विकसित भारत 2047: मीनाक्षी लेखी बोलीं — महिलाओं की बराबर भागीदारी के बिना लक्ष्य अधूरा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी तथा BJP सांसद कंगना रनौत ने 24 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के मातृत्व, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक मूल्यों पर दिए गए संबोधन पर अपनी प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं ने एकमत होकर कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक देश की आधी आबादी — यानी महिलाएं — राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार नहीं बनतीं।
मीनाक्षी लेखी का बयान: परिवार से राष्ट्र तक
लेखी ने कहा, मोहन भागवत ने भारतीय परंपरा, सांस्कृतिक ज्ञान और मातृत्व की भावना को आधुनिक समय के अनुरूप समझाने का प्रयास किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
लेखी ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं से केवल जिम्मेदारियों की अपेक्षा करना पर्याप्त नहीं है — उन्हें पूरा सहयोग और समान अवसर भी मिलने चाहिए। उनके अनुसार, परिवार के भीतर घरेलू जिम्मेदारियों का संतुलित बंटवारा होना चाहिए, ताकि महिलाएं अपने व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के लिए पर्याप्त समय निकाल सकें।
भारतीय दर्शन और महिला सशक्तीकरण
लेखी ने भारतीय दर्शन का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं और पुरुषों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं माना गया है — आत्मा सभी में समान है। उनके शब्दों में, 'महिला सशक्तीकरण केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला है।' उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने को 'समय की आवश्यकता' बताया।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल समाप्ति का स्वागत
लेखी ने सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल समाप्त किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि संवाद के माध्यम से छात्रों और सरकार के बीच चल रहे मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा और सभी पक्ष मिलकर सकारात्मक रास्ता अपनाएंगे।
कंगना रनौत की प्रतिक्रिया: बदलती भूमिका, नई चुनौतियाँ
BJP सांसद कंगना रनौत ने कहा कि कार्यक्रम में महिलाओं की बदलती भूमिका और आधुनिक समय की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने इन सभी विषयों पर अपने विचार रखते हुए महिलाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का मार्गदर्शन दिया।
रनौत ने यह भी कहा कि आज महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा रही हैं, इसलिए उन्हें सही अवसर, सहयोग और मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में महिलाओं के आत्मविश्वास, परिवार और समाज में उनकी जिम्मेदारियों तथा बदलते सामाजिक परिवेश पर सार्थक चर्चा हुई।
आगे क्या
RSS प्रमुख के इस संबोधन ने महिला सशक्तीकरण की बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत बदलाव कर रही है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस चर्चा का असर आने वाले नीतिगत संवादों में दिखने की संभावना है।