तमिलनाडु मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट में दायर की समीक्षा याचिका, कथित रिश्वतखोरी मामले में एफआईआर आदेश को दी चुनौती

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तमिलनाडु मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट में दायर की समीक्षा याचिका, कथित रिश्वतखोरी मामले में एफआईआर आदेश को दी चुनौती

सारांश

तमिलनाडु के मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल कर कथित रिश्वतखोरी मामले में एफआईआर के आदेश को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बिना सुनवाई आदेश पारित होने का तर्क दिया। अदालत ने एफआईआर पर रोक से इनकार किया और मामला जून तक स्थगित किया।

Key Takeaways

केएन नेहरू ने 28 अप्रैल 2026 को मद्रास हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की। 20 फरवरी 2026 के आदेश में डीवीएसी को कथित रिश्वतखोरी मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि आदेश बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया। अदालत ने एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने की माँग खारिज की। मामले की अगली सुनवाई जून 2026 के अंतिम सप्ताह में निर्धारित। राज्यसभा सांसद आईएस इनबादुरई की अवमानना याचिका भी विचाराधीन है।

तमिलनाडु के नगर प्रशासन, शहरी एवं जल आपूर्ति मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश की समीक्षा की माँग करते हुए याचिका दायर की है, जिसमें नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में नियुक्तियों से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह याचिका 28 अप्रैल 2026 को चेन्नई में दायर की गई। मामला अब जून के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

मूल आदेश की पृष्ठभूमि

20 फरवरी 2026 को मद्रास हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के आधार पर भ्रष्टाचार के प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाते हुए निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक (डीवीएसी) को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने उस समय राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि ईडी की रिपोर्ट पर कार्रवाई में देरी गंभीर मामलों में स्वीकार्य नहीं है।

मंत्री के वकील की दलीलें

मंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष तर्क दिया कि यह आदेश बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 4 फरवरी को कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी नोटिस अवैध था, क्योंकि वह खंडपीठ द्वारा नहीं बल्कि रजिस्ट्री द्वारा जारी किया गया था। रोहतगी ने तर्क दिया कि यह नोटिस कार्यवाही समाप्त होने के बाद प्राप्त हुआ, जिससे मंत्री को निष्पक्ष सुनवाई से वंचित होना पड़ा।

अदालत की टिप्पणी और अगली सुनवाई

पीठ ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि यह स्पष्ट नहीं है कि केएन नेहरू को औपचारिक रूप से नोटिस दिया गया था या नहीं। मामले की विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए अदालत ने इसे गर्मी की छुट्टियों के बाद जून के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया। रोहतगी ने एफआईआर दर्ज करने से रोक लगाने की माँग भी की, किंतु अदालत ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि 20 फरवरी के आदेश में स्पष्ट रूप से नेहरू के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं था।

अवमानना याचिका का उल्लेख

सुनवाई के दौरान राज्यसभा सांसद आईएस इनबादुरई द्वारा दायर अवमानना याचिका का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने पहले के आदेश का पालन न होने का आरोप लगाया है। उनके वकील ने स्पष्ट किया कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि एफआईआर दर्ज करने में देरी समीक्षा याचिका दायर करने के कारण हुई, जो अब विचाराधीन है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई जून 2026 के अंतिम सप्ताह में होनी है, जब अदालत समीक्षा याचिका पर विस्तृत सुनवाई करेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या डीवीएसी तब तक एफआईआर दर्ज करती है अथवा अदालत के अगले निर्देश की प्रतीक्षा करती है।

Point of View

जो न्यायपालिका की सतर्कता को दर्शाता है। जून की सुनवाई न केवल नेहरू के भविष्य, बल्कि राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र की विश्वसनीयता की भी परीक्षा लेगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

केएन नेहरू के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी मामला क्या है?
नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में नियुक्तियों में कथित रिश्वतखोरी का यह मामला है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय ने दस्तावेज़ साझा किए थे। मद्रास हाईकोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को इन दस्तावेजों में भ्रष्टाचार के प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाते हुए डीवीएसी को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
मद्रास हाईकोर्ट ने 20 फरवरी का आदेश क्यों दिया था?
अदालत ने ईडी द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों में भ्रष्टाचार के प्रथम दृष्टया सबूत देखते हुए डीवीएसी को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार की इस देरी के लिए आलोचना भी की थी।
केएन नेहरू की समीक्षा याचिका में क्या तर्क दिए गए हैं?
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि आदेश बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित हुआ और 4 फरवरी का नोटिस रजिस्ट्री द्वारा अवैध रूप से जारी किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस कार्यवाही समाप्त होने के बाद मिला, जिससे निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित हुआ।
क्या एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाई गई है?
नहीं, अदालत ने एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने की माँग खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 फरवरी के आदेश में नेहरू के विरुद्ध विशेष रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं था।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास हाईकोर्ट ने मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद जून 2026 के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया है। तब अदालत समीक्षा याचिका पर विस्तृत सुनवाई करेगी।
Nation Press