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क्या इंडी अलायंस का भारत और संविधान विरोधी रवैया उजागर हुआ है: पीयूष गोयल?

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क्या इंडी अलायंस का भारत और संविधान विरोधी रवैया उजागर हुआ है: पीयूष गोयल?

सारांश

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने तमिलनाडु हाईकोर्ट के आदेश की सराहना की, जिसने तिरुपरनकुंद्रम में दीपम परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके और इंडिया गठबंधन हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं। क्या यह सच है कि ये दल संविधान के प्रति अपने दायित्वों को नकार रहे हैं?

मुख्य बातें

तमिलनाडु हाईकोर्ट ने दीपम परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी।
पीयूष गोयल ने डीएमके और इंडिया गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।
यह मामला संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता का है।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तमिलनाडु हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के उस आदेश का स्वागत किया, जिसमें तिरुपरनकुंद्रम में सदियों पुरानी दीपम परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी गई है। उन्होंने इसे श्रद्धालुओं को मिला न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता की पुष्टि बताया।

गोयल ने डीएमके और इंडिया गठबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे बार-बार सनातन धर्म पर हमले करते रहे हैं, तुष्टीकरण की राजनीति में लिप्त हैं और अपील तथा महाभियोग प्रस्तावों के माध्यम से न्यायपालिका को डराने का प्रयास कर रहे हैं। अदालत ने कानून-व्यवस्था से संबंधित तर्कों को सख्ती से खारिज किया है, जिससे हिंदू विरोधी सोच का पर्दाफाश होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाएं संविधान और आस्था की रक्षा कर रही हैं और देश की जनता इंडिया गठबंधन की राजनीति को दृढ़ता से खारिज करेगी। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख एवं लोकसभा सांसद अनिल बलूनी, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रमुख डॉ. संजय मयूख और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक भी मंच पर उपस्थित थे।

गोयल ने कहा कि यह अत्यंत संतोष की बात है कि तमिलनाडु के हाईकोर्ट ने आज दिए गए अपने डिवीजन बेंच के आदेश के माध्यम से तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों पर स्थित इस बहुत ही प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर के श्रद्धालुओं को न्याय दिया है, जहां भगवान मुरुगन विराजमान हैं। इस स्थान पर सदियों से भगवान कार्तिकेय की श्रद्धा में दीप प्रज्वलित किए जाते रहे हैं। इस वर्ष यह दीपम 4 दिसंबर 2025 को प्रज्वलित किया जाना प्रस्तावित था।

उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, उनके बेटे उदययनिधि स्टालिन और डीएमके के अन्य वरिष्ठ नेता लगातार सनातन धर्म का अपमान करते रहे हैं। 2 सितंबर 2023 को उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को समाप्त करने की बेहद आपत्तिजनक मांग की थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील दायर की। इससे स्पष्ट होता है कि डीएमके और इंडिया गठबंधन की हिंदू धर्म के प्रति नफरत है।

गोयल ने महाभियोग प्रस्ताव की दस्तावेज़ दिखाते हुए कहा कि यही मानसिकता न्यायमूर्ति स्वामिनाथन के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव में भी दिखाई देती है। यह प्रस्ताव इंडिया गठबंधन के विभिन्न सांसदों द्वारा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि जो लोग खुद को संविधान का रक्षक बताते हैं, वे न्यायपालिका को डराने का प्रयास कर रहे हैं। आज मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने थिरुपरंकुंड्रम दीपस्थल मामले में निर्णायक निर्देश दिए हैं।

गोयल ने कहा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा कानून और व्यवस्था में संभावित समस्याओं का जो तर्क पेश किया गया था, उसे हाईकोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था का भय केवल राज्य अधिकारियों द्वारा बनाया गया काल्पनिक भूत था।

इस फैसले ने डीएमके सरकार और डीएमके नेताओं की असली मानसिकता को उजागर कर दिया है। अदालत के निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि डीएमके और इंडिया गठबंधन हिंदू विरोधी हैं।

गोयल ने कहा कि यह तमिलनाडु की जनता के लिए एक चेतावनी है। देश की जनता को इंडिया गठबंधन, कांग्रेस पार्टी, डीएमके और अन्य दलों की इस सोच से खुद को बचाना होगा। भारत कभी भी तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय राजनीति में तुष्टीकरण की राजनीति पर भी प्रकाश डालता है। संविधान का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों का कर्तव्य है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला क्या था?
हाईकोर्ट ने तिरुपरनकुंद्रम में दीपम परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी है।
पीयूष गोयल ने किस पर आरोप लगाया है?
उन्होंने डीएमके और इंडिया गठबंधन पर सनातन धर्म के खिलाफ हमले करने का आरोप लगाया है।
क्या यह मामला सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता का है?
यह मामला संविधान का सम्मान और तुष्टीकरण की राजनीति पर भी है।
राष्ट्र प्रेस
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