वंदे मातरम बिल: बिहार भाजपा का पूर्ण समर्थन, अपमान पर सख्त कानून की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र में प्रस्तावित वंदे मातरम बिल को लेकर बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने 19 जुलाई को पटना में एकजुट होकर पूर्ण समर्थन जताया। नेताओं का कहना है कि राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष सम्मान मिलना चाहिए और इसके अपमान या गायन में बाधा डालने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
बिहार भाजपा अध्यक्ष का बयान
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों देश के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले केवल राष्ट्रगान को आधिकारिक मान्यता प्राप्त थी और उसके अपमान पर कानूनी कार्रवाई होती थी। सरावगी के अनुसार, अब 'वंदे मातरम' के अपमान पर भी समान रूप से सख्त कानूनी व्यवस्था लागू करना उचित कदम है।
मंत्रियों और विधायकों की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जिस प्रकार 'जन गण मन' को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है, उसी प्रकार 'वंदे मातरम' को भी मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार इस बिल के तहत राष्ट्रगीत गाना और पढ़ना अनिवार्य होगा तथा अपमान की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
मंत्री श्रवण कुमार ने संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि यदि कोई अनजाने में चूक करता है तो जाँच और समीक्षा का प्रावधान होना चाहिए, किंतु जानबूझकर देश का अपमान करने वालों के विरुद्ध सख्त कानून अनिवार्य है। मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा यह बिल लाना उचित है और सभी नागरिकों को इसे पढ़ना व याद करना होगा।
बिहार विधानसभा के स्पीकर प्रेम कुमार ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे जल्द से जल्द लागू किए जाने की अपेक्षा जताई। भाजपा विधायक जीवेश कुमार ने याद दिलाया कि देश आज़ादी से पहले से ही 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के रूप में गाता आ रहा है और इसका अपमान करने वालों को कठोर दंड मिलना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद का तीखा तर्क
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने तीखे अंदाज़ में कहा कि 'वंदे मातरम' वही गीत है जिसके लिए देश के क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्योछावर किए और यह आज भी संसद में गूँजता है। उन्होंने इसके विरोध की तुलना योग के पुराने विरोध से करते हुए कहा कि जिस प्रकार आज हर कोई योग करता है, उसी प्रकार हर कोई 'वंदे मातरम' भी गाएगा।
ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को 1950 में भारत के संविधान-निर्माताओं ने राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था, जबकि 'जन गण मन' को राष्ट्रगान घोषित किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो रही है। प्रस्तावित बिल का विवरण अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुआ है और मानसून सत्र में इसके पेश होने के बाद संसदीय चर्चा का स्वरूप स्पष्ट होगा।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र में बिल के पेश होने के बाद संसद में इस पर व्यापक बहस की संभावना है। बिहार भाजपा के नेताओं के एकजुट समर्थन से यह स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस विधेयक को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।