सुप्रीम कोर्ट ने ई.वी. वेलु को मद्रास हाईकोर्ट की अंतरिम राहत बरकरार रखी, तमिलनाडु सरकार की एसएलपी खारिज
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 15 जुलाई को तमिलनाडु के पूर्व राजमार्ग मंत्री एवं द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) विधायक ई.वी. वेलु के पक्ष में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इससे वह आदेश प्रभावी रहेगा जिसमें वेलु के विरुद्ध जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) पर रोक लगाई गई थी और उन्हें किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया। राज्य सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उच्च न्यायालय ने ऐसे मामले में प्रभावी रूप से अग्रिम जमानत जैसी राहत प्रदान कर दी, जबकि याचिका में केवल LOC रद्द करने की माँग की गई थी।
तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि किसी याचिका की सुनवाई के दौरान जाँच एजेंसी की समस्त कार्रवाई पर व्यापक रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। हालाँकि, पीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उच्च न्यायालय की अंतरिम सुरक्षा को बहाल रखा।
मामले की पृष्ठभूमि
वेलु के विरुद्ध निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक (DVAC) ने 24 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 468 (धोखाधड़ी हेतु जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और 109 (उकसावा) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएँ शामिल हैं।
यह मामला वेलु के राजमार्ग मंत्री पद पर रहते हुए करूर जिले में एक सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ा है। आरोप है कि जिस सड़क का निर्माण कभी पूरा नहीं हुआ, उसके लिए ₹3.23 करोड़ के सरकारी धन का कथित तौर पर फर्जी दावा किया गया।
LOC और उच्च न्यायालय का आदेश
वेलु ने अपने विरुद्ध जारी LOC को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उनके वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने उच्च न्यायालय में बताया था कि पूर्व मंत्री सिंगापुर में चिकित्सा उपचार करा रहे थे और उन्होंने जाँच एजेंसी को पूर्व में सूचित कर दिया था कि इलाज पूरा होने के बाद 15 जुलाई को जाँच में शामिल होंगे। बचाव पक्ष का कहना था कि इसके बावजूद एजेंसी ने निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना जल्दबाजी में LOC जारी कर दिया।
मद्रास उच्च न्यायालय ने 28 जुलाई तक LOC के प्रभाव पर रोक लगाते हुए वेलु को 15 जुलाई को जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था, साथ ही DVAC को अगली सुनवाई तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था।
राज्य सरकार का पक्ष
तमिलनाडु सरकार ने अदालत में तर्क दिया था कि वेलु को कई बार नोटिस भेजे गए, परंतु वे जाँच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए और सिंगापुर चले गए, जिससे LOC जारी करना आवश्यक हो गया। राज्य का यह भी कहना था कि उच्च न्यायालय ने याचिका की परिधि से बाहर जाकर व्यापक राहत प्रदान की।
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ई.वी. वेलु बुधवार को DVAC के समक्ष पूछताछ के लिए उपस्थित हुए। मद्रास उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित है, जब LOC और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक की स्थिति पर पुनर्विचार होगा। DVAC की जाँच जारी है और आने वाले सप्ताहों में मामले की दिशा स्पष्ट होगी।