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असदुद्दीन ओवैसी का बयान: अल्पसंख्यकों और ओबीसी के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए

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असदुद्दीन ओवैसी का बयान: अल्पसंख्यकों और ओबीसी के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए

सारांश

असदुद्दीन ओवैसी ने महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि नए कानूनों से विपक्ष की आवाज कमजोर होगी और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी आएगी। ये बदलाव देश की एकता को प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है।
संविधान में 'भाईचारे' का सिद्धांत महत्वपूर्ण है।
दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहिए।
परिसीमन के निर्णय में पारदर्शिता होनी चाहिए।
अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा आवश्यक है।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने महिला आरक्षण पर बातचीत करते हुए कहा कि यह बिल उस समय प्रस्तुत किया गया है, जब कई क्षेत्रों में चुनाव हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह अपनी बहुमत के बल पर कानून बना रही है। यदि ये तीनों बिल कानून का रूप ले लेते हैं तो विपक्ष की आवाज इस सदन में लगभग समाप्त हो जाएगी।

ओवैसी ने कहा कि यदि इस संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल के साथ समझा जाए, तो सीटों का बंटवारा जनसंख्या के आधार पर होगा। इसका मतलब होगा कि जिनकी जनसंख्या अधिक होगी, उन्हें अधिक सीटें प्राप्त होंगी और जिनकी कम होगी, उन्हें कम सीटें मिलेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन हर 10 साल में जनगणना के आधार पर नहीं होगा, बल्कि सरकार यह तय करेगी कि कब और किस जनगणना के आधार पर होगा।

उन्होंने कहा कि वह क्षेत्रीयता का समर्थन नहीं करते, लेकिन हमारे संविधान में 'भाईचारे' का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण है, जो देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करता है। ये तीनों बिल इस भावना के खिलाफ हैं।

ओवैसी ने कहा कि यदि ऐसा हुआ, तो उत्तर भारत का वर्चस्व बढ़ेगा और दक्षिण भारत की निर्भरता बढ़ेगी। दक्षिणी राज्यों का देश की जीडीपी और टैक्स राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन उन्हें कम प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने सच्चर कमेटी का उल्लेख करते हुए कहा कि मुस्लिम अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को सीमित किया गया है और परिसीमन से यह स्थिति और खराब हो सकती है।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि यदि लोकसभा में सीटों का पुनर्वितरण होता है, तो कुछ राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा और कुछ का घटेगा। यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को पहले ही वोटर सूची में संशोधन, बुलडोजर कार्रवाई और अन्य नीतियों के माध्यम से हाशिए पर रखा जा रहा है।

ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम देश को एक संघीय ढांचे से एक केंद्रीकृत व्यवस्था की ओर ले जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कनाडा जैसे देशों के समान एक संतुलित मॉडल अपनाया जाना चाहिए, जिसमें राज्यों को बराबर प्रतिनिधित्व मिले।

उन्होंने सरकार से अपील की कि अल्पसंख्यकों, ओबीसी और दक्षिणी राज्यों के हितों की अनदेखी न की जाए, क्योंकि इससे देश की एकता और लोकतंत्र कमजोर हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है, जिससे उनकी आवाज को सुना जा सके।
असदुद्दीन ओवैसी ने किन मुद्दों पर चिंता जताई?
उन्होंने अल्पसंख्यकों और ओबीसी के हितों की अनदेखी, परिसीमन और क्षेत्रीय असमानता पर चिंता व्यक्त की।
परिसीमन का क्या अर्थ है?
परिसीमन का अर्थ है चुनावी क्षेत्रों का पुनर्गठन, जो जनसंख्या के आधार पर किया जाता है।
सच्चर कमेटी क्या है?
सच्चर कमेटी एक रिपोर्ट है जो मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करती है।
सरकार का केंद्रीयकरण से क्या तात्पर्य है?
सरकार का केंद्रीयकरण का मतलब है कि सभी निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिए जाएंगे, जो राज्य सरकारों की स्वतंत्रता को सीमित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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