परिसीमन बिल पर कांग्रेस का हमला: अतुल लोंढे बोले — उत्तर-दक्षिण विभाजन का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने 16 जुलाई को मुंबई में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को 'अन्यायकारी' करार देते हुए कहा कि यह देश में उत्तर और दक्षिण के बीच गहरी खाई पैदा करेगा। उनकी यह प्रतिक्रिया राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के उस बयान के संदर्भ में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की समान बढ़ोतरी हो तो उन्हें विधेयक पर कोई आपत्ति नहीं होगी।
कांग्रेस का विरोध और मुख्य तर्क
लोंढे ने कहा, 'जहाँ तक मैंने उनके बयान को सुना और समझा है, उनका मानना है कि अगर सभी राज्यों में एक समान 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो वे बिल का विरोध नहीं करेंगे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की स्थिति इससे भिन्न है — पार्टी वर्तमान स्वरूप में इस विधेयक का विरोध करती थी, करती है और आगे भी करती रहेगी।
कांग्रेस नेता के अनुसार मौजूदा परिसीमन प्रस्ताव दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को कमज़ोर करेगा, क्योंकि जनसंख्या नियंत्रण में अग्रणी रहे दक्षिणी राज्यों को सीटों के पुनर्वितरण में नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को सत्ता के अलावा कुछ नहीं दिखता।
कुणाल कामरा विवाद पर प्रतिक्रिया
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉमेडियन कुणाल कामरा के विवादित बयान पर भी लोंढे ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के समय आस्था कहाँ थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब कई मामलों में आरोपी एसआईटी प्रमुख को अन्य आरोपियों को बचाने के लिए भेजा जाता है, तब लोगों की भावनाएँ आहत नहीं होतीं।
NEET पेपर लीक और राहुल गांधी पर BJP के आरोप
BJP ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी विदेश में अवकाश पर हैं और विपक्ष कमज़ोर हो रहा है। इस पर लोंढे ने पलटवार करते हुए कहा कि BJP को राहुल गांधी पर टिप्पणी करने से पहले यह बताना चाहिए कि NEET पेपर लीक के बाद 21 छात्रों ने आत्महत्या कर ली।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद पर बने हुए हैं। लोंढे ने महंगाई और पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण से वाहनों को होने वाले नुकसान का मुद्दा भी उठाया और सरकार से ठोस उपायों की माँग की।
आगे क्या होगा
परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता दिख रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी राज्य पहले से ही केंद्र-राज्य संबंधों और राजकोषीय हस्तांतरण को लेकर अपनी चिंताएँ जता रहे हैं। कांग्रेस के कड़े रुख से संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना है।