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क्या मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री आई पेरियासामी को अंतरिम राहत देने से किया इनकार?

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क्या मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री आई पेरियासामी को अंतरिम राहत देने से किया इनकार?

सारांश

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री आई. पेरियासामी को ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी। अदालत का कहना है कि ईडी को सुने बिना कोई सुरक्षा नहीं दी जा सकती। जानिए पूरा मामला।

मुख्य बातें

मद्रास हाईकोर्ट ने आई.
पेरियासामी को राहत देने से किया इनकार।
ईडी की कार्यवाही पर निर्भर है मामला।
अदालत ने ईडी को सुनने का आदेश दिया।

चेन्नई, 17 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु के ग्रामीण विकास मंत्री आई. पेरियासामी और उनके परिवार के सदस्यों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोई भी अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय एजेंसी को सुने बिना और उसका पक्ष आए बिना किसी प्रकार की अंतरिम सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।

मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की प्रथम खंडपीठ ने कहा कि ईडी को नोटिस जारी किए बिना और उसे जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दी जा सकती।

अदालत ने ईडी के विशेष लोक अभियोजक आर. सिद्धार्थन को एजेंसी की ओर से नोटिस स्वीकार करने की अनुमति दी और ईडी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में दायर सभी रिट याचिकाओं पर 5 जनवरी 2026 तक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करे।

यह याचिकाएं मंत्री आई. पेरियासामी, उनके पुत्र आई.पी. सेंथिलकुमार और पुत्री पी. इंदिरा द्वारा दायर की गई हैं, जिनमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत उनके खिलाफ दर्ज प्रवर्तन केस सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को चुनौती दी गई है। यह ईसीआईआर राज्य पुलिस द्वारा पहले दर्ज एक अनुपातहीन संपत्ति मामले के आधार पर दर्ज की गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने ईसीआईआर और उससे जुड़े सभी कार्रवाई को रद्द करने की मांग करते हुए दलील दी कि मौजूदा परिस्थितियों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठित एक विशेष अदालत ने पहले मंत्री को डीवीएसी द्वारा दर्ज मूल (प्रेडिकेट) अपराध से बरी कर दिया था।

हालांकि, उस बरी किए जाने के आदेश को बाद में वर्ष 2025 में मद्रास हाईकोर्ट ने पलट दिया। इसके बाद पेरियासामी ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिली और आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा का हवाला देते हुए मंत्री और उनके परिवार ने तर्क किया कि चूंकि ईडी की कार्यवाही मूल अपराध पर निर्भर है, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे नहीं बढ़नी चाहिए और तत्काल राहत दी जानी चाहिए।

हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि पहले ईडी को सुना जाना आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई ईडी द्वारा जवाब दाखिल करने के बाद होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्थिति दर्शाती है कि कानून का शासन कितना महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट का निर्णय इस बात पर जोर देता है कि किसी भी एजेंसी को सुनवाई का मौका दिए बिना कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। यह एक सकारात्मक संकेत है कि न्यायपालिका अपनी स्वतंत्रता को बनाए रख रही है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री आई पेरियासामी को राहत क्यों नहीं मिली?
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि ईडी को सुने बिना किसी प्रकार की अंतरिम सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका क्या थी?
सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री को पहले अंतरिम राहत दी थी और आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई ईडी द्वारा जवाब दाखिल करने के बाद होगी।
क्या मंत्री को पहले बरी किया गया था?
हाँ, एक विशेष अदालत ने पहले उन्हें डीवीएसी द्वारा दर्ज मूल अपराध से बरी कर दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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