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महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे: रीता बहुगुणा जोशी

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महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे: रीता बहुगुणा जोशी

सारांश

महिला आरक्षण बिल पर भाजपा की वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि ज्यादा इंतजार नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष के हंगामे को लेकर चेतावनी दी है कि उन्हें गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल का लंबा इंतजार हुआ है।
विपक्ष को इस बिल पर हंगामा करने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
इस बिल से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री का समर्थन इस बिल की पारित होने की संभावना को बढ़ाता है।
ओबीसी आरक्षण पर विवाद से बचना चाहिए।

प्रयागराज, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा की प्रमुख नेता रीता बहुगुणा जोशी ने महिला आरक्षण बिल के संदर्भ में कहा कि इस बिल का इंतजार हमलोगों ने लंबे समय तक किया है, लेकिन अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। विपक्ष जो इस बिल पर हंगामा कर रहा है, उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि पिछले 30-40 वर्षों से महिलाओं के आरक्षण पर चर्चा चल रही है। पंचायती राज में आरक्षण लागू होने के बाद से हम विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण देने की लगातार मांग कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि यह बिल कई बार सदन में पेश हुआ, लेकिन हर बार बिना चर्चा के ही अटक गया।

रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ संकल्प और प्रयासों से वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ। अब जब इसे लागू करने का समय आ गया है और प्रधानमंत्री चाहते हैं कि 2029 तक इसे पूरी तरह लागू कर लिया जाए, तो विपक्ष इसमें रुकावट डाल रहा है।

उन्होंने कहा कि यह बिल अब पारित होना चाहिए। अगर इसमें और देरी हुई तो हम इसे सहन नहीं कर पाएंगे। हम प्रधानमंत्री के आभारी हैं कि वे इस मुद्दे पर बहस करवा रहे हैं। साथ ही, विपक्ष के रवैये से हम थोड़े नाखुश भी हैं।

रीता बहुगुणा जोशी ने विपक्ष के विभिन्न विरोधों का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरू में विरोध इस बात पर था कि दलितों के साथ ईसाइयों और मुसलमानों को भी शामिल किया जा रहा है। फिर यह कहा गया कि महिलाओं को सीटें देने से पुरुषों की सीटें कम हो जाएंगी। बाद में दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता सामने आई कि परिवार नियोजन के कारण उनकी आबादी कम होने से सीटें घट जाएंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने एक शानदार फॉर्मूला निकाला है कि बिना किसी राज्य की सीटें कम किए लोकसभा की कुल सीटों में बढ़ोतरी की जाएगी। सीटें 815 से 850 के आसपास बढ़ाई जाएंगी और इनमें से 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा, न कि भविष्य की किसी जनगणना पर।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि विपक्ष अब कह रहा है कि पहले जनगणना हो जाए, फिर बात करेंगे, लेकिन क्या हम 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए और इंतजार करें? यह 131वां संविधान संशोधन है। इसे अब पारित किया जाना चाहिए। इसमें ओबीसी आरक्षण को लेकर नया विवाद खड़ा करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सामान्य सीटों में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान पहले से नहीं है।

रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि यह विधेयक पास होना चाहिए। महिलाओं को इसकी सख्त जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आज महिलाएं यह सब देख रही हैं। हम बहुत खुश हैं और पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री का आह्वान और सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिलेगा। यह संविधान संशोधन पारित होगा। अगर कोई इसका विरोध करेगा तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह मुद्दा पूरे समाज को प्रभावित करता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था है।
इस बिल का समर्थन क्यों किया जा रहा है?
इस बिल का समर्थन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या विपक्ष ने बिल का विरोध किया है?
हाँ, विपक्ष ने कई कारणों से इस बिल का विरोध किया है, जिसमें जनगणना का मुद्दा भी शामिल है।
महिला आरक्षण के लाभ क्या होंगे?
महिला आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी बन सकेंगी।
क्या यह बिल पारित होगा?
रीता बहुगुणा जोशी के अनुसार, यदि विपक्ष का रवैया नहीं बदला तो यह बिल पारित हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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