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वंदे मातरम बिल: बिहार भाजपा का पूर्ण समर्थन, अपमान पर सख्त कानून की माँग

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वंदे मातरम बिल: बिहार भाजपा का पूर्ण समर्थन, अपमान पर सख्त कानून की माँग

सारांश

मानसून सत्र में पेश होने वाले वंदे मातरम बिल को बिहार भाजपा का पूरा समर्थन मिल गया है। अध्यक्ष संजय सरावगी से लेकर सांसद रविशंकर प्रसाद तक — सभी ने एक सुर में कहा कि राष्ट्रगीत के अपमान पर 'जन गण मन' जैसी ही सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्य बातें

बिहार भाजपा ने मानसून सत्र में पेश होने वाले वंदे मातरम बिल को पूर्ण समर्थन दिया।
भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि राष्ट्रगीत के अपमान पर राष्ट्रगान के समान सख्त कानूनी कार्रवाई उचित है।
मंत्री अशोक चौधरी के अनुसार बिल में 'वंदे मातरम' गाना/पढ़ना अनिवार्य होगा और अपमान पर कार्रवाई का प्रावधान होगा।
मंत्री श्रवण कुमार ने अनजाने चूक के लिए समीक्षा और जानबूझकर अपमान के लिए कठोर दंड का समर्थन किया।
सांसद रविशंकर प्रसाद ने 'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ते हुए इसके विरोध को गलत सोच बताया।
विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार ने बिल का स्वागत करते हुए इसे जल्द लागू करने की अपेक्षा जताई।

मानसून सत्र में प्रस्तावित वंदे मातरम बिल को लेकर बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने 19 जुलाई को पटना में एकजुट होकर पूर्ण समर्थन जताया। नेताओं का कहना है कि राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष सम्मान मिलना चाहिए और इसके अपमान या गायन में बाधा डालने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।

बिहार भाजपा अध्यक्ष का बयान

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों देश के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले केवल राष्ट्रगान को आधिकारिक मान्यता प्राप्त थी और उसके अपमान पर कानूनी कार्रवाई होती थी। सरावगी के अनुसार, अब 'वंदे मातरम' के अपमान पर भी समान रूप से सख्त कानूनी व्यवस्था लागू करना उचित कदम है।

मंत्रियों और विधायकों की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जिस प्रकार 'जन गण मन' को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है, उसी प्रकार 'वंदे मातरम' को भी मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार इस बिल के तहत राष्ट्रगीत गाना और पढ़ना अनिवार्य होगा तथा अपमान की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।

मंत्री श्रवण कुमार ने संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि यदि कोई अनजाने में चूक करता है तो जाँच और समीक्षा का प्रावधान होना चाहिए, किंतु जानबूझकर देश का अपमान करने वालों के विरुद्ध सख्त कानून अनिवार्य है। मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा यह बिल लाना उचित है और सभी नागरिकों को इसे पढ़ना व याद करना होगा।

बिहार विधानसभा के स्पीकर प्रेम कुमार ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे जल्द से जल्द लागू किए जाने की अपेक्षा जताई। भाजपा विधायक जीवेश कुमार ने याद दिलाया कि देश आज़ादी से पहले से ही 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के रूप में गाता आ रहा है और इसका अपमान करने वालों को कठोर दंड मिलना चाहिए।

रविशंकर प्रसाद का तीखा तर्क

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने तीखे अंदाज़ में कहा कि 'वंदे मातरम' वही गीत है जिसके लिए देश के क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्योछावर किए और यह आज भी संसद में गूँजता है। उन्होंने इसके विरोध की तुलना योग के पुराने विरोध से करते हुए कहा कि जिस प्रकार आज हर कोई योग करता है, उसी प्रकार हर कोई 'वंदे मातरम' भी गाएगा।

ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को 1950 में भारत के संविधान-निर्माताओं ने राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था, जबकि 'जन गण मन' को राष्ट्रगान घोषित किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो रही है। प्रस्तावित बिल का विवरण अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुआ है और मानसून सत्र में इसके पेश होने के बाद संसदीय चर्चा का स्वरूप स्पष्ट होगा।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र में बिल के पेश होने के बाद संसद में इस पर व्यापक बहस की संभावना है। बिहार भाजपा के नेताओं के एकजुट समर्थन से यह स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस विधेयक को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इसे व्यवहार में लागू करना न्यायपालिका के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। मुख्यधारा की कवरेज समर्थन की गूँज तक सीमित है — विपक्ष की आपत्तियाँ और नागरिक स्वतंत्रता के पहलू अभी चर्चा से बाहर हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम बिल क्या है?
वंदे मातरम बिल एक प्रस्तावित कानून है जिसे मानसून सत्र में पेश किए जाने की योजना है। इसके तहत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाना या पढ़ना अनिवार्य किया जाएगा और इसके अपमान या गायन में बाधा डालने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।
बिहार भाजपा ने इस बिल का समर्थन क्यों किया?
बिहार भाजपा के नेताओं का तर्क है कि 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष सम्मान मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यह गीत स्वतंत्रता संग्राम की विरासत है और इसके अपमान पर कठोर कानून होना राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा के लिए आवश्यक है।
क्या वंदे मातरम गाना अनिवार्य होगा?
मंत्री अशोक चौधरी के अनुसार उनकी जानकारी में बिल के तहत राष्ट्रगीत गाना और पढ़ना अनिवार्य होगा। हालाँकि बिल का अंतिम मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए विस्तृत प्रावधान मानसून सत्र में स्पष्ट होंगे।
अनजाने में वंदे मातरम न गाने पर क्या होगा?
मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार अनजाने में हुई चूक के लिए जाँच और समीक्षा का प्रावधान रखा जाएगा। केवल जानबूझकर अपमान करने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वंदे मातरम और जन गण मन में कानूनी अंतर क्या है?
'जन गण मन' को 1950 में भारत का राष्ट्रगान घोषित किया गया था और इसके अपमान पर पहले से कानूनी प्रावधान हैं। 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है, किंतु अब तक इसके अपमान के लिए समकक्ष कानूनी संरक्षण नहीं था — यही अंतर पाटना इस बिल का मुख्य उद्देश्य बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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