चिदंबरम का आरोप: परिसीमन विधेयक के लिए डीएमके और एनसीपी-एसपी को साध रही भाजपा, दोनों दलों ने किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए कि वह 131वें संविधान संशोधन विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पारित कराने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। चिदंबरम के अनुसार यह विधेयक महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन और संभावित गैरिमैंडरिंग का मार्ग प्रशस्त करने का प्रयास है।
चिदंबरम का आरोप: क्या है असली एजेंडा
चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भाजपा मानसून सत्र में 131वाँ संविधान संशोधन विधेयक दोबारा पेश करने की तैयारी में है। उनके अनुसार, यह विधेयक दिखावे के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का वादा करता है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन — अर्थात गैरिमैंडरिंग — का रास्ता साफ करना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण के लिए 106वें संविधान संशोधन अधिनियम के ज़रिए संविधान में पहले ही संशोधन हो चुका है, इसलिए नए विधेयक की कोई संवैधानिक आवश्यकता नहीं है।
तृणमूल विभाजन के बाद नई राजनीतिक समीकरण
चिदंबरम ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) में विभाजन के बाद भाजपा कथित तौर पर NCP-SP और DMK को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, ताकि नए विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्याबल जुटाया जा सके। उन्होंने दोनों दलों को आगाह किया कि यदि वे इस विधेयक का समर्थन करते हैं, तो यह उनके अपने घोषित सिद्धांतों से समझौता होगा।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी इंडिया गठबंधन की एकजुटता पहले से ही दबाव में बताई जा रही है।
DMK और NCP-SP की प्रतिक्रिया
DMK के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने चिदंबरम के बयान के बाद स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी भाजपा को किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं देगी। उन्होंने कहा, 'भाजपा हमसे समर्थन माँग सकती है, लेकिन DMK उसे किसी भी तरह का समर्थन नहीं देगी।' चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि दोनों दल भविष्य में भी अपने रुख पर कायम रहेंगे।
भाजपा का पलटवार
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने चिदंबरम पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता दूसरे दलों को सलाह देने में लगे हैं, जबकि पहले कांग्रेस को अपनी खुद की स्थिति सुधारनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जब कांग्रेस के पास DMK का साथ देने का मौका था, तब उसने उसे निराश किया। इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी समझ चुके हैं कि कांग्रेस अपने हितों के लिए कभी भी साथ छोड़ सकती है।'
भाजपा प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भी सवाल उठाया, 'क्या NCP या DMK ने चिदंबरम से सलाह माँगी थी?' उन्होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम नहीं चाहते कि देश की महिलाओं को उनका अधिकार मिले।
आगे क्या होगा
संसद का मानसून सत्र शुरू होने पर 131वें संविधान संशोधन विधेयक की प्रस्तुति और उस पर विभिन्न दलों का रुख राजनीतिक दृष्टि से निर्णायक होगा। DMK के स्पष्ट इनकार के बाद भाजपा के लिए आवश्यक बहुमत जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।