दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती के मामले में मध्य प्रदेश सरकार और ईसीआई को नोटिस जारी किया
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती मामले में नोटिस जारी किया।
- अदालत ने फिलहाल किसी भी राहत से इनकार किया।
- राजेंद्र भारती ने अपनी सजा को चुनौती दी है।
- अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।
- दतिया सीट पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर रोक नहीं लगाई गई।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती से संबंधित मामले में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई की, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, अदालत ने इस दौरान भारती को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से मना कर दिया है।
राजेंद्र भारती ने ग्रामीण विकास बैंक घोटाले से जुड़ी अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देने के लिए कई याचिकाएं दायर की हैं। 1 अप्रैल को, दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है।
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से उनकी याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी है। इसके साथ ही, अदालत ने उस अलग याचिका पर भी नोटिस जारी किया है, जिसमें भारती ने अपनी सजा और दोषसिद्धि पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने इस पर अभी तत्काल राहत नहीं दी है।
इसके अतिरिक्त, राजेंद्र भारती ने एक और याचिका दाखिल की है, जिसमें चुनाव आयोग से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह दतिया विधानसभा सीट पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा न करे। यह सीट उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई है। हालांकि, अदालत ने इस मांग पर भी फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई और चुनाव प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी है।
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की है, जहां सभी पक्षों के जवाबों पर विचार किया जाएगा और आवश्यकता पड़ी तो अंतरिम राहत पर निर्णय लिया जाएगा।
राजेंद्र भारती ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि चुनाव कार्यक्रम घोषित हो जाता है, तो उनके राजनीतिक करियर को अपूरणीय नुकसान होगा जबकि उनकी अपील अभी लंबित है।
यह ध्यान देने योग्य है कि 28 वर्ष पुराने सहकारी बैंक घोटाले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी, जिससे वे वर्तमान में जेल से बाहर हैं। हालांकि सजा के बाद उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई, जिससे दतिया सीट खाली हो गई और उपचुनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।