कंगना रनौत ने महिला आरक्षण पर दिया बयान, 'जा सिमरन, जी लो जिंदगी'
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण का महत्व महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाना है।
- कंगना ने कहा, 'जा सिमरन, जी लो अपनी जिंदगी'।
- महिलाएं अब अपने हक के लिए आवाज उठाने लगी हैं।
- कंगना ने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण दिया।
- बिल के पारित होने से महिलाओं की भागीदारी 50%25 से अधिक हो जाएगी।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिलाओं के आरक्षण पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि मैं देश की मातृशक्ति को बधाई देती हूं कि हम इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी बेटियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हर महिला के भीतर एक दर्द है। उन्होंने फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' के प्रसिद्ध डायलॉग का जिक्र करते हुए कहा, “जा सिमरन, जी ले अपनी जिंदगी।” एनडीए सरकार ने महिलाओं को बताया है कि अब सभी बंदिशें टूट गई हैं। जाओ बेटियों, अपने जीवन का आनंद लो। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण क्षण है। मैं सभी महिलाओं को बधाई देती हूं।
कंगना ने कहा कि जब भारत की बेटियां वैदिक काल में विदुषी बनीं, तो वे गार्गी और मैत्रेयी बनकर उभरीं। मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई ने लड़ाई की। अध्यात्म में मीराबाई और अक्का महादेवी ने अपने नाम से भारत का नाम रोशन किया। आज की बेटियां हर क्षेत्र में भारत का नाम ऊंचा कर रही हैं, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में हमें वैश्विक स्तर पर कदम से कदम मिलाकर नहीं चल पा रहे हैं।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 68 विधायक हैं, लेकिन केवल एक महिला विधायक है। देश के अन्य हिस्सों में भी स्थिति यही है। लोकसभा में हमारी उपस्थिति ठीक है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा संतोषजनक नहीं है। जब यह अवसर हमारे जीवन में आया है, तो पीएम मोदी की एक बात याद आती है, “पेट में चूहे दौड़ना।” जब भी देश में कुछ अच्छा होता है, तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं।
कंगना ने कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा कह रही हैं कि संविधान बदल देंगे, लोकतंत्र खत्म कर देंगे। जब भी कोई बदलाव हो, वे यही कहते हैं कि लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा। सामान्य समझ का उपयोग करें, जो प्रधानमंत्री मोदी लोकतंत्र के माध्यम से चुने गए हैं, वे लोकतंत्र को क्यों समाप्त करेंगे? वह इंदिरा गांधी की तरह कुर्सी पर कब्जा बनाए रखने के लिए लोकतंत्र खत्म नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि लोकतंत्र अगर किसी के लिए सबसे ज्यादा काम करता है, तो वह मेरे लिए करता है। उन्हें भी यह समझना चाहिए।
कंगना ने कहा कि विपक्ष को कुछ नहीं मिला, तो वे परिसीमन में खामियां निकालने लगे। इसलिए हम इसे नहीं होने देंगे। प्रियंका गांधी जी, यह कोई भाजपा की प्रक्रिया नहीं है, यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है। जनसंख्या बढ़ गई है, तो कुछ बदलाव आवश्यक हैं, लेकिन इन बातों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बिल के बाद महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी।
बिल को लेकर जल्दबाजी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि ये लोग पूछ रहे हैं कि इतनी जल्दी क्यों है, तो क्या आपकी तरह इसे 30 साल तक लटकाए रखते? मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं को न्याय दिलाने में तेजी दिखा रहे हैं। 60 साल में जो काम नहीं हुए, उन्हें उन्होंने 10 साल में कर दिया।
कंगना रनौत ने कहा कि जब प्रधानमंत्री गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से भ्रूण और माताओं के संवाद को लोगों तक पहुँचाया। इससे लोगों में संवेदनशीलता आई और बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई, जिससे लिंगानुपात में सुधार हुआ।
विपक्ष के नेता फूल सिंह के बयान का जिक्र करते हुए कंगना ने कहा कि वे कहते हैं कि महिलाएं आकर्षक होंगी तो रेप होंगे। सोचिए, यह कैसी मानसिकता है। उन्होंने मुलायम सिंह यादव के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेता कहते थे कि इस बिल के पास होने के बाद केवल शहरी महिलाएं ही संसद में आएंगी, और पुरुष सीटियां और तालियां बजाएंगे, तो उन्हें कौन नियंत्रित करेगा?
कंगना ने इन बयानों पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि यह बेटियों के प्रति कैसी सोच है? जब मुझे 2024 में टिकट मिला, तो कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने मेरी फोटो के साथ लिखा था कि "मंडी में क्या भाव चल रहा है?" मैं एक कलाकार हूं, मैंने कई किरदार निभाए हैं और उसके लिए मुझे सम्मान भी मिला है। उनके एक किरदार की फोटो का गलत इस्तेमाल कर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। मंडी की बहन-बेटियों ने इसका जवाब दिया, जब चुनाव में मुझे जीत मिली।
उन्होंने कहा कि आज देश में प्रधानमंत्री मोदी से बड़ा फेमिनिस्ट कोई नहीं है। भारत की बेटियां हमेशा उनकी आभारी रहेंगी।