उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भुवनेश्वर में हाई सीज फिशिंग राष्ट्रीय कार्यक्रम लॉन्च किया, ओडिशा डीप सी मिशन भी शुरू
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 9 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में गहरे समुद्र में सतत मत्स्य दोहन के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज़ भी लॉन्च किया और देशभर के 10 फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन तथा मछुआरों को हाई सीज फिशिंग के लिए अधिकार-पत्र सौंपे।
कार्यक्रम का महत्व और पृष्ठभूमि
उपराष्ट्रपति ने इस पहल को भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछुआरा समुदाय के साझा प्रयासों का परिणाम है, जो मत्स्य क्षेत्र में विकास, स्थिरता और समृद्धि के नए युग की शुरुआत करेगा। गौरतलब है कि अब तक मछली पकड़ने की गतिविधियाँ मुख्य रूप से तटीय इलाकों तक ही सीमित थीं।
राधाकृष्णन ने बताया कि भारत के पास 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र है, जिसके विशाल संसाधनों का अभी तक पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाया था।
आर्थिक अवसर और रोज़गार की संभावनाएँ
उपराष्ट्रपति ने बताया कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। यह क्षेत्र देश के करीब 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका का आधार है।
पिछले वित्त वर्ष में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात ₹73,000 करोड़ से अधिक रहा। उन्होंने विश्वास जताया कि हाई सीज पहल से निर्यात में और वृद्धि होगी, साथ ही मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। नई व्यवस्था के तहत भारतीय मछुआरे अब टूना जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों का सतत दोहन कर सकेंगे।
मछुआरा समुदाय को प्राथमिकता
नई व्यवस्था में मत्स्य सहकारी समितियों, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन और भारतीय मछुआरों को प्राथमिकता के आधार पर लेटर ऑफ ऑथराइजेशन दिए जाएंगे। उपराष्ट्रपति ने इसे तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक पेशा न मानें, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार और वैश्विक अवसरों से जुड़ा आधुनिक व्यवसाय समझें। शैक्षणिक संस्थानों और संबंधित एजेंसियों से भी मछुआरा समुदाय को ज्ञान, तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आह्वान किया गया।
डिजिटल निगरानी और सतत मत्स्य पालन पर ज़ोर
राधाकृष्णन ने डिजिटल ऑथराइजेशन सिस्टम, जहाज़ों की ट्रैकिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और अवैध, बिना रिपोर्टिंग तथा अनियमित मत्स्य पालन पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सतत मत्स्य पालन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी लिखा कि ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन एक दूरदर्शी पहल है, जो ओडिशा को पूर्वी भारत का अग्रणी डीप-सी फिशिंग और समुद्री निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं एमएसएमई राज्य मंत्री गोकुलानंद मल्लिक के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, मत्स्य संस्थानों के प्रतिनिधि और मछुआरा संगठनों के सदस्य भी उपस्थित रहे। यह आयोजन भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।