30 जुलाई 2026
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राज्यसभा में हंगामा: खड़गे ने शिक्षा को 'कारोबार' बताया, मनुस्मृति उल्लेख पर नड्डा की कड़ी आपत्ति

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राज्यसभा में हंगामा: खड़गे ने शिक्षा को 'कारोबार' बताया, मनुस्मृति उल्लेख पर नड्डा की कड़ी आपत्ति

सारांश

राज्यसभा में लोक परीक्षा विधेयक पर बहस तब तीखी हो गई जब नेता प्रतिपक्ष खड़गे ने शिक्षा को 'कारोबार' बताया और मनुस्मृति का उल्लेख किया। सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और नड्डा ने वक्तव्य को समाज में अशांति फैलाने वाला करार दिया।

मुख्य बातें

30 जुलाई 2026 को राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान हंगामा हुआ।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि शिक्षा 'बड़े कारोबार' में बदल गई है और गरीब बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं।
खड़गे के अनुसार, देश में 70,000 से अधिक उच्च शिक्षा संस्थानों में 4 करोड़ 50 लाख छात्र हैं, फिर भी SC/ST नामांकन राष्ट्रीय औसत से कम है।
दिव्यांग छात्रों की उच्च शिक्षा में भागीदारी मात्र 0.12 प्रतिशत बताई गई।
सदन के नेता जेपी नड्डा ने खड़गे के मनुस्मृति उल्लेख को 'समाज में द्वेष और अशांति' फैलाने वाला बताया और उसे कार्यवाही से हटाने की माँग की।
सभापति ने हस्तक्षेप कर खड़गे को भाषण विधेयक तक सीमित रखने का निर्देश दिया।

राज्यसभा में 30 जुलाई 2026 को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर सीधा हमला बोला। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते शिक्षा एक बड़े कारोबार में तब्दील हो गई है और इसकी सबसे बड़ी कीमत गरीब परिवारों के बच्चों को चुकानी पड़ रही है।

खड़गे के आरोप: शिक्षा बनी 'विशेषाधिकार'

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में कहा कि देश में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 70,000 से अधिक है और इनमें लगभग 4 करोड़ 50 लाख छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इसके बावजूद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से कम बना हुआ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दिव्यांग छात्रों की भागीदारी मात्र 0.12 प्रतिशत है।

खड़गे के अनुसार, निजी शिक्षण संस्थानों की बढ़ती संख्या ने शिक्षा को सबका अधिकार नहीं, बल्कि कुछ लोगों का विशेषाधिकार बना दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार समान और न्यायपूर्ण शिक्षा तथा विश्वविद्यालयों में योग्य शिक्षकों और कुलपतियों की नियुक्ति की बात करती है, लेकिन पाठ्यक्रम में जो सामग्री शामिल की जा रही है, वह चिंताजनक है।

मनुस्मृति उल्लेख पर भड़का सत्ता पक्ष

अपने भाषण के दौरान खड़गे ने कहा कि सरकार की नीतियाँ उस सोच की याद दिलाती हैं जिसका उल्लेख मनुस्मृति में मिलता है। उन्होंने मनुस्मृति का एक कथित अंश पढ़ने का प्रयास किया और बताया कि संस्कृत में पारंगत न होने के कारण वे उसका हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करेंगे।

जैसे ही खड़गे ने मनुस्मृति का उल्लेख शुरू किया, सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तत्काल विरोध जताया और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी सदस्य को आपत्ति है तो उस पर विचार किया जाएगा, किंतु भाषण विचाराधीन विधेयक तक ही सीमित रखा जाए।

नड्डा की कड़ी प्रतिक्रिया

सदन के नेता एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खड़गे के वक्तव्य पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'अभी नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो वक्तव्य दिया है, उससे समाज में द्वेष की भावना पैदा होती है और अशांति का वातावरण बनता है। हम सभी इस सदन के जिम्मेदार सदस्य हैं। जहाँ तक मेरी जानकारी है, उन्होंने जो बातें कही हैं, वे तथ्यों से परे हैं।'

नड्डा ने यह भी कहा कि जिस पुस्तक का उल्लेख किया गया है वह मूल पाठ नहीं है और पहले यह प्रमाणित किया जाए कि वह प्रामाणिक है। उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि मनुस्मृति के संदर्भ में कही गई बातों को सदन की कार्यवाही का हिस्सा न बनाया जाए।

सभापति का हस्तक्षेप और कार्यवाही

लगातार हंगामे के बीच सभापति ने दोबारा हस्तक्षेप करते हुए खड़गे से कहा कि वे विधेयक से जुड़े विषयों पर ही अपनी बात रखें और भाषण शीघ्र पूरा करें। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर संसद में व्यापक बहस चल रही है। गौरतलब है कि शिक्षा में समानता और वंचित वर्गों की भागीदारी का मुद्दा संसद में बार-बार उठता रहा है।

आगे क्या

सभापति द्वारा आपत्तियों पर विचार के आश्वासन के बाद विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ी। विपक्ष की ओर से शिक्षा में वंचित वर्गों की भागीदारी और पाठ्यक्रम संबंधी चिंताओं को लेकर दबाव जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मनुस्मृति के उल्लेख ने बहस को तुरंत वैचारिक मैदान में खींच लिया — यह संयोग नहीं, रणनीति है। विपक्ष जानता है कि SC/ST नामांकन के आँकड़े और दिव्यांग भागीदारी का 0.12% का आँकड़ा अपने आप में पर्याप्त तीखे हैं, फिर भी ऐतिहासिक संदर्भ की ओर मुड़ना सत्ता पक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में ले जाता है। नड्डा की 'तथ्यों से परे' वाली प्रतिक्रिया ने उन आँकड़ों का खंडन नहीं किया जो खड़गे ने रखे — यह अंतर मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है। असली सवाल यह है कि लोक परीक्षा संशोधन विधेयक वंचित वर्गों की पहुँच की इन संरचनात्मक खामियों को कैसे दूर करता है — और इस पर संसद में पर्याप्त चर्चा हुई या नहीं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यसभा में 30 जुलाई को हंगामा किस बात पर हुआ?
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा मनुस्मृति का उल्लेख किए जाने पर सत्ता पक्ष ने तीखा विरोध जताया, जिससे सदन में हंगामा हो गया। सभापति को दो बार हस्तक्षेप करना पड़ा।
खड़गे ने शिक्षा को लेकर क्या आरोप लगाए?
खड़गे ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा एक बड़े कारोबार में बदल गई है और गरीब परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि SC/ST छात्रों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से कम है और दिव्यांग छात्रों की भागीदारी मात्र 0.12% है।
जेपी नड्डा ने खड़गे के बयान पर क्या कहा?
सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे के वक्तव्य से समाज में द्वेष और अशांति का वातावरण पैदा होता है और उनकी बातें तथ्यों से परे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस मनुस्मृति का उल्लेख किया गया वह मूल प्रामाणिक पाठ नहीं है, और सभापति से आग्रह किया कि उन टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाया जाए।
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से संबंधित मौजूदा कानून में संशोधन के लिए राज्यसभा में पेश किया गया है। इसी विधेयक पर चर्चा के दौरान शिक्षा नीति और वंचित वर्गों की भागीदारी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।
सभापति ने हंगामे पर क्या रुख अपनाया?
सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि किसी भी सदस्य की आपत्ति पर विचार किया जाएगा, लेकिन भाषण विचाराधीन विधेयक तक सीमित रखा जाए। उन्होंने खड़गे से अपना भाषण शीघ्र समाप्त करने का भी आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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