तत्वों के साथ खड़ी दिखाई दे रही है जो देश को कमज़ोर करने की कोशिश में हैं। दुबे ने आपातकाल के दौर का भी संदर्भ देते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुँचाने का आरोप जड़ा।
एसपी सिंह बघेल की प्रतिक्रिया
केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा, 'नीट पेपरलीक की जाँच हो रही है और दोषियों को जेल भेजा जा रहा है। अयोध्या मामले में भी यही कार्रवाई हो रही है। कल देश के एक बहुत ज़िम्मेदार नेता, यानी विपक्ष के नेता, ने बिना इजाज़त या पूर्व सूचना के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर गैर-ज़िम्मेदाराना हरकत की। यह अनुचित है और कानूनी रूप से इसकी इजाज़त नहीं है।'
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपरलीक विवाद और परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों में व्यापक असंतोष है। गौरतलब है कि विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर जनमत अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस विषय पर राजनीतिक तनाव और तेज़ होने की संभावना है।