वंदे मातरम विधेयक विरोध पर तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव बोले — राष्ट्रगीत का विरोध देश की परंपरा के खिलाफ
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने 20 जुलाई 2026 को कहा कि तहरीक मुस्लिम शब्बान द्वारा वंदे मातरम विधेयक का विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह देश की परंपरा के विरुद्ध है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से संबंधित संशोधन विधेयक पेश किए जाने की तैयारी के बीच यह बयान सामने आया है।
मुख्य घटनाक्रम
संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से प्रारंभ हुआ। इस सत्र में राज्यसभा में संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से जुड़ा संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जाना है। इसी पृष्ठभूमि में तहरीक मुस्लिम शब्बान ने इस विधेयक का विरोध करने की घोषणा की, जिस पर BJP नेता राव ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
राव का बयान — राष्ट्रगीत सिर्फ गीत नहीं
एन. रामचंद्र राव ने कहा कि वंदे मातरम महज एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत आज देश का राष्ट्रगीत है और आज़ादी की लड़ाई के दौरान इसने लाखों युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई थी। राव के अनुसार, 'वंदे मातरम कोई धार्मिक गीत नहीं है — यह मातृभूमि के सम्मान और देश की महानता का प्रतीक है।'
धार्मिक आधार पर विरोध को बताया अनुचित
BJP नेता ने कहा कि भारत की पहचान विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों को साथ लेकर चलने में है। उनके अनुसार, यदि कोई केवल धार्मिक आस्था के आधार पर राष्ट्रगीत का विरोध करता है, तो यह इस देश की बहुलतावादी परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद सहित अनेक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर धर्म के लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दिया था और देशभक्ति किसी एक धर्म की बपौती नहीं है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर विवाद नया नहीं है — यह बहस दशकों पुरानी है और इसमें संवैधानिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक पहलू उलझे हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि विधेयक के प्रावधानों की व्याख्या और उनके क्रियान्वयन पर स्पष्टता ज़रूरी है ताकि नागरिक स्वतंत्रता प्रभावित न हो। राव ने हालाँकि ज़ोर दिया कि राष्ट्र और उसकी पहचान से जुड़े विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार होना चाहिए।
क्या होगा आगे
मानसून सत्र में इस संशोधन विधेयक पर संसदीय बहस होने की उम्मीद है। विधेयक के समर्थकों और विरोधियों के बीच तर्क-वितर्क तेज़ होने के आसार हैं। सत्र के दौरान सरकार इस विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेगी।