30 जुलाई 2026
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खड़गे का सरकार पर हमला: '20 जुलाई को छात्रों से संवाद नहीं, लाठीचार्ज हुआ, गृह मंत्री इस्तीफा दें'

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खड़गे का सरकार पर हमला: '20 जुलाई को छात्रों से संवाद नहीं, लाठीचार्ज हुआ, गृह मंत्री इस्तीफा दें'

सारांश

राज्यसभा में खड़गे ने सरकार को घेरा — 20 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के आरोप, 100 से अधिक घायल। पेपर लीक रोकने के लिए महज सजा बढ़ाना काफी नहीं, NTA में ढाँचागत सुधार जरूरी — विपक्ष का साफ संदेश।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 30 जुलाई को राज्यसभा में केंद्र सरकार पर 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन में बल प्रयोग का आरोप लगाया।
खड़गे के दावे के अनुसार प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक छात्र घायल हुए; कुछ की आँखों में पैलेट लगने से गंभीर नुकसान पहुँचा।
उन्होंने लाठीचार्ज, आंसू गैस, पानी की बौछार और पैलेट गन के आदेश की जिम्मेदारी तय करने की माँग की।
गृह मंत्री से सवालों का जवाब न मिलने पर इस्तीफे की माँग की।
खड़गे ने कहा कि लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 में सजा बढ़ाने पर जोर है, लेकिन NTA में संस्थागत सुधार नदारद हैं।
बिहार, उत्तर प्रदेश और असम में भी छात्रों पर कठोर कार्रवाई के आरोप, केंद्र की चुप्पी पर सवाल।

राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 30 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को हजारों छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान सरकार ने संवाद की जगह बल प्रयोग को तरजीह दी और गृह मंत्री ने संसद व देश के सामने कोई जवाबदेही नहीं दिखाई।

20 जुलाई की घटना: क्या हुआ था

खड़गे के अनुसार, 20 जुलाई को दूर-दराज के राज्यों और ग्रामीण इलाकों से आए छात्र शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे और उनका उद्देश्य सरकार से सीधा संवाद करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन छात्रों को लाठीचार्ज, आंसू गैस, पानी की बौछार और पैलेट गन का सामना करना पड़ा। उनके दावे के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक छात्र घायल हुए, कई को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा और कुछ छात्रों की आँखों में पैलेट लगने से गंभीर नुकसान पहुँचा।

खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड लगाए गए, मेट्रो और रेलवे स्टेशन बंद किए गए तथा इंटरनेट सेवाएँ बाधित की गईं — जिससे न केवल छात्र बल्कि आम नागरिक भी प्रभावित हुए।

गृह मंत्री से जवाबदेही की माँग

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से कई सीधे सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी, और सादे कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले लोग कौन थे। उन्होंने यह भी पूछा कि दिल्ली पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने किसके निर्देश पर कार्रवाई की।

खड़गे ने स्पष्ट कहा कि यदि गृह मंत्री इन सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 20 जुलाई की घटना के तुरंत बाद सरकार को देश के सामने पूरी सच्चाई रखनी चाहिए थी, लेकिन संसद या देश के समक्ष कोई विस्तृत बयान नहीं दिया गया।

पूर्व शिक्षा मंत्री के स्वागत पर सवाल

खड़गे ने पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद संसद परिसर में सत्ता पक्ष द्वारा किए गए स्वागत पर भी कड़ा एतराज जताया। उनका कहना था कि जिस तरह का स्वागत किया गया, उससे ऐसा संदेश गया मानो किसी बड़ी उपलब्धि का उत्सव मनाया जा रहा हो। उन्होंने कहा कि जब किसी मंत्री के कार्यकाल में इतनी गंभीर घटनाएँ हुई हों तो स्वाभाविक रूप से आत्ममंथन और खेद व्यक्त किया जाना चाहिए था।

NTA सुधार और संशोधन विधेयक पर आपत्ति

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केवल एक मंत्री के इस्तीफे से पूरी परीक्षा व्यवस्था नहीं बदल जाएगी। उनके अनुसार, यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और परीक्षा संचालन में व्यापक संस्थागत सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में पेपर लीक की घटनाएँ दोहराई जाती रहेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संशोधन विधेयक में सजा और जुर्माना बढ़ाने पर तो जोर दिया, लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए जरूरी प्रशासनिक और संस्थागत सुधारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से आवाज़ उठा रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और असम सहित कई राज्यों में भी छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई के आरोप लगे हैं, जिन पर खड़गे के अनुसार केंद्र सरकार मौन रही।

आगे क्या

खड़गे ने माँग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना ही समाप्त हो जाए — केवल दोषियों पर कार्रवाई तक सीमित न रहे। लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर संसदीय बहस जारी है और विपक्ष का दबाव सरकार पर जवाबदेही तय करने का बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रहता, यह लोकतांत्रिक जवाबदेही का संकट बन जाता है। लोक परीक्षा विधेयक में सजा बढ़ाना एक लक्षण का इलाज है, बीमारी का नहीं — NTA की संरचनात्मक खामियाँ और परीक्षा तंत्र की अपारदर्शिता जब तक दूर नहीं होती, पेपर लीक का चक्र नहीं टूटेगा। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि यह बहस केवल एक विधेयक की नहीं, बल्कि उस पूरे भरोसे की है जो लाखों छात्र सरकारी परीक्षा प्रणाली पर रखते हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन में क्या हुआ था?
खड़गे के अनुसार, 20 जुलाई को हजारों छात्र शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे और सरकार से संवाद चाहते थे। उन्हें लाठीचार्ज, आंसू गैस, पानी की बौछार और पैलेट गन का सामना करना पड़ा, जिसमें 100 से अधिक छात्र घायल हुए।
खड़गे ने गृह मंत्री से इस्तीफे की माँग क्यों की?
खड़गे ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के आदेश की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि गृह मंत्री यह नहीं बता सकते कि ये आदेश किसने दिए, तो उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर विपक्ष की आपत्ति क्या है?
विपक्ष का कहना है कि विधेयक में केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जबकि NTA और परीक्षा संचालन में ढाँचागत सुधार नदारद हैं। खड़गे ने चेतावनी दी कि बिना संस्थागत बदलाव के पेपर लीक की घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
क्या यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित था?
नहीं। खड़गे ने आरोप लगाया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और असम सहित कई राज्यों में भी छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई हुई, लेकिन केंद्र सरकार इन मामलों पर मौन रही।
पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर खड़गे ने क्या कहा?
खड़गे ने पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद संसद परिसर में सत्ता पक्ष द्वारा किए गए स्वागत पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि गंभीर घटनाओं के बाद आत्ममंथन और खेद होना चाहिए था, न कि उत्सव जैसा माहौल।
राष्ट्र प्रेस
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