भाजपा संविधान संशोधन के लिए सांसदों की संख्या जुटाने में लगी है: हन्नान मोल्लाह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने 25 जून को नई दिल्ली में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक बहुमत जुटाने की कोशिश में है। उनके अनुसार, सरकार पिछले संसद सत्र में यह विधेयक इसलिए पारित नहीं करा सकी क्योंकि उसके पास संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं था।
मुख्य आरोप और राजनीतिक संदर्भ
मोल्लाह ने कहा कि सरकार अब अधिक सांसदों का समर्थन हासिल करके अगले सत्र में यह संशोधन विधेयक पारित कराने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इस रणनीति को पिछले 12 वर्षों की भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली का हिस्सा बताया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस भी केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण को टालने और परिसीमन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप लगा रही है।
भाजपा पर तीखे प्रहार
सीपीआई (एम) नेता ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी प्रवर्तन निदेशालय (ED), प्रशासनिक दबाव और धन-बल के जरिये अपना जनाधार बढ़ाती है। उन्होंने कहा, "पिछले 12 साल से वे लगातार ऐसा ही कर रहे हैं और इसमें कुछ भी नया नहीं है।" उनके अनुसार, भाजपा राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर सरकारें बनाकर अपने सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ाने की रणनीति पर काम करती है।
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर विवाद
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव और 1975 के आपातकाल को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के प्रसंग में मोल्लाह ने आरोप लगाया कि सरकार इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों और विज्ञान की बड़ी खोजों को हटाकर उनकी जगह "झूठ और अंधविश्वास" को पाठ्यक्रम में डाल रही है। उनका कहना था, "वे ऐसे अनुयायी तैयार करना चाहते हैं जो बिना सोचे-समझे उनका अनुसरण करें।" भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
दल-बदल और स्पीकर की भूमिका पर सवाल
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के सांसदों द्वारा बागी सांसदों की मान्यता समाप्त करने की माँग के संदर्भ में मोल्लाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में कई राजनीतिक दलों को तोड़ा गया है। उन्होंने इसे "राजनीतिक और संवैधानिक अपराध" करार दिया और कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अक्सर सत्ता के प्रभाव में होता है। गौरतलब है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर विलंब का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में भी उठ चुका है।
नागरिकता और तृणमूल कांग्रेस पर टिप्पणी
नागरिकता के प्रश्न पर मोल्लाह ने कहा कि जो लोग इस देश में जन्मे हैं, उन्हें स्वतः नागरिक माना जाना चाहिए, लेकिन कथित तौर पर सरकार अपनी राजनीतिक जरूरत के अनुसार नागरिकता तय करना चाहती है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में गुटबाजी पर उन्होंने कहा कि अभी 3-4 गुट हैं और असली पार्टी का फैसला समय के साथ होगा — जो अंततः एकजुट होकर नियमों का पालन करेगा, वही वैध माना जाएगा। आने वाले समय में यह राजनीतिक खींचतान और गहरी होने की संभावना है।