31 जुलाई 2026
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खड़गे के बयान पर संसद में घमासान: भाजपा का पलटवार, कांग्रेस का बचाव, सपा ने छात्र मुद्दा उठाया

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खड़गे के बयान पर संसद में घमासान: भाजपा का पलटवार, कांग्रेस का बचाव, सपा ने छात्र मुद्दा उठाया

सारांश

पेपर लीक विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के एक बयान ने संसद में तूफान खड़ा कर दिया। भाजपा ने आपत्तिजनक भाषा का आरोप लगाया, कांग्रेस ने संदर्भ तोड़ने का, और सपा ने पूरे विवाद को छात्र आंदोलन से जोड़ सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 30 जुलाई के बयान पर संसद में तीखी राजनीतिक बहस छिड़ी।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि खड़गे ने पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान अपशब्दों का इस्तेमाल किया और मनुस्मृति की नकली प्रति सदन में लाए।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार, कड़े विरोध के बाद खड़गे को अपने बयान में संशोधन करना पड़ा।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा खड़गे का आशय जनशक्ति से सत्ता परिवर्तन था — बयान को तोड़-मरोड़ा गया।
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने सरकार पर छात्र आंदोलनों की अनदेखी का आरोप लगाया।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक विवादास्पद बयान ने 30 जुलाई को संसद के भीतर और बाहर तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी। केंद्रीय मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने खड़गे के वक्तव्य पर कड़ी आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके शब्दों का संदर्भ से बाहर अर्थ निकाला जा रहा है। समाजवादी पार्टी (SP) ने इस पूरे विवाद को छात्रों की समस्याओं से जोड़कर सरकार को घेरा।

भाजपा मंत्रियों की तीखी प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि खड़गे ने पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान कोई सार्थक बात नहीं की और अपशब्दों का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि खड़गे सदन में मनुस्मृति की एक नकली प्रति लेकर आए और यह कहा कि 'मैं उन्हें यहाँ घसीटकर लाऊंगा।' सिंह ने स्पष्ट किया कि भाजपा का स्पष्ट संदेश है कि समाज में किसी भी स्तर पर विभाजन की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने खड़गे को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें सरकार की कुर्सी की चिंता करने की बजाय कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। अठावले ने कहा कि केंद्र सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है और उसे किसी प्रकार की अस्थिरता की आशंका नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि संसदीय मर्यादा की बार-बार याद दिलाने के बावजूद राहुल नियमों के अनुरूप नहीं चले।

भाजपा सांसदों का रुख

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि सरकार ने पूरे मामले में संयम बनाए रखा और समय-समय पर सभी आवश्यक कदम उठाए। उनके अनुसार, देश की जनता ने सरकार के रवैये को समझा है और खड़गे के मौजूदा बयान का कोई विशेष राजनीतिक महत्व नहीं है।

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा की कार्यवाही को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध अत्यंत आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसके बाद भाजपा सांसदों के कड़े विरोध के चलते खड़गे को अपने बयान में संशोधन करना पड़ा। त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की यह भाषा उनकी मानसिकता को उजागर करती है और जनता लगातार ऐसे रवैये को नकार रही है।

कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि उनके बयान में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था। तिवारी के अनुसार खड़गे का आशय केवल यह था कि जहाँ सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है, वहाँ वह उपस्थित नहीं है, और जब जनशक्ति सत्ता परिवर्तन करेगी तो सरकार को हटना ही पड़ेगा। तिवारी ने इसे एक सामान्य लोकतांत्रिक वक्तव्य बताया जिसे जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

सपा ने छात्र आंदोलन से जोड़ा मुद्दा

समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने इस विवाद को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर दो नेताओं के बीच हुई बातचीत को उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जाता, उनके आंदोलनों को गंभीरता से लिया जाता, तो न लाठीचार्ज की नौबत आती और न ही देश में तनाव का यह माहौल बनता।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब संसद का सत्र पहले से ही विभिन्न विधेयकों को लेकर गतिरोध का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि पेपर लीक विधेयक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहस के दौरान इस प्रकार की भाषाई तीखापन संसदीय मर्यादा पर सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष संवाद की राह अपनाते हैं या यह टकराव और गहरा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से होता है। भाजपा का आक्रोश तब अधिक विश्वसनीय लगता जब वह स्वयं के नेताओं की भाषा पर भी समान मानदंड लागू करती। दूसरी ओर, कांग्रेस का 'संदर्भ से बाहर' वाला तर्क तब तक कमज़ोर रहेगा जब तक खड़गे स्वयं स्पष्ट सफाई न दें। सपा का छात्र आंदोलन से जोड़ना राजनीतिक रूप से चतुर है, लेकिन यह भी इस मूल सवाल से ध्यान भटकाता है कि संसदीय बहस में शालीनता किसकी जिम्मेदारी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में क्या कहा जिस पर विवाद हुआ?
पेपर लीक विधेयक पर बहस के दौरान खड़गे ने कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि वे किसी को 'घसीटकर लाएंगे'। भाजपा के कड़े विरोध के बाद उन्होंने अपने बयान में संशोधन किया। कांग्रेस का कहना है कि उनके शब्दों का संदर्भ से बाहर अर्थ निकाला गया।
भाजपा ने खड़गे के बयान पर क्या आपत्ति जताई?
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया और सदन में मनुस्मृति की नकली प्रति लाए। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे कांग्रेस नेतृत्व की मानसिकता का प्रतीक बताया।
कांग्रेस ने खड़गे के बयान का बचाव कैसे किया?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि खड़गे का आशय केवल यह था कि जनशक्ति के ज़रिए सत्ता परिवर्तन होगा — यह एक सामान्य लोकतांत्रिक वक्तव्य है। उन्होंने कहा कि भाजपा जानबूझकर शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।
समाजवादी पार्टी ने इस विवाद पर क्या कहा?
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने विवाद को छात्र आंदोलनों से जोड़ते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों की बात सुनी होती, तो न लाठीचार्ज होता और न देश में तनाव का माहौल बनता। उनके अनुसार सदन की बहस को उसके संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
यह विवाद किस विधेयक की बहस के दौरान हुआ?
यह विवाद राज्यसभा में पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान उभरा। इसी बहस में खड़गे के बयान पर भाजपा ने आपत्ति जताई, जिसके बाद खड़गे ने अपने वक्तव्य में संशोधन किया।
राष्ट्र प्रेस
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