4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वंदे मातरम विधेयक विरोध पर तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव बोले — राष्ट्रगीत का विरोध देश की परंपरा के खिलाफ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वंदे मातरम विधेयक विरोध पर तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव बोले — राष्ट्रगीत का विरोध देश की परंपरा के खिलाफ

सारांश

संसद के मानसून सत्र में वंदे मातरम विधेयक पेश होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। तहरीक मुस्लिम शब्बान के विरोध पर तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी — कहा, धार्मिक आधार पर राष्ट्रगीत का विरोध देश की बहुलतावादी परंपरा के विरुद्ध है।

मुख्य बातें

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू; राज्यसभा में वंदे मातरम संशोधन विधेयक पेश होना है।
तहरीक मुस्लिम शब्बान ने विधेयक का विरोध करने की घोषणा की।
तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन.
रामचंद्र राव ने विरोध को 'दुर्भाग्यपूर्ण' और देश की परंपरा के खिलाफ बताया।
राव ने कहा — वंदे मातरम धार्मिक नहीं, मातृभूमि के सम्मान का राष्ट्रगीत है।
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद सहित मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख कर कहा — देशभक्ति किसी एक धर्म से नहीं जुड़ी।

तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने 20 जुलाई 2026 को कहा कि तहरीक मुस्लिम शब्बान द्वारा वंदे मातरम विधेयक का विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह देश की परंपरा के विरुद्ध है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से संबंधित संशोधन विधेयक पेश किए जाने की तैयारी के बीच यह बयान सामने आया है।

मुख्य घटनाक्रम

संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से प्रारंभ हुआ। इस सत्र में राज्यसभा में संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से जुड़ा संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जाना है। इसी पृष्ठभूमि में तहरीक मुस्लिम शब्बान ने इस विधेयक का विरोध करने की घोषणा की, जिस पर BJP नेता राव ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

राव का बयान — राष्ट्रगीत सिर्फ गीत नहीं

एन. रामचंद्र राव ने कहा कि वंदे मातरम महज एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत आज देश का राष्ट्रगीत है और आज़ादी की लड़ाई के दौरान इसने लाखों युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई थी। राव के अनुसार, 'वंदे मातरम कोई धार्मिक गीत नहीं है — यह मातृभूमि के सम्मान और देश की महानता का प्रतीक है।'

धार्मिक आधार पर विरोध को बताया अनुचित

BJP नेता ने कहा कि भारत की पहचान विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों को साथ लेकर चलने में है। उनके अनुसार, यदि कोई केवल धार्मिक आस्था के आधार पर राष्ट्रगीत का विरोध करता है, तो यह इस देश की बहुलतावादी परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद सहित अनेक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर धर्म के लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दिया था और देशभक्ति किसी एक धर्म की बपौती नहीं है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर विवाद नया नहीं है — यह बहस दशकों पुरानी है और इसमें संवैधानिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक पहलू उलझे हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि विधेयक के प्रावधानों की व्याख्या और उनके क्रियान्वयन पर स्पष्टता ज़रूरी है ताकि नागरिक स्वतंत्रता प्रभावित न हो। राव ने हालाँकि ज़ोर दिया कि राष्ट्र और उसकी पहचान से जुड़े विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार होना चाहिए।

क्या होगा आगे

मानसून सत्र में इस संशोधन विधेयक पर संसदीय बहस होने की उम्मीद है। विधेयक के समर्थकों और विरोधियों के बीच तर्क-वितर्क तेज़ होने के आसार हैं। सत्र के दौरान सरकार इस विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब विधेयक के प्रावधान पारदर्शी रूप से सामने रखे जाते। मुस्लिम संगठनों की आपत्ति को महज धार्मिक विरोध कहकर खारिज करना उस संवाद की जगह को संकरा करता है जो एक बहुलतावादी लोकतंत्र में ज़रूरी है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम संशोधन विधेयक क्या है?
यह संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से संबंधित संशोधन विधेयक है, जिसे मानसून सत्र 2026 में राज्यसभा में पेश किया जाना है। इसका उद्देश्य राष्ट्रगीत और संविधान के अपमान को कानूनी रूप से परिभाषित और罚ित करना बताया जा रहा है।
तहरीक मुस्लिम शब्बान इस विधेयक का विरोध क्यों कर रहा है?
तहरीक मुस्लिम शब्बान ने धार्मिक आधार पर इस विधेयक का विरोध करने की घोषणा की है। संगठन की आपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन BJP नेता एन. रामचंद्र राव ने इसे धार्मिक आस्था के आधार पर राष्ट्रगीत का विरोध बताया है।
एन. रामचंद्र राव ने क्या कहा?
तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कहा कि वंदे मातरम धार्मिक गीत नहीं बल्कि मातृभूमि के सम्मान का राष्ट्रगीत है और इसका विरोध देश की परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद सहित मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि देशभक्ति किसी एक धर्म से नहीं जुड़ी।
वंदे मातरम किसने लिखा और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है?
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत लाखों युवाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और भारत का राष्ट्रगीत घोषित हुआ।
मानसून सत्र 2026 में और कौन से प्रमुख विधेयक पेश होने की उम्मीद है?
20 जुलाई 2026 से शुरू हुए मानसून सत्र में वंदे मातरम संशोधन विधेयक के अलावा अन्य विधायी कार्यक्रम भी निर्धारित हैं, हालाँकि उनका विवरण सत्र की कार्यसूची पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले