कर्नाटक भाजपा ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप, मोदी की फिर से प्रधानमंत्री बनने की आशंका
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वे नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर रहे हैं।
- विपक्ष के नेताओं को डर है कि नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
- महिला आरक्षण विधेयक से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
बेंगलुरु, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और परिसीमन के मुद्दे पर अनावश्यक विरोध कर रहे हैं। भाजपा ने कहा कि पहले विपक्ष ने इस विधेयक का स्वागत किया था, लेकिन अब वे इसका विरोध कर रहे हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता अब धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई प्रावधान नहीं है। देश भर की महिलाएं इस विधेयक का समर्थन कर रही हैं। भाजपा नेता अशोक ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी सोच में कमी है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में लोकसभा सीटों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी, इसमें कोई कमी नहीं आएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल में यह संख्या 20 से बढ़कर 30 हो जाएगी और तमिलनाडु में 39 से बढ़कर 59 हो जाएगी। फिर भी विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। विपक्षी नेताओं को डर है कि यदि यह योजना लागू हुई, तो नरेंद्र मोदी फिर से देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे। दक्षिणी राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा और किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी। विपक्षी नेताओं को विकास में कोई रुचि नहीं है और वे केवल कांग्रेस की वंशवादी राजनीति का समर्थन करने के लिए बोल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महिला आरक्षण के माध्यम से लैंगिक समानता ला रही है।
कर्नाटक भाजपा के महासचिव और विधायक वी. सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया परिसीमन का विरोध करने वाले पहले लोगों में से थे। उनका दावा था कि इससे दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा। इसके बाद, राज्य कांग्रेस के कई नेताओं ने सुनियोजित तरीके से झूठी कहानी गढ़ने का कार्य किया। आरोप है कि उनका इरादा आम जनता को गुमराह करना था। कांग्रेस ने इसी कहानी का इस्तेमाल करते हुए महिला आरक्षण पर भी हमला करने की कोशिश की।
भाजपा नेता सुनील कुमार ने कहा कि हालांकि, लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस धारणा का खंडन किया है कि संवैधानिक संशोधन विधेयक, परिसीमन संबंधी दो कानून और चुनाव कानूनों में बदलाव से दक्षिण भारत की ताकत कमजोर नहीं होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्नाटक में वर्तमान में 28 लोकसभा सीटें हैं, जो कुल 543 सीटों का 5.15 प्रतिशत है। विधेयक पारित होने के बाद कर्नाटक से सांसदों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी, जिससे लोकसभा में कर्नाटक की हिस्सेदारी 5.44 प्रतिशत हो जाएगी। इससे कर्नाटक को कोई नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के पास वर्तमान में 25 सीटें (4.60 प्रतिशत) हैं। विधेयक के बाद इसका प्रतिनिधित्व बढ़कर 38 सीटें हो जाएगा, जो 4.65 प्रतिशत होगा। तेलंगाना के पास वर्तमान में 17 सीटें (3.13 प्रतिशत) हैं। विधेयक के बाद यह बढ़कर 26 सीटें हो जाएंगी, जो 3.18 प्रतिशत होंगी। तमिलनाडु के पास वर्तमान में 39 सीटें (7.18 प्रतिशत) हैं। विधेयक के बाद यह संख्या बढ़कर 59 सीटें हो जाएगी, जिससे प्रस्तावित 816 सदस्यीय विधानसभा में इसका हिस्सा बढ़कर 7.23 प्रतिशत हो जाएगा। तमिलनाडु को भी कोई नुकसान नहीं होगा।