15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्रीम कोर्ट ने ई.वी. वेलु को मद्रास हाईकोर्ट की अंतरिम राहत बरकरार रखी, तमिलनाडु सरकार की एसएलपी खारिज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट ने ई.वी. वेलु को मद्रास हाईकोर्ट की अंतरिम राहत बरकरार रखी, तमिलनाडु सरकार की एसएलपी खारिज

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की एसएलपी खारिज करते हुए DMK विधायक ई.वी. वेलु को मद्रास हाईकोर्ट की अंतरिम राहत बरकरार रखी। करूर सड़क घोटाले में ₹3.23 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में DVAC की जाँच जारी है, जबकि वेलु LOC और गिरफ्तारी से फिलहाल सुरक्षित हैं।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को तमिलनाडु सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की।
मद्रास उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश बरकरार — ई.वी.
वेलु के विरुद्ध LOC पर रोक और दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण 28 जुलाई तक जारी।
DVAC ने 24 जून 2026 को करूर जिले की सड़क परियोजना में कथित ₹3.23 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में FIR दर्ज की थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें — कि उच्च न्यायालय ने याचिका की परिधि से बाहर जाकर राहत दी — सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कीं।
वेलु सिंगापुर में चिकित्सा उपचार के बाद लौटकर 15 जुलाई को DVAC के समक्ष पेश हुए।

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 15 जुलाई को तमिलनाडु के पूर्व राजमार्ग मंत्री एवं द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) विधायक ई.वी. वेलु के पक्ष में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इससे वह आदेश प्रभावी रहेगा जिसमें वेलु के विरुद्ध जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) पर रोक लगाई गई थी और उन्हें किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया। राज्य सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उच्च न्यायालय ने ऐसे मामले में प्रभावी रूप से अग्रिम जमानत जैसी राहत प्रदान कर दी, जबकि याचिका में केवल LOC रद्द करने की माँग की गई थी।

तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि किसी याचिका की सुनवाई के दौरान जाँच एजेंसी की समस्त कार्रवाई पर व्यापक रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। हालाँकि, पीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उच्च न्यायालय की अंतरिम सुरक्षा को बहाल रखा।

मामले की पृष्ठभूमि

वेलु के विरुद्ध निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक (DVAC) ने 24 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 468 (धोखाधड़ी हेतु जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और 109 (उकसावा) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएँ शामिल हैं।

यह मामला वेलु के राजमार्ग मंत्री पद पर रहते हुए करूर जिले में एक सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ा है। आरोप है कि जिस सड़क का निर्माण कभी पूरा नहीं हुआ, उसके लिए ₹3.23 करोड़ के सरकारी धन का कथित तौर पर फर्जी दावा किया गया।

LOC और उच्च न्यायालय का आदेश

वेलु ने अपने विरुद्ध जारी LOC को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उनके वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने उच्च न्यायालय में बताया था कि पूर्व मंत्री सिंगापुर में चिकित्सा उपचार करा रहे थे और उन्होंने जाँच एजेंसी को पूर्व में सूचित कर दिया था कि इलाज पूरा होने के बाद 15 जुलाई को जाँच में शामिल होंगे। बचाव पक्ष का कहना था कि इसके बावजूद एजेंसी ने निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना जल्दबाजी में LOC जारी कर दिया।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 28 जुलाई तक LOC के प्रभाव पर रोक लगाते हुए वेलु को 15 जुलाई को जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था, साथ ही DVAC को अगली सुनवाई तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था।

राज्य सरकार का पक्ष

तमिलनाडु सरकार ने अदालत में तर्क दिया था कि वेलु को कई बार नोटिस भेजे गए, परंतु वे जाँच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए और सिंगापुर चले गए, जिससे LOC जारी करना आवश्यक हो गया। राज्य का यह भी कहना था कि उच्च न्यायालय ने याचिका की परिधि से बाहर जाकर व्यापक राहत प्रदान की।

आगे क्या

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ई.वी. वेलु बुधवार को DVAC के समक्ष पूछताछ के लिए उपस्थित हुए। मद्रास उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित है, जब LOC और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक की स्थिति पर पुनर्विचार होगा। DVAC की जाँच जारी है और आने वाले सप्ताहों में मामले की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक बड़ा सवाल अनुत्तरित छोड़ता है — क्या LOC जारी करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ? यदि वेलु ने स्वयं 15 जुलाई को उपस्थित होने की सूचना दी थी, तो जल्दबाजी में LOC जारी करना प्रक्रियागत खामी की ओर संकेत करता है। दूसरी ओर, करूर सड़क घोटाले में ₹3.23 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के आरोप गंभीर हैं और जाँच की निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है। 28 जुलाई की सुनवाई तय करेगी कि यह संरक्षण कवच बना रहेगा या टूटेगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई.वी. वेलु को सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की एसएलपी खारिज कर मद्रास उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश बरकरार रखा। इससे वेलु के विरुद्ध लुक आउट सर्कुलर पर रोक और DVAC की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण 28 जुलाई तक जारी रहेगा।
ई.वी. वेलु पर DVAC का मामला क्या है?
DVAC ने 24 जून 2026 को करूर जिले की एक सड़क निर्माण परियोजना में ₹3.23 करोड़ के सरकारी धन की कथित धोखाधड़ी के आरोप में FIR दर्ज की है। आरोप है कि जिस सड़क का निर्माण कभी पूरा नहीं हुआ, उसके लिए फर्जी तरीके से सरकारी धन का दावा किया गया।
लुक आउट सर्कुलर (LOC) क्यों जारी किया गया था?
तमिलनाडु सरकार के अनुसार, वेलु को कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद वे जाँच अधिकारी के समक्ष पेश नहीं हुए और सिंगापुर चले गए, जिससे LOC जारी करना आवश्यक हो गया। बचाव पक्ष का कहना था कि वेलु सिंगापुर में चिकित्सा उपचार करा रहे थे और 15 जुलाई को उपस्थित होने की सूचना पहले ही दे दी थी।
मद्रास हाईकोर्ट में अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई 2026 को निर्धारित है। उस तारीख तक LOC और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक प्रभावी रहेगी।
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या तर्क दिया था?
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि मद्रास उच्च न्यायालय ने केवल LOC रद्द करने की याचिका में प्रभावी रूप से अग्रिम जमानत जैसी व्यापक राहत दे दी, जो याचिका की परिधि से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील अस्वीकार कर दी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 8 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले