'विकसित भारत' का अर्थ केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य: पीएम मोदी
सारांश
Key Takeaways
- 'विकसित भारत' का अर्थ केवल विकास नहीं, महिलाओं की भागीदारी भी आवश्यक है।
- महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
- महिलाएं अब निर्णय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 'विकसित भारत' का अर्थ केवल आर्थिक विकास या बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है। यह सुनिश्चित करना कि देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में सभी वर्गों की भागीदारी हो, विशेषकर महिलाओं की, इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'विकसित भारत' का मतलब केवल अच्छी रेल, सड़कें या सकारात्मक आर्थिक आंकड़े नहीं हैं। 'सबका साथ, सबका विकास' का सिद्धांत हमें नीति-निर्माण में भी अपनाना चाहिए। देश की 50 प्रतिशत आबादी, यानी महिलाएं, आज निर्णय प्रक्रिया में शामिल होना आवश्यक है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दिशा में देश पहले ही काफी पीछे रह चुका है और इसे और टालना उचित नहीं होगा।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर, पीएम मोदी ने कहा कि जिन राजनीतिक दलों या नेताओं ने इसका विरोध किया, उन्हें महिलाओं ने कभी माफ नहीं किया। चुनावों के दौरान, महिलाओं ने अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े लोगों को जवाब दिया है। 2024 में यह मुद्दा इसलिए आगे नहीं आया क्योंकि इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण या महिलाओं की भागीदारी को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। यदि हम सब मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र का लाभ होगा। इसका श्रेय न तो सरकार को मिलेगा और न मोदी को, यह पूरे देश का होगा।
प्रधानमंत्री ने पिछले 25-30 वर्षों में पंचायत स्तर पर उभरी महिला नेतृत्व क्षमता का विशेष उल्लेख किया। लाखों महिलाएं अब केवल प्रतिनिधि नहीं, बल्कि जागरूक और प्रभावशाली नेता बन चुकी हैं। पहले महिलाएं समझती थीं लेकिन बोलती नहीं थीं, आज वे मुखर हैं और फैसलों को प्रभावित कर रही हैं।
पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि जो लोग आज भी महिलाओं की भागीदारी का विरोध कर रहे हैं, उन्हें इसके लिए राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। यह विरोध अब केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी महिलाओं में जागरूकता और असंतोष बढ़ चुका है।
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीति के तराजू से न तौला जाए। देश और दुनिया की महिलाएं हमारे निर्णयों को देखेंगी, लेकिन उससे ज्यादा हमारी नीयत को परखेंगी। यदि नीयत में खोट हुई, तो महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।
उन्होंने 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पूरे देश में सकारात्मक माहौल बना था और इस मुद्दे पर कोई राजनीतिक रंग नहीं चढ़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि अब इस फैसले को लागू करने में और कितना समय लगेगा? 2029 तक हमारे पास समय है, लेकिन अगर तब भी इसे लागू नहीं किया गया तो स्थिति क्या होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है। अब और देरी न करने का समय आ गया है।