राज्यसभा में हंगामा: खड़गे ने शिक्षा को 'कारोबार' बताया, मनुस्मृति उल्लेख पर नड्डा की कड़ी आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में 30 जुलाई 2026 को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर सीधा हमला बोला। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते शिक्षा एक बड़े कारोबार में तब्दील हो गई है और इसकी सबसे बड़ी कीमत गरीब परिवारों के बच्चों को चुकानी पड़ रही है।
खड़गे के आरोप: शिक्षा बनी 'विशेषाधिकार'
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में कहा कि देश में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 70,000 से अधिक है और इनमें लगभग 4 करोड़ 50 लाख छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इसके बावजूद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से कम बना हुआ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दिव्यांग छात्रों की भागीदारी मात्र 0.12 प्रतिशत है।
खड़गे के अनुसार, निजी शिक्षण संस्थानों की बढ़ती संख्या ने शिक्षा को सबका अधिकार नहीं, बल्कि कुछ लोगों का विशेषाधिकार बना दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार समान और न्यायपूर्ण शिक्षा तथा विश्वविद्यालयों में योग्य शिक्षकों और कुलपतियों की नियुक्ति की बात करती है, लेकिन पाठ्यक्रम में जो सामग्री शामिल की जा रही है, वह चिंताजनक है।
मनुस्मृति उल्लेख पर भड़का सत्ता पक्ष
अपने भाषण के दौरान खड़गे ने कहा कि सरकार की नीतियाँ उस सोच की याद दिलाती हैं जिसका उल्लेख मनुस्मृति में मिलता है। उन्होंने मनुस्मृति का एक कथित अंश पढ़ने का प्रयास किया और बताया कि संस्कृत में पारंगत न होने के कारण वे उसका हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करेंगे।
जैसे ही खड़गे ने मनुस्मृति का उल्लेख शुरू किया, सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तत्काल विरोध जताया और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी सदस्य को आपत्ति है तो उस पर विचार किया जाएगा, किंतु भाषण विचाराधीन विधेयक तक ही सीमित रखा जाए।
नड्डा की कड़ी प्रतिक्रिया
सदन के नेता एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खड़गे के वक्तव्य पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'अभी नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो वक्तव्य दिया है, उससे समाज में द्वेष की भावना पैदा होती है और अशांति का वातावरण बनता है। हम सभी इस सदन के जिम्मेदार सदस्य हैं। जहाँ तक मेरी जानकारी है, उन्होंने जो बातें कही हैं, वे तथ्यों से परे हैं।'
नड्डा ने यह भी कहा कि जिस पुस्तक का उल्लेख किया गया है वह मूल पाठ नहीं है और पहले यह प्रमाणित किया जाए कि वह प्रामाणिक है। उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि मनुस्मृति के संदर्भ में कही गई बातों को सदन की कार्यवाही का हिस्सा न बनाया जाए।
सभापति का हस्तक्षेप और कार्यवाही
लगातार हंगामे के बीच सभापति ने दोबारा हस्तक्षेप करते हुए खड़गे से कहा कि वे विधेयक से जुड़े विषयों पर ही अपनी बात रखें और भाषण शीघ्र पूरा करें। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर संसद में व्यापक बहस चल रही है। गौरतलब है कि शिक्षा में समानता और वंचित वर्गों की भागीदारी का मुद्दा संसद में बार-बार उठता रहा है।
आगे क्या
सभापति द्वारा आपत्तियों पर विचार के आश्वासन के बाद विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ी। विपक्ष की ओर से शिक्षा में वंचित वर्गों की भागीदारी और पाठ्यक्रम संबंधी चिंताओं को लेकर दबाव जारी रहने की संभावना है।