15 जुलाई 2026
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चिदंबरम का आरोप: परिसीमन विधेयक के लिए डीएमके और एनसीपी-एसपी को साध रही भाजपा, दोनों दलों ने किया इनकार

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चिदंबरम का आरोप: परिसीमन विधेयक के लिए डीएमके और एनसीपी-एसपी को साध रही भाजपा, दोनों दलों ने किया इनकार

सारांश

चिदंबरम ने एक्स पर आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन का रास्ता साफ करने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लिए DMK और NCP-SP को साध रही है। DMK ने तुरंत इनकार किया, भाजपा ने पलटवार किया — मानसून सत्र से पहले सियासी तापमान चढ़ा।

मुख्य बातें

चिदंबरम ने 15 जुलाई 2026 को एक्स पर आरोप लगाया कि भाजपा 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लिए DMK और NCP-SP को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।
चिदंबरम के अनुसार यह विधेयक महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन और गैरिमैंडरिंग का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने कहा कि 106वें संविधान संशोधन अधिनियम से महिला आरक्षण पहले ही सुनिश्चित है, इसलिए नए विधेयक की ज़रूरत नहीं।
DMK प्रवक्ता टी.के.एस.
एलंगोवन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी भाजपा को कोई समर्थन नहीं देगी।
भाजपा नेता रोहन गुप्ता और प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने चिदंबरम के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए कि वह 131वें संविधान संशोधन विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पारित कराने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। चिदंबरम के अनुसार यह विधेयक महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन और संभावित गैरिमैंडरिंग का मार्ग प्रशस्त करने का प्रयास है।

चिदंबरम का आरोप: क्या है असली एजेंडा

चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भाजपा मानसून सत्र में 131वाँ संविधान संशोधन विधेयक दोबारा पेश करने की तैयारी में है। उनके अनुसार, यह विधेयक दिखावे के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का वादा करता है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन — अर्थात गैरिमैंडरिंग — का रास्ता साफ करना है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण के लिए 106वें संविधान संशोधन अधिनियम के ज़रिए संविधान में पहले ही संशोधन हो चुका है, इसलिए नए विधेयक की कोई संवैधानिक आवश्यकता नहीं है।

तृणमूल विभाजन के बाद नई राजनीतिक समीकरण

चिदंबरम ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) में विभाजन के बाद भाजपा कथित तौर पर NCP-SP और DMK को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, ताकि नए विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्याबल जुटाया जा सके। उन्होंने दोनों दलों को आगाह किया कि यदि वे इस विधेयक का समर्थन करते हैं, तो यह उनके अपने घोषित सिद्धांतों से समझौता होगा।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी इंडिया गठबंधन की एकजुटता पहले से ही दबाव में बताई जा रही है।

DMK और NCP-SP की प्रतिक्रिया

DMK के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने चिदंबरम के बयान के बाद स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी भाजपा को किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं देगी। उन्होंने कहा, 'भाजपा हमसे समर्थन माँग सकती है, लेकिन DMK उसे किसी भी तरह का समर्थन नहीं देगी।' चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि दोनों दल भविष्य में भी अपने रुख पर कायम रहेंगे।

भाजपा का पलटवार

भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने चिदंबरम पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता दूसरे दलों को सलाह देने में लगे हैं, जबकि पहले कांग्रेस को अपनी खुद की स्थिति सुधारनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जब कांग्रेस के पास DMK का साथ देने का मौका था, तब उसने उसे निराश किया। इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी समझ चुके हैं कि कांग्रेस अपने हितों के लिए कभी भी साथ छोड़ सकती है।'

भाजपा प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भी सवाल उठाया, 'क्या NCP या DMK ने चिदंबरम से सलाह माँगी थी?' उन्होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम नहीं चाहते कि देश की महिलाओं को उनका अधिकार मिले।

आगे क्या होगा

संसद का मानसून सत्र शुरू होने पर 131वें संविधान संशोधन विधेयक की प्रस्तुति और उस पर विभिन्न दलों का रुख राजनीतिक दृष्टि से निर्णायक होगा। DMK के स्पष्ट इनकार के बाद भाजपा के लिए आवश्यक बहुमत जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

131वाँ संविधान संशोधन विधेयक क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
131वाँ संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान करता है। विवाद इसलिए है क्योंकि आलोचकों का कहना है कि यह आरक्षण परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जो वास्तव में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का रास्ता खोलता है।
चिदंबरम ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
चिदंबरम ने आरोप लगाया है कि भाजपा मानसून सत्र में 131वाँ संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए DMK और NCP-SP को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार यह विधेयक महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन और गैरिमैंडरिंग का मार्ग प्रशस्त करता है।
DMK ने भाजपा को समर्थन देने से क्यों इनकार किया?
DMK प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी भाजपा को किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं देगी। DMK समेत दक्षिण भारतीय दलों की आशंका है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन से उत्तर भारतीय राज्यों के पक्ष में लोकसभा सीटें बढ़ेंगी।
106वाँ और 131वाँ संविधान संशोधन — दोनों में क्या फर्क है?
106वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पहले ही महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान कर चुका है। चिदंबरम का तर्क है कि इसके बाद 131वें विधेयक की संवैधानिक ज़रूरत नहीं है, और यह मुख्यतः परिसीमन के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
भाजपा ने चिदंबरम के आरोपों पर क्या कहा?
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस पहले अपनी स्थिति सुधारे, फिर दूसरों को सलाह दे। प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने सवाल किया कि क्या DMK या NCP ने चिदंबरम से सलाह माँगी थी, और आरोप लगाया कि चिदंबरम नहीं चाहते कि महिलाओं को उनका अधिकार मिले।
राष्ट्र प्रेस
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